मोदी मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच प्रधानमंत्री मोदी आज से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं। मोदी की वतन वापसी 12 जुलाई को होगी।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र होगा। हालांकि सत्र के एक सप्ताह पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना न के बराबर ही है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार लंबा खिंच सकता है और फिर अगस्त-सितंबर में होने की संभावना दिख रही है। लेकिन होना तय है।
मोदी मंत्रिमंडल की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में मोदी सरकार की बात करें तो मोदी कैबिनेट में इस समय मोदी को मिलाकर कुल 70 मंत्री हैं। 30 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और 35 राज्यमंत्री शामिल हैं। मोदी कैबिनेट में अधिकतम 81 मंत्री बन सकते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या मोदी मंत्रिमंडल विस्तार की संवैधानिक सीमा 81 पर पहुंचेगा या अभी मंत्रिमंडल का जितना आकार हैं, उसके आसपास ही रहने वाला है? प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कैसा होगा? आठ महीने बाद पांच राज्यों में चुनाव हैं, तो क्या चुनाव वाले राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी?
अभी मोदी सरकार में राज्यों का प्रतिनिधित्व देखें तो इस समय उत्तर प्रदेश से 10 (मोदी को मिलाकर 11), बिहार से 8, गुजरात से 5, महाराष्ट्र से 6, मध्य प्रदेश से 6, कर्नाटक से 5, राजस्थान से 4, हरियाणा से 3, आंध्र प्रदेश से 3, ओडिशा से 3, असम से 2, झारखंड से 2, पश्चिम बंगाल से 2, तेलंगाना से 2, गोवा से 1, केरल से 1, हिमाचल प्रदेश से 1, उत्तराखंड से 1, अरुणाचल प्रदेश से 1, पंजाब से 1, दिल्ली से 1 और छत्तीसगढ़ से 1 मंत्री है।
यूपी में सबसे बड़ा बदलाव
मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में राज्यों का प्रतिनिधित्व में बदलाव होना तय है। सबसे बड़ा बदलाव उत्तर प्रदेश से दिखेगा क्योंकि आठ महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं और अभी सबसे ज्यादा मंत्री 11 उत्तर प्रदेश से हैं। उत्तर प्रदेश से कई नए चेहरों को मौका देते समय जातिगत और सामाजिक समीकरण ध्यान में रखा जाएगा। लोकसभा चुनाव में यूपी से बुरी हार का सामना बीजेपी को करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश से सहयोगी दल से जयंत चौधरी और अनुप्रिया पटेल मंत्रिमंडल में बने रहेंगे।
बिहार में भी फेरबदल तय
दूसरा बड़ा बदलाव बिहार से दिखेगा। बिहार में भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री बना लिया है। बिहार से आठ मंत्री हैं। सहयोगी दल नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी में से मांझी की छुट्टी हो सकती है। नीतीश के ललन सिंह की जगह किसी दूसरे को मंत्री बनाया जा सकता है। बिहार से बीजेपी के मंत्रियों में भी फेरबदल होगा। गिरिराज सिंह बाहर हो सकते हैं। नित्यानंद राय को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की भी बदल सकती है तस्वीर
गुजरात से कुल 5 मंत्री हैं। चार कैबिनेट और एक राज्य मंत्री। कैबिनेट में अमित शाह, जयशंकर, मांडविया और सीआर पाटिल हैं। सभी कैबिनेट मंत्री बने रहेंगे लेकिन राज्य मंत्री नीमूबेन बंभानिया की जगह गुजरात से किसी दूसरे को जगह मिल सकती है।
महाराष्ट्र से कुल 6 मंत्री हैं, 2 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री। कैबिनेट में नितिन गडकरी और पीयूष गोयल हैं। दोनों मंत्री बने रहेंगे। पीयूष का विभाग बदलकर कोई भारी मंत्रालय दिया जा सकता है। महाराष्ट्र से महिला राज्य मंत्री रक्षा खडसे बाहर हो सकती हैं। शिवसेना से श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। रामदास आठवले बने रहेंगे।
मध्य प्रदेश की बात करें तो मध्य प्रदेश से शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीरेंद्र खटीक कैबिनेट मंत्री हैं। शिवराज और ज्योतिरादित्य बने रहेंगे। ज्योतिरादित्य को बड़ा मंत्रालय मिल सकता है। वीरेंद्र खटीक के बाहर होने के आसार हैं। बीडी शर्मा मंत्री बन सकते हैं। सावित्री ठाकुर और दुर्गादास उईके की जगह किसी अन्य को जगह मिल सकती है।
चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस
मंत्रिमंडल में कर्नाटक और राजस्थान की स्थिति
कर्नाटक से 3 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्री हैं- निर्मला सीतारमण, प्रहलाद जोशी और जेडीएस के कुमारस्वामी। प्रहलाद जोशी की जगह चित्रदुर्ग सांसद गोविंद करजोल मंत्री बन सकते हैं। गोविंद करजोल दक्षिण से बीजेपी के इकलौते एससी सांसद हैं। ऐसे में करजोल के मंत्री बनने की संभावना पूरी है। 2028 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजस्थान में भी कर्नाटक की तरह 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान से 2 कैबिनेट, 1 स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और 1 राज्यमंत्री हैं। राजस्थान से भूपेंद्र यादव और गजेंद्र सिंह शेखावत मंत्री बने रहेंगे। अर्जुन राम मेघवाल कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं। राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी बाहर होंगे और अभी राज्यसभा भेजे गए और राजस्थान के साथ हरियाणा और पश्चिमी यूपी के जाटों को संदेश देने के लिए सतीश पूनिया राज्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।
बंगाल को मिल सकती है बड़ी जगह
बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद बंगाल को एक कैबिनेट मंत्री मिलना तय है। अभी बंगाल से एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। दो राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर और सुकांत मजूमदार हैं। बंगाल से ममता से बगावत करने वाले 20 सांसदों में से किसी एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में बंगाल का प्रतिनिधित्व मोदी सरकार में बढ़ना तय है।
ओडिशा और हरियाणा में भी हो सकते हैं बदलाव
ओडिशा की बात करें तो ओडिशा से 3 मंत्री हैं और तीनों कैबिनेट में हैं- धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव और जुएल ओराम। धर्मेंद्र प्रधान और अश्विनी वैष्णव बने रहेंगे। जुएल ओराम को बाहर किया जा सकता है। एक राज्यमंत्री ओडिशा से बनाया जा सकता है।
दिल्ली से सटे हरियाणा से 3 मंत्री हैं- मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट तो राव इंद्रजीत और कृष्णपाल गुर्जर राज्यमंत्री हैं। कृष्णपाल गुर्जर की जगह किसी और को मंत्री बनाया जा सकता है। हरियाणा के प्रभारी और राजस्थान से राज्यसभा सांसद सतीश पुनिया को मंत्री बनाकर हरियाणा के जाटों को संदेश दिया जा सकता है।
असम और आंध्र प्रदेश में बदलाव का आसार नहीं
असम से दो मंत्री हैं, कैबिनेट में पूर्व सीएम सर्वानंद सोनोवाल और राज्यमंत्री पवित्र मार्गरेटा। असम से कोई बदलाव नजर नहीं आता।
आंध्र प्रदेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में वर्तमान में तीन मंत्री शामिल हैं। दो टीडीपी से (दो कैबिनेट) और एक बीजेपी से भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा राज्य मंत्री हैं। आंध्र प्रदेश में कोई बदलाव नजर नहीं आता है।
मंत्रिमंडल में बाकी राज्यों की स्थिती
तेलंगाना से मोदी सरकार में दो मंत्री शामिल हैं- जी. किशन रेड्डी और बंदी संजय कुमार। दोनों में से एक को बदला जा सकता है।
केरल से नरेंद्र मोदी सरकार में वर्तमान में एकमात्र केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी हैं। केरल से आने वाले एक अन्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपना राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद जून 2026 में मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में गोपी बने रहेंगे। केरल में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ चुनाव होंगे। तेलंगाना पर भाजपा का फोकस है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद तोखन साहू पहली बार सांसद बनकर राज्य मंत्री बने, इस विस्तार में छत्तीसगढ़ से किसी और को मंत्री बनाया जा सकता है।
गोवा में चुनाव को देखते हुए गोवा से मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपाद यशो नाइक बने रहेंगे। हिमाचल से नड्डा का मंत्री बना रहना तय है।
उत्तराखंड में कुछ ही माह बाद चुनाव होने के कारण उत्तराखंड को लेकर भी फैसला लिया जा सकता है। उत्तराखंड से मोदी सरकार में अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा राज्य मंत्री हैं। अजय टम्टा की जगह अनिल बलूनी को मंत्री बनाया जा सकता है। अरुणाचल प्रदेश से नरेंद्र मोदी सरकार में किरेन रिजिजू केंद्रीय मंत्री हैं।
जातिगत समीकरण पर भी नजर
मोदी सरकार में जातिगत समीकरणों को देखें तो मोदी सरकार में अभी ओबीसी के 27 मंत्री हैं। ऐसे में यूपी का चुनाव देखते हुए ओबीसी मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है। अनुसूचित जाति के 10 मंत्री हैं। इसमें भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। अनुसूचित जनजाति के 5 मंत्री हैं। इतने ही रहने की संभावना है। अल्पसंख्यक समुदाय के 5 मंत्री हैं। इसमें कटौती हो सकती है। ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व बढ़ना तय है।
बड़े मंत्रालयों में बदलाव नहीं
मोदी सरकार में चार बड़े मंत्रालयों की बात करें तो गृह, रक्षा, विदेश और वित्त मंत्रालय में फेरबदल की संभावना न के बराबर है। अमित शाह गृह मंत्री, राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री, जयशंकर विदेश और निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री बनी रहेंगी। विवादास्पद मंत्रियों की बात करें तो एचआरडी मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, इथेनॉल को लेकर चर्चा में आए नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को बदलने की अटकलें हैं। धर्मेंद्र प्रधान और नितिन गडकरी बने रहेंगे। हरदीप पुरी की छुट्टी हो सकती है।
सहयोगी दलों की बात करें तो शिवसेना शिंदे को एक कैबिनेट मंत्री मिल सकता है। सुनेत्रा पवार की एनसीपी को एक राज्यमंत्री पद दिया जा सकता है। जीतन राम मांझी को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। टीएमसी से अलग गुट का शामिल होना तय है। महाराष्ट्र में शरद पवार से बातचीत जारी है, अगर शरद पवार एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो उनकी बेटी सुप्रिया सुले का मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना तय है।
पंजाब से एकमात्र मंत्री बिट्टू को राज्यसभा नहीं भेजने से पंजाब से कोई मंत्री नहीं है। ऐसे में आम आदमी पार्टी से बगावत कर बीजेपी में आने वाले 7 सांसदों में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। राघव चड्ढा की सबसे ज्यादा चर्चा है।
सहयोगी दलों की भी रहेगी अहम भूमिका
दिल्ली से मोदी सरकार में राज्य मंत्री रहे हर्ष मल्होत्रा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली से भी एक मंत्री बनाया जाएगा। ऐसे में सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज का नाम आगे है।
आगे क्या होगा असर
कुल मिलाकर देखें तो मोदी मंत्रिमंडल में 25 से 30 मंत्रियों में फेरबदल हो सकता है, जिसमें विभाग बदलने से लेकर मंत्रिमंडल से बाहर होना शामिल है।
यह भी सच है कि मंत्रिमंडल में बदलाव करना मोदी के लिए कोई संवैधानिक मजबूरी नहीं है। ऐसे में मोदी का जब मन करेगा तब होगा। जुलाई के मध्य में, अगस्त के अंतिम सप्ताह में या सितंबर के पहले सप्ताह में मोदी सरकार का विस्तार या फेरबदल हो सकता है।
जब भी होगा, बड़ा बदलाव होगा। कई दिग्गज नपेंगे, कुछ नौसिखिए दिखेंगे।
नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है। इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।
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