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Mount Everest Insurance Scam: आपदा को बनाया धंधा, बीमा कंपनियों को लगाया 165 करोड़ का चूना

Mount Everest Insurance Scam: आपदा को बनाया धंधा, बीमा कंपनियों को लगाया 165 करोड़ का चूना

News In Short

  • ट्रेकिंग गाइड से जुड़े लोग आपस में मिलकर पर्यटकों को बेकिंग सोडा देकर जानबूझकर बीमार करते थे।

  • हेलीकॉप्टर कंपनियों ने फर्जी रेस्क्यू दिखाकर 165 करोड़ रुपए वसूले।

  • नेपाल पुलिस (CIB) ने इस घोटाले में 32 लोगों को आरोपी बनाया है।

  • 12 मार्च, 2026 को अदालत में इस धोखाधड़ी की चार्जशीट पेश की गई।

  • एक ही हेलीकॉप्टर चक्कर का कई कंपनियों से अलग-अलग क्लेम लिया गया।

News In Detail

माउंट एवरेस्ट पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां पर्यटकों की जान बचाने वाला तंत्र ही सौदागर बन गया। नेपाल पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय बीमा घोटाले (Insurance Fraud) का पर्दाफाश किया है। इस खेल में पर्यटकों की जान जोखिम में डाली गई। इसमें कुल 165 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का अनुमान लगाया गया है।

एवरेस्ट पर रेस्क्यू के नाम पर धोखा

नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में जीवनरक्षक हेलीकॉप्टर रेस्क्यू अब बड़े बीमा घोटाले का जरिया बन गया है। कुछ ट्रेकिंग एजेंसियां और शेरपा, पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा या दवाएं मिलाकर उन्हें कृत्रिम रूप से बीमार (एल्टीट्यूड सिकनेस) कर देते हैं।

इसके बाद, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट (फर्जी मेडिकल बिल) और जाली फ्लाइट दस्तावेजों के सहारे अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपए वसूले जा रहे हैं। इस सिंडिकेट में कई नामी चार्टर और रेस्क्यू कंपनियां भी शामिल हैं।

कैसे करते थे पर्यटकों को बीमार

जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ट्रेकिंग गाइड पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिला देते थे। इससे पर्यटकों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत होती थी। इसके लक्षण बिल्कुल एल्टीट्यूड सिकनेस जैसे लगते थे। घबराए पर्यटकों को जबरन डराकर हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए मनाया जाता था।

इस साजिश में सिर्फ गाइड ही नहीं, पूरा सिंडिकेट शामिल था। इसमें हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल के कर्मचारी भी साझीदार थे। एक ही उड़ान में कई पर्यटकों को लाया जाता था। लेकिन बीमा कंपनियों से अलग-अलग उड़ानों का मोटा पैसा वसूला गया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को चपत लगाई गई।

फर्जी बिलिंग और कागजी खेल

रेस्क्यू के दौरान एक ही उड़ान में कई पर्यटकों को बिठाकर बीमा कंपनियों से अलग-अलग पूरा बिल वसूला जाता है। इस खेल में चार हजार के खर्च को 12 हजार डॉलर तक का क्लेम बना दिया जाता है।

सीनियर डॉक्टरों के जाली डिजिटल सिग्नेचर और फर्जी फ्लाइट रिकॉर्ड्स के जरिए अस्पताल में नकली डॉक्यूमेंट्स तैयार होते हैं। कई बार पर्यटक कैंटीन में बैठे होते हैं, जबकि कागजों में उन्हें गंभीर हालत में भर्ती दिखाया जाता है।

नेपाल पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है। अब तक 32 लोगों पर केस दर्ज किया जा चुका है। इनमें से 9 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच में 300 से अधिक रेस्क्यू पूरी तरह फर्जी पाए गए। इस मामले की चार्जशीट 12 मार्च, 2026 को दायर की गई।

तीन बड़ी कंपनियों के 6 दिग्गज गिरफ्तार

एवरेस्ट क्षेत्र में फैले इस खूनी खेल की जांच जनवरी में शुरू हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख रेस्क्यू कंपनियों के 6 उच्चाधिकारियों को दबोच लिया है। इस सिंडिकेट में शेरपा, ट्रेकिंग एजेंसियां, हेलीकॉप्टर कंपनियां और अस्पताल शामिल थे, जो मिलकर करोड़ों का मुनाफा बांटते थे।

करोड़ों का फर्जीवाड़ा

इस पूरे स्कैंडल के जरिए करीब 188 करोड़ रुपए (19.69 मिलियन डॉलर) की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। एक कंपनी ने 1,248 रेस्क्यू ऑपरेशंस में से 171 को पूरी तरह फर्जी दिखाया। दूसरी और तीसरी कंपनियों ने भी दर्जनों झूठे दावों के जरिए करोड़ों की चपत लगाई। अब सरकारी पक्ष ने दोषियों पर 107 करोड़ रुपये के भारी जुर्माने की मांग की है।

पुराना मर्ज और सिस्टम की विफलता

यह स्कैम पहली बार 2018 में चर्चा में आया था। सरकार ने तब कई कड़े नियमों का ऐलान किया था। बिचौलियों को हटाकर टूर ऑपरेटर्स को जिम्मेदार बनाया गया था। इसके बावजूद 2022 से 2025 के बीच भ्रष्टाचार और बढ़ गया। अब दोषियों से भारी जुर्माने की मांग की जा रही है।

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