मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए बीएड, एमएड, बीपीएड, एमपीएड, बीएलएड और इंटीग्रेटेड बीएड-एमएड कोर्सों की ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो मई से रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज सत्यापन तो शुरू हो गया, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि अब तक अधिकांश कॉलेजों का निरीक्षण और संबद्धता प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
ऐसे में हजारों विद्यार्थी यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर किस कॉलेज में प्रवेश मिलेगा और कितनी सीटें उपलब्ध होंगी।एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर छात्र लगातार लॉगिन कर कॉलेज और सीट विकल्प देखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सूची ही अपलोड नहीं हुई है।
छात्रों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत क्या?
- काउंसलिंग शुरू, लेकिन कॉलेजों की सूची अधूरी।
- सीटों की संख्या अब तक स्पष्ट नहीं।
- कई विश्वविद्यालयों में निरीक्षण प्रक्रिया लंबित।
- विद्यार्थी पोर्टल फीस जमा कर रहे, लेकिन विकल्प लॉक नहीं हो पा रहे।
- 30 मई तक प्रथम चरण की अंतिम तिथि तय।
- 700 से ज्यादा कॉलेज, फिर भी तस्वीर साफ नहीं।
700 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज
प्रदेश में एनसीटीई से मान्यता प्राप्त 700 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज संचालित हैं। इनमें बीएड और अन्य शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं, लेकिन इस बार विभाग के पास भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है कि किन कॉलेजों को प्रवेश की अनुमति मिलेगी। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (Barkatullah University )समेत कई विश्वविद्यालय अभी निरीक्षण दल गठित करने और संबद्धता प्रक्रिया पूरी करने में लगे हुए हैं। यानी काउंसलिंग शुरू हो गई, लेकिन कॉलेजों की अंतिम स्थिति अब भी तय नहीं है।
छात्र बोले- फीस जमा कर रहे
कई विद्यार्थियों का कहना है कि वे एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर बार-बार लॉगिन कर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज सत्यापन के बाद वे कॉलेज और सीट विकल्प लॉक करना चाहते हैं, लेकिन पोर्टल पर संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस प्रक्रिया में छात्र पोर्टल शुल्क भी जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही कि आखिर प्रवेश किन संस्थानों में होगा।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
शिक्षाविदों और प्रोफेसरों का कहना है कि काउंसलिंग शुरू करने से पहले कॉलेज निरीक्षण और संबद्धता प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी। बिना सीट मैट्रिक्स और कॉलेज सूची जारी किए प्रवेश प्रक्रिया शुरू करना छात्रों के हित में सही कदम नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति बन रही है और आगे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
बढ़ सकती हैं काउंसलिंग की तारीखें
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रथम चरण के लिए 30 मई अंतिम तिथि तय की है। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि विश्वविद्यालय समय पर संबद्धता प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। यदि कॉलेज सूची और सीट मैट्रिक्स समय पर जारी नहीं हुए, तो विभाग को काउंसलिंग की तारीख आगे बढ़ानी पड़ सकती है।
समझिए पूरा मामला आसान भाषा में
इस बार स्थिति ऐसी बन गई है कि पहले काउंसलिंग शुरू कर दी गई और बाद में कॉलेजों की तैयारी पूरी की जा रही है।
यही वजह है कि छात्र रजिस्ट्रेशन तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि आखिर उनके पास कॉलेज चुनने के लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध होंगे। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग जल्द कॉलेजों की अंतिम सूची जारी करता है या फिर प्रवेश प्रक्रिया की तारीख बढ़ानी पड़ती है।

