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MP Collector Guideline 2026-27: इस बार 17 फीसदी तक महंगी होगी रजिस्ट्री, 600 नई लोकेशन भी जुड़ेंगी

MP Collector Guideline 2026-27: इस बार 17 फीसदी तक महंगी होगी रजिस्ट्री, 600 नई लोकेशन भी जुड़ेंगी

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • नई कलेक्टर गाइडलाइन रेट 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
  • प्रदेश की लगभग 60 फीसदी लोकेशन पर दाम बढ़ाए जाएंगे।
  • जमीन की कीमतों में औसत 15 से 17 फीसदी बढ़ोतरी होगी।
  • बाजार भाव और गाइडलाइन का अंतर खत्म करना मुख्य उद्देश्य है।
  • इस बार गाइडलाइन में 600 नई लोकेशन भी जोड़ी जाएंगी।

मध्यप्रदेश में अपना घर बनाने का सपना अब और महंगा होने वाला है। सरकार जमीनों के दाम बढ़ाने की बड़ी तैयारी में है। नए नियम अगले साल यानी अप्रेल 2026 से ही लागू हो जाएंगे।

प्रॉपर्टी के बाजार में अभी से काफी ज्यादा हलचल मची है। कलेक्टर गाइड लाइन की सबसे बड़ी खबर विकसित इलाकों के पास की लोकेशन के रजिस्ट्री रेट एक समान करने से जुड़ी है। यानी अब विकसित इलाकों के पास के अविकसित इलाकों में भी जमीन की रजिस्ट्री महंगी होने जा रही है।

गाइडलाइन दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी?

पंजीयन विभाग हर साल जमीन के गाइडलाइन रेट (Property Rates) को बदलता है। इस बार नए रेट 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाएंगे। विभाग ने प्रदेश की एक लाख दस हजार लोकेशन का गहन सर्वे किया है।

इनमें से करीब 65 हजार लोकेशन पर दाम बढ़ने वाले हैं। यह कुल चिन्हित जगहों का लगभग 60 फीसदी हिस्सा है। बाकी 40 फीसदी इलाकों में दाम पुराने ही रखे जाएंगे। वहां फिलहाल किसी भी तरह का बदलाव करना प्रस्तावित नहीं है।

जमीन के दामों में औसत 15 से 17 फीसदी बढ़ोतरी होगी। कुछ खास विकसित जगहों पर दाम इससे ज्यादा भी बढ़ेंगे। जिन इलाकों में नई सुविधाएं आई हैं, वहां ज्यादा असर दिखेगा।

कलेक्टर गाइडलाइन में क्या खास

प्रदेश में करीब 25 हजार लोकेशन ऐसी हैं, जहां रजिस्ट्री महंगी है। इन जगहों पर सरकारी गाइडलाइन रेट अभी काफी कम हैं। सरकार इन दरों को अब बाजार भाव के बराबर ले आएगी। इससे प्रॉपर्टी के कारोबार में और अधिक पारदर्शिता आएगी।

महंगी लोकेशन के बराबर होगी पास की सस्ती लोकेशन

इसके अलावा करीब सात हजार लोकेशन ऐसी हैं, जहां सालों से रेट नहीं बढ़े। इन जगहों पर पिछले 7-8 सालों से दाम स्थिर रखे थे। अब इन इलाकों में भी अच्छी बढ़ोतरी की जानी प्रस्तावित है। इससे आसपास के सभी क्षेत्रों में कीमतों में समानता आएगी।

कीमतों के बहुत बड़े अंतर को खत्म करना बहुत जरूरी है। इसीलिए पंजीयन विभाग ने इन खास लोकेशन पर ध्यान दिया है। जल्द ही नए रेट कार्ड सभी जिलों में उपलब्ध होंगे। इससे अवैध रूप से होने वाले सौदों पर लगाम लगेगी। लोग अब सही कीमत पर अपनी जमीन बेच पाएंगे।

विकास योजनाओं और नए हाईवे का प्रॉपर्टी रेट्स पर पड़ेगा असर?

प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों के कारण जमीन की मांग बढ़ी है। नई सड़कों के बनने से आसपास की जमीन काफी महंगी (Land Rates) हुई है। विकास प्राधिकरण की नई योजनाओं का भी इस पर बड़ा असर पड़ा है।

औद्योगिक क्षेत्रों के पास भी जमीन के दाम तेजी से बढ़े हैं। नदी सिंचाई योजनाओं ने खेती की जमीनों को महंगा किया है। लगभग चार हजार लोकेशन ऐसी हैं, जहां बड़े विकास कार्य हुए हैं।

इधर नेशनल हाईवे के पास की 300 लोकेशन पर रेट बढ़ेंगे। इन जगहों पर कनेक्टिविटी सुधरने से निवेश काफी बढ़ गया है। TNC के नए नक्शों ने भी कीमतों को काफी प्रभावित किया।

सरकार इस साल 600 बिल्कुल नई लोकेशन भी जोड़ रही है। इन नई जगहों पर पहली बार सरकारी रेट तय होंगे। बुनियादी ढांचे में सुधार होने से जमीन की वैल्यू बढ़ी है।

इन सभी कारकों को नई गाइडलाइन में शामिल किया गया है। इससे उन इलाकों में भी विकास को गति मिल सकेगी। निवेशक अब नए उभरते क्षेत्रों की तरफ रुख कर रहे हैं। भविष्य में इन जगहों पर दाम और बढ़ने की उम्मीद है।

सरकारी खजाने पर क्या होगा असर और क्या हैं अब तक के आंकड़े?

नई गाइडलाइन लागू (Madhya Pradesh Collector Guideline) होने से सरकारी राजस्व में उछाल आएगा। कुल राजस्व में 10 से 12 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विभाग को बड़ा लक्ष्य मिला था।

कुल आय का लक्ष्य 13 हजार 420 करोड़ रुपए तय किया गया था। अभी तक विभाग ने 11 हजार 300 करोड़ का राजस्व पाया है। यह कुल तय लक्ष्य का लगभग 81 फीसदी हिस्सा है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अभी 15 दिन बाकी हैं। पंजीयन विभाग को उम्मीद है कि पूरा लक्ष्य हासिल होगा।

नई दरों के आने से अगले साल कमाई और बढ़ेगी। जमीन के सौदे बढ़ने से सीधा फायदा सरकार को मिलता है। यह बढ़ा हुआ पैसा राज्य के विकास कार्यों में लगेगा।

विभाग के पास अब तक के सभी सटीक आंकड़े मौजूद हैं। राजस्व बढ़ने से नई सड़कों और स्कूलों का निर्माण होगा। इससे आम जनता को ही अंत में सीधा लाभ मिलेगा। पंजीयन विभाग अपनी कार्यप्रणाली को और आधुनिक बना रहा है।


FAQ
Q. एमपी में नई कलेक्टर गाइडलाइन रेट्स कब से लागू हो रहे हैं? A. नई कलेक्टर गाइडलाइन के रेट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इसके लिए अपना सर्वे पूरा कर लिया है। विभाग हर साल बाजार में बढ़ती कीमतों की गहन समीक्षा करता है। इसी समीक्षा के आधार पर नई दरें तय की जाती हैं। Q. क्या एमपी के सभी इलाकों में जमीन महंगी होगी? A. नहीं, सभी इलाकों में जमीन के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। केवल 60 फीसदी यानी करीब 65 हजार लोकेशन पर बढ़ोतरी प्रस्तावित है। बाकी 40 फीसदी इलाकों में पुराने रेट ही लागू रह सकते हैं। Q. एमपी में कलेक्टर गाइडलाइन रेट बढ़ने से रजिस्ट्री पर क्या असर पड़ता है? A. एमपी में गाइडलाइन रेट बढ़ने से रजिस्ट्री की कुल लागत बढ़ जाती है। स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क हमेशा गाइडलाइन मूल्य पर लगता है। अगर गाइडलाइन रेट बढ़ता है तो आपको ज्यादा टैक्स देना होगा। इससे जमीन की खरीदारी आम आदमी के लिए महंगी हो जाती है। इसीलिए समझदारी इसी में है कि आप समय रहते रजिस्ट्री करा लें। 1 अप्रैल के बाद आपको अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।

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