Education news.मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब बदलने वाली है। छात्र अब साल में दो बार कॉलेज में एडमिशन ले सकेंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग ने यह बड़ा फैसला लिया है।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) इसके लिए नई गाइडलाइन बना रहा है।
इसका मुख्य लक्ष्य कॉलेजों की सभी सीटें भरना है। इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया को समय पर पूरा करना भी जरूरी है।
नई शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत पहला शैक्षणिक सत्र हर साल जुलाई से शुरू होगा। दूसरा सत्र अगले साल जनवरी से शुरू किया जाएगा। जुलाई में 100 प्रतिशत सीटों के लिए काउंसलिंग होगी। इसके बाद जो सीटें खाली रहेंगी, उन्हें जनवरी में भरा जाएगा। इससे एडमिशन प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर तक नहीं खिंचेगी।
अभी खाली सीटों के कारण कॉलेज कोर्ट चले जाते हैं। नई व्यवस्था से यह कानूनी उलझन खत्म हो जाएगी। अभी सीटें खाली रहने पर कई संस्थान कोर्ट तक पहुंच जाते हैं, जिससे काउंसलिंग लंबी चलती है।
इस पर एक्सपर्ट का क्या कहना है?
एक्सपर्ट्स का कहना है, नई व्यवस्था में पढ़ाई के क्रम और प्लेसमेंट को लेकर चुनौतियां रहेंगी। जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र जनवरी-फरवरी में पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक रिजल्ट आने वाले छात्रों को ही ज्वाइनिंग देती हैं। ऐसे में इन छात्रों के लिए अलग से प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है। इस प्रकार यह क्रम चुनौतीपूर्ण होगा।
शुरुआती सेमेस्टर में बेसिक विषय पढ़ाए जाते हैं। सीधे एडवांस विषय पढ़ना छात्रों के लिए कठिन होगा। इससे छात्रों की विषयों पर समझ कमजोर हो सकती है। लेटरल एंट्री वाले छात्रों पर भी इसका असर पड़ेगा। उनके लिए भविष्य में सीटें कम हो सकती हैं।
पढ़ाई का तरीका होगा बिल्कुल अलग
नई व्यवस्था के तहत यह तय किया जा रहा है कि जनवरी में एडमिशन लेने वाले छात्रों को सीधे सेकंड सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जाएगी। इसके बाद, वे जुलाई सत्र में आने वाले छात्रों के साथ पहला सेमेस्टर करेंगे। फिर, वे चौथे और तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे, और उसके बाद छठे और पांचवे सेमेस्टर। आखिर में वे आठवें और सातवें सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इस तरीके से, विश्वविद्यालय पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और छात्रों की पढ़ाई भी सही तरीके से पूरी हो जाएगी।
आरजीपीवी कुलगुरु का क्या कहना है
प्रो. एससी चौबे कहते हैं अब तक सितंबर- अक्टूबर तक एडमिशन चलते रहते थे, लेकिन अब विश्वविद्यालय का एकेडमिक कैलेंडर सही तरीके से प्लान के मुताबिक लागू हो सकेगा। इसमें दो ग्रुप चलाने होंगे, लेकिन इससे कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। कंपनियां अब प्लेसमेंट के लिए अलग-अलग समय पर शेड्यूल अपडेट करेंगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
ISRO ने स्पेस मिशन में किया बड़ा बदलाव! अब आम भारतीय भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की यात्री

