Dailyhunt
MP में कांग्रेस की एक मात्र राज्यसभा सीट पर संकट, बीजेपी ने 'ब्रह्मास्त्र' चलाया तो पलट जाएगा पूरा खेल

MP में कांग्रेस की एक मात्र राज्यसभा सीट पर संकट, बीजेपी ने 'ब्रह्मास्त्र' चलाया तो पलट जाएगा पूरा खेल

ध्यप्रदेश की सियासत में इस वक्त बड़ा खेल चल रहा है। मामला है राज्यसभा चुनाव का और इस बार लड़ाई सिर्फ सीट की नहीं, बल्कि इज्जत बचाने की भी है। अब सवाल है कि क्या कांग्रेस अपनी एक राज्यसभा सीट बचा पाएगी या बीजेपी पूरा खेल पलट देगी?

हालात ऐसे बन गए हैं कि कांग्रेस की एकमात्र सीट भी खतरे में नजर आ रही है। यदि बीजेपी ने सही समय पर सही चाल चल दी तो विपक्ष को करारा झटका लगेगा।

दरअसल, 19 जून को प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें पहले से बीजेपी के पास हैं और एक कांग्रेस के खाते में है, जिस पर अभी दिग्विजय सिंह सांसद हैं। इस बार उन्होंने साफ कर दिया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।

अब समझिए पूरा गणित

मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 विधायक हैं। तीन सीटों के हिसाब से एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 58 वोट चाहिए। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए उसकी दो सीटें पक्की मानी जा रही हैं। कांग्रेस के पास कागज पर तो 65 विधायक हैं, लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है।

बीना की विधायक निर्मला सप्रे को लेकर स्थिति साफ नहीं है। वे किस तरफ वोट देंगी, ये अभी सवाल है। वहीं, श्योपुर की विजयपुर सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा वोट नहीं डाल पाएंगे, क्योंकि अदालत ने उनकी वोटिंग पर रोक लगा दी है।

अब दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सजा होने से कांग्रेस को एक और झटका लगा है। यानी सीधे-सीधे कांग्रेस के तीन वोट कम हो गए हैं। अब उसके पास करीब 62 वोट बचते हैं। जीत के लिए 58 वोट चाहिए, मतलब मामूली सा मार्जिन बचा है। यही वजह है कि कांग्रेस में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।

बड़ा खतरा क्रॉस वोटिंग का

यदि बीजेपी अपने ब्राह्मास्त्र के तौर पर कुछ कांग्रेस विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा देती है तो खेल पूरी तरह बदल सकता है। सिर्फ 4-5 विधायक भी इधर-उधर हो गए, तो कांग्रेस की सीट हाथ से निकल सकती है।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अपने विधायकों को बाड़ाबंदी में रखने की तैयारी कर रही है, ताकि कोई सियासी टूट-फूट या प्रलोभन का असर न पड़े। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कह चुके हैं कि इस चुनाव में हर एक वोट की कीमत है।

इधर बीजेपी भी पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास करीब 49 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे सिर्फ 8-9 अतिरिक्त वोट चाहिए। यदि ये वोट क्रॉस वोटिंग से मिल जाते हैं तो कांग्रेस की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो सकती है।

अंदरखाने की खबर ये भी है कि कांग्रेस के कुछ विधायक नाराज चल रहे हैं। इनमें से कोई भी वोटिंग के वक्त लाइन से हटता है तो कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

पहले भी हुए हैं उलटफेर

इतिहास बताता है कि ऐसे चुनावों में आखिरी समय पर बड़ा उलटफेर हो सकता है। वर्ष 2016 में बीजेपी ने निर्दलीय को समर्थन देकर खेल बिगाड़ने की कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस के विवेक तन्खा ने दूसरे दलों का समर्थन जुटाकर सीट बचा ली थी।

2020 में भी एक बीजेपी विधायक की क्रॉस वोटिंग की चर्चा हुई थी, जिसने नतीजों को चौंका दिया था। उस चुनाव में दिग्विजय सिंह को 57 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के सुमेर सिंह सोलंकी को 55 और ज्योतिरादित्य सिंधिया को 56 वोट मिले थे।

अब एक बार फिर वही माहौल बनता दिख रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कांग्रेस का मार्जिन कम है और बीजेपी मजबूत स्थिति में है। सीधी तौर पर कहें तो इस चुनाव में 5-6 विधायकों का रुख तय करेगा कि जीत किसकी होगी।

ये खबरें भी पढ़ें...

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: d sutr