मध्य प्रदेश में अब फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरी हासिल करने वालों की खैर नहीं। द सूत्र की लगातार खबरों के बाद आयुक्त दिव्यांगजन, मप्र शासन ने सभी विभाग प्रमुखों को इस मामले में आदेश जारी किए हैं।
अब किसी भी भर्ती से पहले दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की अच्छे से जांच की जाएगी, ताकि फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी लेने वालों पर रोक लगाई जा सके।
यह दिया गया है आदेश
आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने यह आदेश सभी विभाग प्रमुखों को भेजा है। आदेश में बताया गया है कि आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ लोग फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी भर्तियों में दिव्यांग कोटे का गलत फायदा उठा रहे हैं। ऐसे मामलों को गंभीर और दंडनीय अपराध माना गया है।
दो साल की सजा का प्रावधान
आयुक्त ने अपने पत्र में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 का भी जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि एक्ट की धारा 91 के तहत फर्जी तरीके से दिव्यांग प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल कर नौकरी या कोई लाभ लेने पर दो साल तक की सजा हो सकती है। इसलिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे प्रमाण-पत्रों (दिव्यांग सर्टिफिकेट जांच नियम) की बारीकी से जांच करें और संदिग्ध मामलों को प्राथमिकता के साथ देखा जाए, खासकर जहां दिव्यांग आरक्षण के जरिए नौकरी हासिल की गई है।
नई भर्ती के पहले भी करो सूक्ष्म जांच
आयुक्त डॉ. खेमरिया ने द सूत्र से बातचीत में बताया कि नई भर्तियों में शामिल होने से पहले दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
उन्होंने बताया कि पहले हो चुकी भर्तियों (MP News) में भी अगर फर्जी प्रमाण-पत्र को लेकर कोई शिकायत मिलती है तो उनकी जांच की जाएगी। फर्जी तरीके से दिव्यांग प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल करने पर एक्ट के तहत दो साल तक की सजा का प्रावधान है। यह कदम वास्तविक दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
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