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MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं

MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं

द सूत्र 4 months ago

समझें पूरा मामला...

  • नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

  • राज्य की 92% महिलाओं के बैंक खाते खुल चुके हैं।

  • इसके विपरीत केवल 48% महिलाओं के पास ही अपना खुद का मोबाइल फोन है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा नकद कमाई कर रही हैं।

  • प्रदेश में पुरुषों के बीच कुपोषण और तंबाकू की लत तेजी से बढ़ी है।

मध्यप्रदेश में महिलाओं की आर्थिक पहचान हुई मजबूत

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े सामने आए हैं। ये आंकड़े मध्यप्रदेश में हो रहे बदलावों की एक अनोखी कहानी बयां करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक पहचान पहले से मजबूत हुई है।

राज्य की 92.1% महिलाओं के पास अब अपना खुद का बैंक खाता है। यह शानदार आंकड़ा देश के राष्ट्रीय औसत 89% से भी काफी ज्यादा है। इसके साथ ही घर के बड़े फैसलों में महिलाओं की भागीदारी 90.4% तक पहुंच गई है।

अकाउंट खुल गए पर डिजिटल नियंत्रण किसके हाथ?

इस विकास के बीच डिजिटल पहुंच की तस्वीर थोड़ी चिंताजनक दिखाई देती है। प्रदेश की सिर्फ 48.5% महिलाओं के पास ही अपना निजी मोबाइल फोन है। जबकि पूरे देश का राष्ट्रीय औसत 63.6% देखा गया है।

आज के डिजिटल दौर में जब हर काम मोबाइल और ओटीपी से होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि महिलाएं अपने खातों का संचालन कैसे करती होंगी? जाहिर है कि वे इसके लिए परिवार के पुरुषों पर निर्भर हैं।

इंटरनेट के लिए दूसरों पर निर्भर हैं महिलाएं

सर्वे में एक और दिलचस्प और हैरान करने वाली बात सामने आई है। प्रदेश की करीब 62% महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करने का दावा करती हैं। लेकिन उनमें से बहुत सी महिलाओं के पास अपना खुद का फोन नहीं है।

इसका सीधा मतलब है कि वे इंटरनेट चलाने के लिए दूसरों का फोन लेती हैं। वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल पर पूरी तरह निर्भर हैं। डिजिटल साक्षरता के इस अंतर को सुधारना एक बड़ी चुनौती है।

गांव की महिलाएं कमाती हैं ज्यादा नकद पैसा

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा सक्रिय नजर आ रही हैं। काम के बदले नकद पैसा पाने वाली महिलाओं का प्रतिशत गांवों में 34% है। इसके मुकाबले शहरों में यह आंकड़ा केवल 28.5% ही है।

इससे साफ है कि ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक योगदान शहरों से कम नहीं है। लेकिन जब सुविधाओं और जरूरी संसाधनों की बात आती है तो कहानी बदल जाती है। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं आधुनिक सुविधाओं के मामले में काफी पीछे छूट गई हैं।

ग्रामीण और शहरी महिलाओं में बड़ा अंतर

ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 40.6% महिलाओं के पास ही अपना मोबाइल फोन मौजूद है। इसके विपरीत शहरी इलाकों में 69.2% महिलाओं के पास खुद का स्मार्टफोन है। इसके अलावा स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में भी काफी अंतर है।

पीरियड्स के दौरान सुरक्षित स्वच्छता साधनों का उपयोग गांवों में सिर्फ 58.5% महिलाएं करती हैं। जबकि शहरों में यह सुखद आंकड़ा 87.7% तक पहुंच चुका है। संपत्ति के अधिकार में भी ग्रामीण इलाके पीछे चल रहे हैं।

शिक्षा-संपत्ति के अधिकार में अभी काम बाकी

गांवों में केवल 15.9% परिवारों में महिलाओं के नाम पर जमीन या मकान है। जबकि शहरों में यह मालिकाना हक 21% परिवारों के पास देखा गया है। शिक्षा के स्तर में भी यह बड़ा भेदभाव साफ नजर आता है।

सिर्फ 26% ग्रामीण महिलाएं ही 10 साल या उससे ज्यादा स्कूल जा सकी हैं। शहरों में यह पढ़ाई का आंकड़ा पूरे 54% तक पहुंच गया है। गांवों में आज भी 35% महिलाएं कभी स्कूल नहीं जा पाई हैं।

मध्यप्रदेश के पुरुषों में तेजी से बढ़ा है कुपोषण

इस सर्वे का सबसे चौंकाने वाला पहलू पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। मध्यप्रदेश में अपनी लंबाई के मुकाबले कम वजन वाले पुरुषों की संख्या 28.3% हो गई है। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा केवल 20.8% ही दर्ज था।

यानी पिछले कुछ सालों में इसमें 7.5% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और खराब हैं, जहां 30.7% पुरुष अंडरवेट हैं। बच्चों के बाद अब राज्य के पुरुष कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

तंबाकू की गिरफ्त में राज्य के पुरुष

एक तरफ जहां पुरुष कम वजन की समस्या से पूरी तरह जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ वे जीवनशैली से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार भी हो रहे हैं। प्रदेश में हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज वाले पुरुष 18.3% हैं।

पुरुषों में मोटापे की दर भी 15.6% से बढ़कर अब 17.6% हो गई है। इसके अलावा राज्य के 47.7% पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। गांवों में तो हर दूसरा पुरुष तंबाकू की गिरफ्त में आ चुका है।


FAQ
Q. मध्यप्रदेश में कितने प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक खाते हैं? A. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में लगभग 92.1% महिलाओं के पास अपना खुद का बैंक खाता है। यह राष्ट्रीय औसत 89% से ज्यादा है और महिलाओं की आर्थिक पहचान मजबूत होने का संकेत देता है। Q. प्रदेश में कितनी महिलाएं अपना निजी मोबाइल फोन इस्तेमाल करती हैं? A. रिपोर्ट बताती है कि केवल 48.5% महिलाओं के पास अपना निजी मोबाइल फोन है। डिजिटल सुविधाओं में यह अंतर बताता है कि अधिकांश महिलाएं अपने खातों और इंटरनेट इस्तेमाल के लिए परिवार के पुरुषों पर निर्भर हैं। Q. ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक योगदान शहरों की महिलाओं से कैसा है? A. ग्रामीण महिलाओं का नकद कमाई में योगदान शहरों की महिलाओं के बराबर या कुछ मामलों में अधिक है। गांवों में 34% महिलाएं काम के बदले नकद पैसे कमाती हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 28.5% है।

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