News In Short
- 25 आईपीएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट तैयार।
- 19-20 जिलों में एसपी बदलने के संकेत।
- 8 जिलों में परफॉर्मेंस पर सवाल।
- 6 जिलों में संगठन की शिकायतें।
News In Detail
मध्यप्रदेश में इस बार तबादले सिर्फ रूटीन नहीं दिख रहे।
सरकार ने पुलिस महकमे में ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ जैसा मॉडल अपनाया है। संकेत साफ हैं रिपोर्ट कमजोर तो कुर्सी खतरे में। 25 आईपीएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट तैयार बताई जा रही है और 19-20 जिलों में एसपी बदलने की जमीन बन चुकी है।
रूटीन ट्रांसफर नहीं, ‘रिपोर्ट कार्ड’ की कार्रवाई
इस बार फोकस सिर्फ पोस्टिंग नहीं, बल्कि कामकाज का हिसाब है। सूत्र बताते हैं कि जिलों से आई फीडबैक, संगठन की शिकायतें और परफॉर्मेंस इन तीनों को मिलाकर फैसला हो रहा है। यानी फाइल में ‘इमेज’ नहीं, ‘आउटपुट’ भारी पड़ रहा है।
किस आधार पर बन रही लिस्ट?
तैयार हो रही सूची तीन साफ श्रेणियों पर टिकी है-
- कमजोर प्रदर्शन: 8 जिलों के एसपी पर असंतोष।
- संगठन की आपत्ति: 6 जिलों में गंभीर शिकायतें।
- प्रमोशन फैक्टर: 5 जिलों में नए एसपी तय।
यानी कई जिलों में बदलाव मजबूरी नहीं, रणनीति बन चुका है।
इन जिलों में बदलाव लगभग तय
कुछ जिलों में फैसला लगभग फाइनल माना जा रहा है- बुरहानपुर, निवाड़ी, शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर और नीमच। यहां एसपी बदलने की संभावना सबसे ज्यादा बताई जा रही है।
जहां ‘तलाश’ जारी, वहां भी हलचल तेज
दमोह, उज्जैन, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर और जबलपुर, इन जिलों में भी बदलाव के संकेत हैं। हालांकि, नाम अभी फाइनल नहीं हैं, लेकिन अंदरखाने मंथन जारी है। यह बताता है कि लिस्ट आखिरी दौर में है।
प्रमोशन से भी खुले कई दरवाजे
कई आईपीएस अफसर प्रमोट हुए हैं, जिससे नई पोस्टिंग का रास्ता बना है। इनमें राहुल लोढ़ा, मनोज राय, असित यादव, मयंक अवस्थी, सिमाला प्रसाद, शैलेंद्र सिंह चौहान, विवेक सिंह, कुमार प्रतीक और डॉ. शिवदयाल जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। यानी बदलाव सिर्फ हटाने का नहीं, नई तैनाती का भी खेल है।
यंग बैच को मिलेगा बड़ा मौका
2020 बैच के 5 आईपीएस अफसरों को पहली बार जिलों की कमान मिल सकती है। इससे पहले 2019 बैच को यह मौका मिल चुका है। अब नई पीढ़ी को मैदान में उतारने की तैयारी है जो सरकार के ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ अप्रोच को दिखाता है।
क्यों अहम है यह फेरबदल?
एमपी पुलिस में इतने बड़े स्तर पर एसपी बदलना सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं होता। यह कानून-व्यवस्था, राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक नियंत्रण, तीनों पर असर डालता है। खासकर तब, जब फैसले शिकायत और फीडबैक के आधार पर हों।
5 जिलों में प्रमोशन के कारण बदलाव 2020 बैच को मिल सकता है बड़ा मौका
इस बार का फेरबदल साफ संदेश दे रहा है पद स्थायी नहीं, परफॉर्मेंस है। अगर लिस्ट इसी आधार पर जारी होती है, तो यह महज तबादला नहीं, बल्कि पुलिसिंग के तरीके में बदलाव का संकेत होगा।
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