News In Short
- MPCA ने पूर्व महिला क्रिकेटरों के लिए पेंशन योजना मंजूर की।
- अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हर महीने 12 हजार 500 रुपए पेंशन मिलेगी।
- घरेलू क्रिकेटरों को मैचों की संख्या के आधार पर 6000 से 10 हजार रुपए मिलेंगे।
- 2006 से पहले के मैच खेल चुकी खिलाड़ी भी इस योजना में शामिल होंगी।
- 75 साल की उम्र के बाद 7500 रुपए अतिरिक्त देने का प्रावधान है।
News In Detail
मध्यप्रदेश की पूर्व महिला क्रिकेटरों को बड़ी राहत
मध्यप्रदेश में क्रिकेट खेल चुकी पूर्व महिला खिलाड़ियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (Madhya Pradesh Cricket Association) ने उनके लिए एक खास पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। यह योजना उन महिला खिलाड़ियों के लिए है जिन्होंने अपने करियर में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। साथ ही, संन्यास के बाद आर्थिक सुरक्षा की कमी से जूझती रहीं।
खास बात यह है कि इस योजना में 2006 से पहले के मैच खेल चुकी खिलाड़ियों को भी शामिल किया जाएगा। दरअसल बीसीसीआई (BCCI - Board of Control for Cricket in India) ने 2006 में महिला क्रिकेट को अपने दायरे में लिया था। उससे पहले खेलने वाली खिलाड़ी अक्सर किसी भी आर्थिक लाभ से वंचित रह जाती थीं। यह योजना उन्हें भी राहत देगी।
कितनी मिलेगी पेंशन और किसे?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी पूर्व महिला क्रिकेटरों को हर महीने 12 हजार 500 रुपए पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। घरेलू क्रिकेट खेलने वाली खिलाड़ियों के लिए पेंशन राशि 6000 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक होगी। यह राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि खिलाड़ी ने अपने करियर में कितने मैच खेले हैं।
इसके अलावा एक और खास प्रावधान भी इस योजना में जोड़ा गया है। जब कोई खिलाड़ी 75 साल की उम्र पार कर लेगी, तो उसे नियमित पेंशन के ऊपर 7500 रुपए अतिरिक्त हर महीने दिए जाएंगे। यानी बढ़ती उम्र के साथ आर्थिक मदद भी बढ़ेगी।
चंद्रकांत पंडित बने MPCA के नए निदेशक
नई पेंशन योजना के अलावा एसोसिएशन ने एक और बड़ा फैसला लिया है। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के नए निदेशक के रूप में चंद्रकांत पंडित के नाम का ऐलान किया गया है। चंद्रकांत पंडित भारतीय क्रिकेट में एक जाना-माना नाम हैं। उनके अनुभव से MPCA को फायदा मिलने की उम्मीद है।
अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया ने इसी मौके पर एसोसिएशन के अंपायरों और स्कोररों के मानदेय में भी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। क्रिकेट के मैदान पर काम करने वाले इन जरूरी लोगों को भी अब ज्यादा पैसा मिलेगा। हालांकि बढ़ी हुई राशि के आंकड़े फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
खिलाड़ियों के भविष्य की चिंता क्यों जरूरी है?
भारत में महिला क्रिकेट का इतिहास पुरुष क्रिकेट के मुकाबले हमेशा उपेक्षित रहा है। न पर्याप्त मैच फीस, न मीडिया कवरेज और न ही संन्यास के बाद आर्थिक सुरक्षा। ऐसे में MPCA की यह पहल एक सकारात्मक कदम है। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो 2006 से पहले बिना किसी बड़े संगठन के समर्थन के खेलती रहीं।
यह योजना मध्यप्रदेश में भविष्य की खिलाड़ियों के लिए भी एक संदेश देती है कि क्रिकेट को करियर बनाने पर बुढ़ापे में अकेले नहीं छोड़ा जाएगा।
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