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MPPSC भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, नया ड्राफ्ट जारी, जानिए क्या-क्या बदलने वाला है

MPPSC भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, नया ड्राफ्ट जारी, जानिए क्या-क्या बदलने वाला है

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश सरकार ने MPPSC भर्ती परीक्षाओं के लिए नया नियम 2026 का मसौदा तैयार किया है।
  • इस मसौदे पर आम नागरिक, संस्था और हितधारक 5 जून 2026 तक सुझाव दे सकते हैं।
  • नए नियमों में परीक्षा के तीन और दो चरणों की स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
  • राज्य सेवा परीक्षा में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार तीन स्तर होंगे।
  • आरक्षण, आयु सीमा और चयन सूची बनाने की प्रक्रिया भी नए सिरे से तय की गई है।

नया मसौदा क्यों आया?

मध्यप्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 21 मई 2026 को एक सार्वजनिक सूचना जारी की। इसमें बताया गया कि राज्य शासन "मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम, 2026" अधिसूचित करने जा रहा है। यह नियम मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों में एमपीपीएससी (Madhya Pradesh Public Service Commission) के जरिए होने वाली भर्तियों पर लागू होगा।

कैसे दे सकते हैं सुझाव?

जो भी नागरिक, संस्था या हितधारक इन नियमों पर अपनी राय देना चाहते हैं, वे 5 जून 2026 तक लिखित सुझाव भेज सकते हैं। सुझाव ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर भेजे जा सकते हैं। इसके अलावा विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के जरिए भी सुझाव दिए जा सकते हैं। तय समय के बाद मिले सुझावों पर कोई विचार नहीं होगा।

परीक्षाएं किन समूहों में होंगी?

नए नियम के तहत एमपीपीएससी पांच तरह की संयुक्त भर्ती परीक्षाएं (MPPSC exam) आयोजित करेगा। पहली राज्य सेवा परीक्षा और राज्य वन सेवा परीक्षा होगी, जो तीन चरणों में होगी। दूसरा समूह अभियांत्रिकी यानी इंजीनियरिंग योग्यता वाला होगा। तीसरा समूह उच्च शिक्षा से जुड़े पदों के लिए होगा। चौथा समूह स्वास्थ्य विभाग के पदों के लिए और पांचवां समूह सामान्य स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर के पदों के लिए होगा।

तीन चरणों वाली परीक्षा कैसे होगी?

राज्य सेवा परीक्षा के लिए तीन क्रमिक चरण होंगे

पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा होगी, जो वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव प्रश्नों पर आधारित होगी। इसके अंक अंतिम चयन में नहीं जोड़े जाएंगे। इसमें विज्ञापित रिक्तियों के अधिकतम 20 गुना उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चुने जाएंगे।

दूसरा चरण मुख्य परीक्षा होगी, जो वर्णनात्मक यानी लिखित पद्धति पर आधारित होगी। मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों में से विज्ञापित पदों के ढाई से तीन गुना उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए बुलाए जाएंगे।

तीसरा और अंतिम चरण साक्षात्कार यानी इंटरव्यू होगा। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर किया जाएगा।

आयु की गणना कैसे होगी?

नए नियम में आयु गणना का तरीका भी स्पष्ट किया गया है। आयु की गणना विज्ञापन वर्ष के अगले वर्ष की 1 जनवरी की स्थिति में होगी। उदाहरण के तौर पर यदि विज्ञापन 2025 में किसी भी तारीख को जारी हो, तो आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के अनुसार होगी। जन्मतिथि के लिए केवल हाईस्कूल यानी 10वीं की अंकसूची मान्य होगी। शपथ पत्र, जन्म पत्री या अन्य कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

आरक्षण और चयन सूची की व्यवस्था

नए नियम में पहले अनारक्षित श्रेणी की सूची तैयार होगी। इसमें एससी (Scheduled Caste), एसटी (Scheduled Tribe), ओबीसी (Other Backward Class) और ईडब्ल्यूएस (Economically Weaker Section) के वे उम्मीदवार भी शामिल होंगे जिन्होंने कोई आरक्षण का लाभ नहीं लिया। इसके बाद अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों की सूचियां बनेंगी। महिलाओं, भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को सभी श्रेणियों में क्षैतिज यानी हॉरिजॉन्टल आरक्षण का लाभ मिलेगा।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण का लाभ केवल मध्यप्रदेश के निवासी उम्मीदवारों को मिलेगा। दूसरे राज्यों के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में ही आवेदन कर सकेंगे।

कदाचार पर सख्त कार्रवाई

नए नियम में परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल या किसी भी अनुचित तरीके के इस्तेमाल पर कड़े प्रावधान किए गए हैं। दोषी पाए जाने पर उम्मीदवार को उस परीक्षा से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा उसे स्थायी रूप से या एक तय अवधि के लिए आयोग की सभी परीक्षाओं से वंचित किया जा सकता है। यदि उम्मीदवार पहले से सरकारी सेवा में है तो उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश भी की जाएगी। आपराधिक मुकदमा दर्ज होने का प्रावधान भी है।

अंकसूची और परिणाम कब मिलेंगे?

सभी परीक्षाओं के चरणों के वर्गवार कटऑफ अंक और अंकसूचियां अंतिम चयन परिणाम घोषित होने के बाद ही आयोग द्वारा प्रकाशित की जाएंगी। चयन प्रक्रिया के बीच में किसी भी तरह के अंक या कटऑफ जारी नहीं किए जाएंगे। किसी भी परीक्षा में पुनर्गणना या उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन नहीं होगा।

राज्य सेवा परीक्षा में कौन-कौन से पद?

अनुसूची-1 के तहत राज्य सेवा परीक्षा में उप जिलाध्यक्ष, पुलिस उपाधीक्षक, जिला जेल अधीक्षक, वाणिज्यिक कर अधिकारी, जिला पंजीयक, रोजगार अधिकारी, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, विकास खंड अधिकारी, नायब तहसीलदार समेत दर्जनों द्वितीय और तृतीय श्रेणी के पद शामिल हैं। वन सेवा परीक्षा में सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्रपाल जैसे पद भी इसी परीक्षा के दायरे में आएंगे।

यह खबर क्यों जरूरी है

मध्यप्रदेश में हर साल लाखों युवा एमपीपीएससी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यह नई अधिसूचना उनकी तैयारी, पात्रता और चयन प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत सरकारी नौकरियों में समान अवसर का अधिकार हर नागरिक को है। नया नियम इसी अधिकार को नई संरचना देने की कोशिश है। जन परामर्श की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कानून बनाने में लोकतांत्रिक भागीदारी हो। ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्गों के लिए आरक्षण प्रावधानों की स्पष्टता से सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा। युवाओं के लिए यह जरूरी है कि वे 5 जून की अंतिम तारीख से पहले अपने सुझाव जरूर दें।

जरूरी FAQ

MPPSC परीक्षा नियम 2026 में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

नए नियम में सबसे अहम बदलाव परीक्षाओं को पांच स्पष्ट समूहों में बांटना है। राज्य सेवा परीक्षा अब तीन चरणों में होगी, जिसमें प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार शामिल हैं। आयु गणना का नया तरीका लागू होगा जिसमें विज्ञापन वर्ष के अगले साल की 1 जनवरी को आधार माना जाएगा। जन्मतिथि के लिए सिर्फ 10वीं की मार्कशीट मान्य होगी। इसके अलावा कदाचार पर पहले से ज्यादा सख्त प्रावधान किए गए हैं।

MPPSC नियम 2026 पर सुझाव कैसे और कब तक दे सकते हैं?

मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझाव दो तरीकों से दिए जा सकते हैं। पहला, ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर लिखित रूप में। दूसरा, विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के जरिए। ध्यान रहे कि तय समयसीमा के बाद मिले सुझावों पर कोई विचार नहीं होगा।

MPPSC परीक्षा में आरक्षण का लाभ किसे और कैसे मिलेगा?

जवाब: नए नियम के तहत एससी, एसटी, ओबीसी (नॉन क्रीमीलेयर) और ईडब्ल्यूएस वर्गों को अलग-अलग आरक्षित सूचियों में चयन का लाभ मिलेगा। महिलाओं, भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा। यह लाभ केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासी उम्मीदवारों को ही मिलेगा। दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को अनारक्षित श्रेणी में रखा जाएगा।

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