समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी घोटाले पर बड़ी कार्रवाई हुई है।
- राजगढ़ में आठ समिति प्रबंधकों को बर्खास्त किया गया है।
- भिंड में नौ समिति प्रबंधकों को निलंबित किया गया है।
- तीन जिलों में अब तक कुल 64 लोगों पर एक्शन हुआ है।
- फर्जी किसानों के नाम पर गेहूं बेचने का यह मामला है।
राजगढ़ में आठ बर्खास्त
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद यह लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई है। राजगढ़ में आठ समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवा खत्म कर दी गई है। इनके खिलाफ FIR (First Information Report) भी दर्ज कराई गई है। प्रशासन ने साफ कहा है कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
भिंड में नौ निलंबित
भिंड में भी नौ समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को निलंबित किया गया है। इनके खिलाफ FIR की तैयारी चल रही है। भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि गलत तरीके से पंजीयन कर गेहूं बेचने वालों के बैंक खाते होल्ड कराने के लिए बैंकों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही बरतने वाले प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सहकारी बैंक को भी लिखा गया है। कलेक्टर ने जल्द ही और बड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
तीन जिलों में 64 पर कार्रवाई
राजगढ़, भिंड और मुरैना में अब तक कुल 64 लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। तीनों जिलों में 18 पटवारी निलंबित किए गए हैं। इसके अलावा 38 समिति प्रबंधक और ऑपरेटर भी निलंबित हुए हैं। वहीं 28 समिति प्रबंधक-ऑपरेटर और चार फर्जी किसानों के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। राजगढ़ में अलग से तीन पटवारी निलंबित किए गए हैं। यहां चार तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए हैं। यह दिखाता है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
24 जून को यह घोटाला सामने आया था। तीन जिलों के 59 किसानों ने दूसरे लोगों की जमीन पर फर्जी पंजीयन कराया। इसके बाद उन्होंने 18 हजार क्विंटल से ज्यादा गेहूं समर्थन मूल्य पर बेच दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह गेहूं उत्तर प्रदेश से करीब दो हजार रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा गया था। फिर इसे मध्य प्रदेश में 2625 रुपए प्रति क्विंटल के MSP (Minimum Support Price) पर बेचा गया। यानी बिना खेती किए भी हर क्विंटल पर करीब 625 रुपए का सीधा मुनाफा कमाया गया। मुरैना में सबसे बड़ा मामला सामने आया था, जहां 32 फर्जी किसानों ने गेहूं बेचा। भिंड में 23 और राजगढ़ में चार फर्जी किसानों के नाम सामने आए थे।
23 बैंक खाते होल्ड
उत्तर प्रदेश से खरीदे गेहूं के एवज में 4.82 करोड़ रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर किए गए। भिंड प्रशासन ने 23 संदिग्ध बैंक खातों को होल्ड कराने के निर्देश दिए हैं। इससे आगे की गड़बड़ी रोकने की कोशिश हो रही है। मुरैना में भी फर्जी किसानों के नाम FIR में जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान भी कुछ फर्जी किसानों को भुगतान होता रहा। इस वजह से जांच एजेंसियां अब सभी दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक्शन
मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने कहा कि गैर-भूस्वामी किसानों के मामले भले ही कम हों। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने भी जांच पूरी होने तक कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। तीनों जिलों के कलेक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं।
किसानों के हित पर जोर
अधिकारियों का कहना है कि असली किसानों के हित की रक्षा जरूरी है। सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से हर स्तर पर सख्ती बढ़ाई जा रही है। जिन पटवारियों और तहसीलदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उन पर भी कार्रवाई हो रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
ये खबरें भी पढ़िए...

