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निर्मला सप्रे, राजेंद्र भारती और मुकेश मल्होत्रा के मामलों में उलझी तस्वीर, भाजपा-कांग्रेस दोनों पर सवाल, फैसला अब भी अधूरा

निर्मला सप्रे, राजेंद्र भारती और मुकेश मल्होत्रा के मामलों में उलझी तस्वीर, भाजपा-कांग्रेस दोनों पर सवाल, फैसला अब भी अधूरा

द सूत्र 5 months ago

मध्यप्रदेश में तीन विधायकों की सदस्यता पर सस्पेंस गहरा गया है। बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में हाईकोर्ट ने देरी पर सवाल उठाया और पूछा कि 90 दिन की तय समय सीमा में फैसला क्यों नहीं हुआ।

दतिया के राजेंद्र भारती और विजयपुर के मुकेश मल्होत्रा के मामलों ने सियासी और कानूनी पेच को और उलझा दिया है।

सप्रे केस: राजनीति और कानून आमने-सामने

निर्मला सप्रे का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। कांग्रेस से जीत, भाजपा मंच पर उपस्थिति और फिर कानूनी लड़ाई तीनों ने मिलकर स्थिति को जटिल बना दिया है। अब कोर्ट की सख्ती ने इस केस को फिर केंद्र में ला दिया है।

भारती केस: सजा के बाद भी राहत

दतिया विधायक राजेंद्र भारती को सजा मिल चुकी है, लेकिन स्टे मिलने के कारण उनकी सदस्यता पर अंतिम निर्णय टल गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कानूनी राहत कितने समय तक सियासी ढाल बनी रहेगी।

मल्होत्रा केस: फैसला और रोक साथ-साथ

विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता खत्म करने का फैसला आया, लेकिन अदालत की रोक ने इसे लागू होने से रोक दिया। स्थिति साफ होने के बजाय और उलझ गई है।

भाजपा-कांग्रेस दोनों घेरे में क्यों?

सप्रे का मामला सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को कटघरे में खड़ा करता है। कांग्रेस दलबदल का आरोप लगा रही है, तो भाजपा पर साइलेंट सपोर्ट के आरोप लग रहे हैं। वहीं अन्य मामलों में भी राजनीतिक हितों के हिसाब से रुख बदलने की चर्चा है।

कानूनी देरी या सियासी रणनीति?

तीनों मामलों में एक बात कॉमन है कि फैसला लंबित है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की देरी है या फिर इसके पीछे सियासी गणित भी काम कर रहा है?

3 विधायकों की सदस्यता पर सस्पेंस

दलबदल विवाद में दो कानूनी मामलों में कोर्ट ने देरी पर सवाल उठाए। स्टे और सुनवाई के बीच फैसले अटके रहे।

भाजपा-कांग्रेस दोनों पर राजनीतिक आरोप-

  • 2023: चुनाव और जीत।
  • 2024: दलबदल और विवाद की शुरुआत।
  • 2024-25: शिकायतें और कानूनी प्रक्रिया।
  • 2026: कोर्ट की सख्ती, लेकिन फैसला अब भी बाकी।

सबसे बड़ा सवाल

तीनों विधायकों की कुर्सी पर सस्पेंस कब खत्म होगा? फैसला आने पर इसका सियासी फायदा भाजपा या कांग्रेस को मिलेगा? फिलहाल, जनता के लिए यह सवाल बना है फैसला कब होगा?

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