Raipur। छत्तीसगढ़ सरकार ने कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप के निजी अमले पर एक और बड़ा प्रहार किया है। ओएसडी को लेकर उठे विवादों और चर्चाओं के बीच अब मंत्री के निज सहायक संकर्षण सिंह की संविदा सेवा भी खत्म कर दी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने अचानक आदेश जारी कर संकर्षण सिंह को पदमुक्त कर दिया। आदेश में साफ लिखा गया है कि उनकी सेवाएं 2 मई 2026 से समाप्त मानी जाएंगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले निजी सहायक की सेवा बीच कार्यकाल में ही खत्म करनी पड़ी? क्योंकि आमतौर पर ‘को-टर्मिनस’ नियुक्तियां मंत्री के पद छोड़ने तक चलती हैं। लेकिन यहां मंत्री पद पर कायम हैं और उनका निजी स्टाफ हटाया जा रहा है। यही वजह है कि मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस फैसले ने हलचल मचा दी है।
सरकार ने नियम दिखाए, लेकिन सवाल बरकरार
GAD के आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 का हवाला दिया गया है। आदेश के मुताबिक संकर्षण सिंह की नियुक्ति को-टर्मिनस आधार पर हुई थी और सरकार को ऐसी संविदा सेवाएं समाप्त करने का अधिकार है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर यह सिर्फ सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी, तो आदेश इतनी अचानक और चुपचाप क्यों जारी किया गया? राजनीतिक हलकों में इसे महज रूटीन कार्रवाई मानने को कोई तैयार नहीं है। चर्चा यह भी है कि मंत्री के निजी स्टाफ को लेकर लंबे समय से सरकार स्तर पर नाराजगी चल रही थी।
OSDविवाद के बाद दूसरा बड़ा झटका
केदार कश्यप का निजी अमला पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में रहा है। पहले ओएसडी को लेकर उठे विवाद ने सरकार की किरकिरी कराई, अब निजी सहायक की छुट्टी ने नई बहस छेड़ दी है। मंत्रालय के अफसरों के बीच यह चर्चा तेज है कि सरकार अब मंत्रियों के निजी स्टाफ की गतिविधियों पर सख्त नजर रख रही है। बता दें कि 6 तारीख की रात को ही कमल नारायण कांडे की मंत्री के ओएसडी पद से विदाई हुई है।
सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और मंत्रियों के निजी स्टाफ में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यही कारण है कि इस आदेश को सिर्फ एक संविदा समाप्ति नहीं, बल्कि “सिस्टम क्लीनअप” के तौर पर देखा जा रहा है।
मंत्री बरकरार, फिर क्यों हटाया गया स्टाफ?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। आमतौर पर को-टर्मिनस नियुक्तियां मंत्री के साथ खत्म होती हैं। लेकिन यहां मंत्री अपने पद पर बने हुए हैं और उनका भरोसेमंद स्टाफ हटाया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि फैसला सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक और राजनीतिक कदम है।
अब नजर इस बात पर है कि केदार कश्यप के निजी स्थापना में अगला चेहरा कौन होगा और क्या सरकार आगे भी मंत्रियों के निजी स्टाफ पर इसी तरह सख्ती जारी रखेगी।
यह खबरें भी पढ़े...
अब कानून रोकेगा नकल ! क्या भर्ती परीक्षाओं के बदलने वाले हैं दिन ? Chhattisgarh news
Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, पुलिसवालों के बराबर मिलेगी इन्हें सैलरी ! Chhattisgarh News

