फिल्म धुरंधर: द रिवेंज में दाऊद इब्राहिम को गोली नहीं, जहर से मारा गया। जमील जमाली नाम के किरदार ने डाइमिथाइल मरकरी से दाऊद को सालों पहले जहर दिया था।
मौत के इस सीन में 1989 की फिल्म त्रिदेव का गाना ओए ओए बजाया गया।
1989 में यही वो दौर था, जब D-कंपनी बॉलीवुड को फंडिंग करती थी। डायरेक्टर आदित्य धर ने यह गाना जानबूझकर चुना, यह उनका "असली बदला" है।
धुरंधर: द रिवेंज में दाऊद का अंत
फिल्म धुरंधर: द रिवेंज में दाऊद इब्राहिम की मौत का सीन बाकी सब से अलग है। न गोली चली, न एयरस्ट्राइक हुई। फिल्म खत्म होते- होते जमील जमाली नाम का एक बेहद साधारण सा दिखने वाला किरदार सबका ध्यान चुरा लेता है। राकेश बेदी ने इस किरदार को जिस तरह निभाया है, वह देखते ही बनता है। जमाली ने बरसों पहले पट्टी बंधी उंगली के जरिए दाऊद को डाइमिथाइल मरकरी (Dimethyl Mercury) नामक जहर दे दिया था।
दाऊद पहले से ही मर चुका था। उसे बस इसका पता नहीं था। जब यह राज खुलता है, पर्दे पर एक स्टाइलिश फ्लैशबैक चलता है। और पृष्ठभूमि में गूंजता है ओए ओए... तिरछी टोपी वाले। यह 1989 की फिल्म त्रिदेव का गाना है। दर्शकों ने इस सीन की तारीफ की। इस गाने की भी तारीफ हुई, लेकिन इसी गाने को क्यों बजाया गया? कभी सोचा है आपने, तो हम बताते हैं…
ओए ओए और D-कंपनी का रिश्ता
1989 में जब ओए ओए बज रहा था, तब दाऊद इब्राहिम अपनी ताकत के सबसे ऊंचे मुकाम पर था। उस दौर में बॉलीवुड को बैंकों से कर्ज नहीं मिलता था। यह सरकारी नियम था। फिल्म बनानी हो तो पैसा अंडरवर्ल्ड से लेना होता था। और मुंबई में अंडरवर्ल्ड का मतलब था D-कंपनी यानी दाऊद इब्राहिम का नेटवर्क।
मुंबई के संगठित अपराध के सबसे विश्वसनीय जानकार पत्रकार और लेखक हुसैन जैदी बताते हैं- दाऊद को फिल्मों से पैसे कमाने में उतनी दिलचस्पी नहीं थी। उसे हिंदी सिनेमा से प्यार था। लेकिन सिस्टम यह था कि फिल्मकार उससे पैसा लेते थे और फिल्म रिलीज होने के बाद उसे व्हाइट मनी के रूप में लौटाते थे। यह काले धन को सफेद करने का एक बड़ा जरिया था।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के बेलफर सेंटर ने अपने एक दस्तावेज में लिखा है कि बॉलीवुड और भारतीय संगठित अपराध का रिश्ता उस दौर का सबसे खुला राज था। फिल्मकारों को कभी-कभी यह पैसा चाहे या न चाहे, लेना ही पड़ता था। विकीलीक्स के एक स्टेट डिपार्टमेंट केबल ने भी इस बात की पुष्टि की थी।
तो त्रिदेव और उसका गाना ओए ओए उसी सिस्टम की उपज था। इसे कल्याणजी-आनंदजी ने कंपोज किया, अमित कुमार और सपना मुखर्जी ने गाया। जब यह गाना हिट हुआ, दाऊद मुंबई में बैठकर सुन रहा था। उसके पैसों से बना उद्योग, उसके पैसों से बनाए गए गाने गा रहा था।
आदित्य धर के चुनाव की चार परतें
डायरेक्टर आदित्य धर ने यह गाना यूं ही नहीं चुना। इस चुनाव में कम से कम चार अलग-अलग परतें हैं।
टाइम सिचुएशन
ओए ओए उसी बॉम्बे की आवाज है, जहां दाऊद का राज था। सोने की तस्करी, क्रिकेट में फिक्सिंग, दुबई में स्टार-स्टडेड पार्टियां, यह सब उसी दौर की निशानियां हैं। दाऊद की कथित मौत पर यही धुन बजाकर आदित्य धर ने उसके सुनहरे दौर को उसका अंतिम संगीत बना दिया।
आयरनी…
जिस गाने पर दाऊद इठलाता रहा होगा, वही गाना अब उसकी बर्बादी का सीन स्कोर कर रहा है। जमील जमाली ने एक पट्टी बंधी उंगली से जो काम किया, वो किसी AK-47 से भी नहीं हो सकता था। गाने का घमंड वही है। मायने बिल्कुल उल्टे हो गए हैं।
गाने की असली सिचुएशन
"ऐ तिरछी टोपी वाले, बाबू भोले भाले।" फिल्म 'त्रिदेव' में यह गाना नसीरुद्दीन शाह पर फिल्माया गया था, जो एक पुलिसवाले की भूमिका में थे। वह भेस बदलकर अंडरवर्ल्ड में घुसते हैं। धुरंधर 2 में तिरछी टोपी वाला जमील जमाली है, जो हानिरहित और मासूम दिखता है। यह दाऊद के सबसे करीबी घेरे में घुस गया और किसी को खबर तक न हुई। बोल भी वही, किरदार भी वही जैसा।
ये नए दौर का भारत है…
जिस इंडस्ट्री को दाऊद ने बंधक बनाए रखा, जिसके कलाकार उसकी पार्टियों में जाने को मजबूर थे, जिसके निर्माता उसका पैसा लेने को विवश थे, वही इंडस्ट्री आज एक हजार करोड़ रुपए की फिल्म बनाकर उसकी मौत की कहानी सुना रही है। और उस सीन में वही संगीत बज रहा है, जो कभी उसका अपना था।
सपना मुखर्जी का फुल सर्किल
ओए ओए गाने की मूल गायिका सपना मुखर्जी बताती हैं कि फिल्म की रिलीज से ठीक पहले उन्होंने CISF (Central Industrial Security Force) और NSG (National Security Guard) के जवानों के लिए यह गाना परफॉर्म किया। उन्होंने इसे "फुल सर्किल मोमेंट" बताया।
गायिका सपना मुखर्जी ने आदित्य धर का शुक्रिया अदा किया कि उनकी आवाज को बदला नहीं गया, बल्कि उसकी इज्जत की गई। आज के दौर में यह दुर्लभ है, जब पुराने गानों को नई आवाजों से रिकॉर्ड कर लिया जाता है। लेकिन असली फुल सर्किल तो गाने का है। 1989 में जो धुन दाऊद के बॉम्बे में बनी थी, वही 2026 में उसकी कहानी के अंत का संगीत बन गई। यही है आदित्य धर का असली 'धुरंधर बदला।'
घटनाक्रम - एक गाने का सफर
1989 - फिल्म त्रिदेव रिलीज। निर्माता गुलशन राय। ओए ओए सुपरहिट। इसी दौर में दाऊद मुंबई फिल्म उद्योग का अघोषित बैंकर है।
1993 - मुंबई सीरियल बम धमाके। दाऊद भारत का सबसे वांछित आतंकी बन जाता है। बॉलीवुड से उसका संबंध खुलकर सामने आता है।
2001 - भारत सरकार फिल्म उद्योग को आधिकारिक उद्योग का दर्जा देती है। बैंक कर्ज मिलने लगता है। अंडरवर्ल्ड की जरूरत घटती है।
2011–2020 - हुसैन जैदी की किताबें और डॉक्युमेंट्रीज उस दौर को दस्तावेज करती हैं। सच्चाई धीरे-धीरे मुख्यधारा में आती है।
अप्रैल 2026 - धुरंधर: द रिवेंज रिलीज (dhurandhar movie)। ओए ओए बजता है। 37 साल पुराना गाना नया इतिहास लिखता है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर सिर्फ एक फिल्म की समीक्षा नहीं है। यह उस दौर की याद दिलाती है जब भारतीय सिनेमा जगत पर संगठित अपराध का गहरा असर था। 1980 और 1990 के दशक में बॉलीवुड को अंडरवर्ल्ड के पैसों पर निर्भर रहना पड़ा, क्योंकि कानूनी वित्तपोषण के रास्ते बंद थे।
आदित्य धर की धुरंधर: द रिवेंज इस पूरे इतिहास को सिनेमाई जुबान देती है। ओए ओए गाने का प्रतीकात्मक उपयोग यह दिखाता है कि कला किस तरह अपने शोषण के इतिहास को अपना हथियार बना सकती है।
निष्कर्ष - आगे क्या?
धुरंधर (Dhurandhar 2, Ranveer Singh) और ओए ओए की कहानी यहीं नहीं रुकती। ये फिल्मएक सवाल छोड़ती है - क्या बॉलीवुड ने वाकई अपना वह काला अध्याय बंद कर लिया? क्या 2001 के बाद सब कुछ बदल गया?
जानकार मानते हैं कि पैसे के स्रोत बदले हैं, लेकिन अपारदर्शिता (lack of transparency) अब भी है। फिर भी, ओए ओए का यह नया जन्म एक सांस्कृतिक जीत है। वह उद्योग जिसे कभी डर से अंडरवर्ल्ड का पैसा लेना पड़ता था, आज उसी की कहानी को कला में बदल रहा है। और यही - जैसा आदित्य धर कहते हैं - असली रिवेंज है।
FAQ
Q. धुरंधर फिल्म में ओए ओए गाना क्यों चुना गया? A. डायरेक्टर आदित्य धर ने यह गाना एक बड़े प्रतीकात्मक कारण से चुना। 'ओए ओए' 1989 की फिल्म 'त्रिदेव' का गाना है, जो उस दौर में बना था जब दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी बॉलीवुड को वित्त पोषित करती थी। उस वक्त बैंक फिल्मों को कर्ज नहीं देते थे, इसलिए फिल्मकारों को अंडरवर्ल्ड से पैसा लेना पड़ता था। यह गाना उसी पारिस्थितिकी तंत्र की उपज था। आदित्य धर ने दाऊद की कथित मौत के सीन में यही गाना बजाकर एक संदेश दिया: जो साम्राज्य बनाया था, उसी की आवाज अब उसकी अंतिम विदाई का संगीत बन गई। Q. 1989 के दौर में दाऊद इब्राहिम और बॉलीवुड का क्या संबंध था? A. 1980 और 1990 के दशक में भारत सरकार का नियम था कि बैंक फिल्म उद्योग को कर्ज नहीं दे सकते। इससे फिल्मकारों के पास वित्त का एक ही बड़ा स्रोत बचा था, वह था अंडरवर्ल्ड। मुंबई में उस वक्त दाऊद इब्राहिम का सबसे ज्यादा दबदबा था। वह फिल्मकारों को काला पैसा देता था और फिल्म रिलीज के बाद उसे व्हाइट मनी के रूप में वापस लेता था। इससे काले धन की सफाई होती थी। हार्वर्ड के बेलफर सेंटर और विकीलीक्स के केबल्स ने भी इसकी पुष्टि की है। यह रिश्ता मजबूरी में ज्यादा था, पसंद से कम। Q. फिल्म में दाऊद इब्राहिम को किसने और कैसे मारा? A. धुरंधर: द रिवेंज में जमील जमाली नाम का किरदार, जिसे राकेश बेदी ने निभाया है, असली "दुश्मन" निकलता है। वह एक बेहद साधारण और हानिरहित दिखने वाला इंसान है। उसने बरसों पहले अपनी पट्टी बंधी उंगली के जरिए दाऊद को डाइमिथाइल मरकरी नाम का जहर दे दिया था। जब फिल्म के क्लाइमैक्स में यह राज खुलता है, तब दाऊद पहले से ही मरणासन्न हो चुका होता है। फिल्म में इसे एक स्टाइलिश फ्लैशबैक में दिखाया गया है, जिसके पृष्ठभूमि में 'ओए ओए' बजता है।
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