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फिर सुर्खियों में पीएससी घोटाला, तत्कालीन सचिव ध्रुव के घर CBI की दबिश, महिला अधिकारी के घर पहुंची ED

फिर सुर्खियों में पीएससी घोटाला, तत्कालीन सचिव ध्रुव के घर CBI की दबिश, महिला अधिकारी के घर पहुंची ED

त्तीसगढ़ का चर्चित पीएससी घोटाला फिर गरमा गया है। सीबीआई ने बुधवार को पूर्व सचिव जेके ध्रुव के घर दबिश दी। भिलाई सेक्टर-10 स्थित मकान पर जांच टीम पहुंची। दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।

कार्रवाई ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया। मामले में ईडी की टीम पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर भी पहुंची है। वहां जांच जारी है और अधिकारी सबूतों की तलाश कर रहे हैं।

पुराने मामले में नई हलचल

सीबीआई जांच अभी खत्म नहीं हुई है। एजेंसी लगातार नए सुराग तलाश रही है। कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं। लेकिन मुख्य आरोपी टामन सिंह सोनवानी अब भी जेल में हैं। इसलिए ताजा कार्रवाई को अहम माना जा रहा है।

भर्ती में गड़बड़ी का आरोप

जांच 2020 से 2022 की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी है। सीबीआई का दावा है कि चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला। मेरिट से छेड़छाड़ की गई। नियमों को ताक पर रखा गया। इसी वजह से मामला बड़ा घोटाला बन गया।

सचिव पर गंभीर आरोप

सीबीआई के अनुसार तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने अपने पुत्र सुमित ध्रुव को फायदा पहुंचाया। कुछ अधिकारियों और रसूखदारों के रिश्तेदारों को भी लाभ मिला। जांच एजेंसी इसी कड़ी की पड़ताल कर रही है।

सरकार ने सौंपी थी जांच

भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। अभ्यर्थियों ने विरोध किया था। विपक्ष ने भी मुद्दा उठाया था। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। एजेंसी ने कई गिरफ्तारियां कीं। बाद में पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया गया।

क्या है पूरा घोटाला

पीएससी भर्ती घोटाला प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है। मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं का है। सीबीआई अब तक 400 से 700 पन्नों की फाइनल चार्जशीट पेश कर चुकी है। जांच में कुल 29 लोगों की भूमिका सामने आई है।

जेल में हैं बड़े चेहरे

मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत 12 आरोपी जेल में बंद हैं। कई महीनों से उन्हें राहत नहीं मिली है। अदालतों ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अब मामला ट्रायल की ओर बढ़ रहा है।

सत्ता और सिस्टम का गठजोड़?

सीबीआई का आरोप है कि आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग किया। नेताओं, अफसरों और रसूखदारों के रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाया गया। भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पूरा नेटवर्क सक्रिय था। यही जांच का सबसे संवेदनशील पहलू है।

टॉप लिस्ट पर सबसे बड़ा सवाल

जांच में चयन सूची भी विवादों में रही। आरोप है कि टॉप-20 चयनित अभ्यर्थियों में कई प्रभावशाली परिवारों के सदस्य शामिल थे। इनमें अध्यक्ष के रिश्तेदार भी बताए गए। कई को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पद मिले।

पेपर लीक और कोचिंग कनेक्शन

सीबीआई जांच में पेपर लीक की बात भी सामने आई। महासमुंद के बारनवापारा क्षेत्र के एक रिसॉर्ट का नाम उभरा। आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को पहले से प्रश्नों की जानकारी दी गई। एक कोचिंग संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इस घोटाले ने लाखों युवाओं को झटका दिया। भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। अब सभी की नजर अदालत और सीबीआई जांच पर है। ताजा दबिश ने संकेत दिए हैं कि अभी कई राज सामने आना बाकी हैं।

TIMELINE

  • 2020 - 2022: भर्ती परीक्षाओं का आयोजन। मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी, पेपर लीक और रसूखदारों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने की शुरुआत।

  • 2023: अभ्यर्थियों और विपक्ष का भारी विरोध प्रदर्शन। भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।

  • 2024 (शुरुआत): राज्य सरकार द्वारा मामले की आधिकारिक जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई।

  • 2024 - 2025: सीबीआई द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई। पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक सहित 12 मुख्य आरोपी गिरफ्तार और जेल भेजे गए। 400 से 700 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल।

  • जून 2026 (वर्तमान): सीबीआई की नई कड़ा रुख। तत्कालीन सचिव जीवन किशोर (जेके) ध्रुव के भिलाई स्थित निवास पर दबिश। मामले का ट्रायल शुरू होने की तैयारी।

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