समझें क्या है पूरा मामला...
- राजा रघुवंशी हत्याकांड में मेघालय पुलिस को नई जानकारी मिली है।
- पुलिस को अब राजा का मोबाइल फोन भी मिल गया है।
- इससे पहले सोनम और चार अन्य आरोपियों के फोन बरामद किए जा चुके हैं।
- एसआईटी ने बताया कि संजय वर्मा के नाम की सिम असल में राज इस्तेमाल करता था।
- जांच में सामने आया कि राज और सोनम के बीच 234 बार बात हुई थी।
राजा रघुवंशी हत्याकांड की जांच दिन व दिन नए मोड़ लेजी जा रही है। मेघालय पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को अब पीड़ित राजा का मोबाइल फोन भी मिल गया है। इससे पहले पुलिस सोनम और अन्य चार आरोपियों के फोन पहले ही बरामद कर चुकी थी।
एसआईटी की जांच में एक नया तथ्य सामने आया है। संजय वर्मा के नाम पर ली गई सिम असल में कोई और नहीं, बल्कि खुद राज इस्तेमाल करता था। इसी सिम के जरिए राज लगातार सोनम से संपर्क में रहा था।
सोनम और राज की 234 बार बातचीत
पुलिस सूत्रों के अनुसार सोनम के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ है। सोनम रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए संजय वर्मा से लगातार बात करती थी।
11 मई को राजा से शादी होने से पहले भी संजय सोनम के संपर्क में था। मार्च से अप्रैल 2025 के बीच दोनों के बीच घंटों बात हुई। सिर्फ 21 दिनों में दोनों के बीच 234 बार कॉल हुई।
दिलचस्प बात यह है कि यह मोबाइल नंबर फिलहाल बंद पड़ा है। संजय का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इससे जांच एजेंसी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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अब क्या है SIT का प्लान
मेघालय की पुलिस महानिदेशक इदाशिशा नोंग्रांग ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस बारे में कोई डिटेल साझा नहीं की जा सकती।
एसआईटी हर दिन सामने आ रहे नए सबूतों को आपस में जोड़ने में जुटी है। मकसद है एक मजबूत केस तैयार करना, ताकि अदालत में आरोपियों को सजा दिलाई जा सके।
नोंग्रांग ने बताया कि आरोपियों और पीड़ित के सभी चार फोन अब मिल चुके हैं। राजा के शव के पास एक क्षतिग्रस्त फोन मिला था। दो फोन सोनम के थे और चौथा फोन बाकी आरोपियों में से एक का था।
आरोपियों ने एक फोन को छोड़कर बाकी सभी फोन तोड़ दिए थे। इन टुकड़ों को शिलांग-सोहरा में अलग-अलग जगहों पर फेंका गया था।
गिरफ्तारी और सरेंडर की टाइमलाइन
राजा की हत्या के मामले में 23 मई को वेई सावडोंग पार्किंग से एसआईटी ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें राज कुशवाह, आकाश राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी शामिल थे।
गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद 8 जून को सोनम ने खुद सरेंडर कर दिया था। उसने गाजीपुर जिले के नानगंज पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था।
बयानों में विरोधाभास
नोंग्रांग के मुताबिक सोनम और राज कुशवाह जांचकर्ताओं के सामने अलग-अलग तरह के बयान दे रहे हैं। इनके बयानों में कई जगह विरोधाभास पाया गया है।
वहीं बाकी तीन आरोपियों के बयानों में विरोधाभास काफी कम है। यह अंतर जांच एजेंसी के लिए एक अहम कड़ी बन सकता है।
इंदौर में डिजिटल सबूतों की जांच
विशेष जांच टीम फिलहाल मध्य प्रदेश के इंदौर में मौजूद है। यहां टीम नए डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। मकसद है सभी सबूतों को आपस में जोड़कर पूरी तस्वीर साफ करना।
इस बीच सभी पांच आरोपियों की आठ दिन की पुलिस हिरासत गुरुवार को पूरी हो रही है। उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि एसआईटी अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग करेगी।
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