समझें क्या है पूरा मामला
Raipur : पूरे देश में इन दिनों अयोध्या में हुई चढ़ावा चोरी पर बवाल मचा हुआ है। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की आग छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। रायपुर में बने भव्य राम मंदिर के चंदे पर भी सवाल उठ गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ईमेल भेजा है।
इस ईमेल में राममंदिर की पिछले 10 साल के हिसाब किताब को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। इस आवेदन में मंदिर की कमाई और खर्च पर सवाल उठाते हुए उसकी जांच की मांग की गई है।
यह की गई शिकायत
रायपुर के राममंदिर की जांच का आवेदन आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। उन्होंने कहा है कि मैंने माननीय प्रधानमंत्री से ईमेल के माध्यम से अनुरोध किया है कि रायपुर के वीआईपी रोड स्थित श्री राम मंदिर में पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान प्राप्त चंदे, चढ़ावे और निर्माण कार्यों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। जब मंदिर जनता की आस्था और श्रद्धालुओं के दान से संचालित होते हैं
तो उनके आय-व्यय का पूरा हिसाब भी सार्वजनिक और पारदर्शी होना चाहिए। मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सक्षम प्राधिकारी से निष्पक्ष जांच का अनुरोध करना है, ताकि यदि सब कुछ सही है तो वह भी स्पष्ट हो जाए और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो उस पर विधिसम्मत कार्रवाई की जा सके। मैंने इस संबंध में अपना आवेदन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को ईमेल के माध्यम से प्रेषित कर दिया है।
क्यों उठी जांच की मांग
यह राम मंदिर रायपुर के वीआईपी रोड पर स्थित है। यह बड़ा और भव्य मंदिर माना जाता है। यहां पर राजनेताओं का अक्सर जाना रहता है। कोई बड़ा काम करने से पहले लोग मंदिर में मत्था टेकने और पूजा अर्चना करने आते हैं। राजधानी के राम मंदिर में वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जा रहे दान और उसके उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि रायपुर का राम मंदिर प्रदेश के सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। रामनवमी, श्रीराम जन्मोत्सव, दीपावली, नववर्ष और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन अवसरों पर मंदिर में नकद चढ़ावे के साथ-साथ सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी दान की जाती हैं। ऐसे में सवाल यह उठाया गया है
कि वर्षों से मिले इस चढ़ावे का लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया और इसका उपयोग किन कार्यों में किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि मंदिर में आने वाले दान का नियमित ऑडिट होता है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि जब श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ दान देते हैं, तो उन्हें यह जानने का अधिकार भी होना चाहिए कि उस राशि का उपयोग किन कार्यों में किया गया।
जांच की मांग पर चर्चा शुरु
इस शिकायत का राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। अयोध्या में चढ़ावे को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच रायपुर के राम मंदिर का मामला सामने आने से प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो सकती है। हालांकि शिकायत में किसी व्यक्ति विशेष पर सीधे वित्तीय गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन आर्थिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग ने मंदिर प्रबंधन को सवालों के घेरे में जरूर ला दिया है।
धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित ऑडिट, सार्वजनिक लेखा-जोखा और जवाबदेही की व्यवस्था श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करती है। वहीं मंदिरों का पक्ष यह भी रहता है कि अधिकांश धार्मिक संस्थाएं अपने निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय प्रबंधन करती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर पर सवाल उठे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता ने पीएमओ को ईमेल भेजकर जांच मांगी है।
पिछले 10 वर्षों के चढ़ावे और खर्च का ऑडिट मांगा गया है।
मंदिर में नकद, सोना और चांदी का बड़ा दान मिलता है।
पारदर्शिता और लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
FAQ
Q. रायपुर राम मंदिर को लेकर क्या शिकायत की गई है? A. आरटीआई कार्यकर्ता ने मंदिर के पिछले 10 वर्षों के चढ़ावे और खर्च की जांच की मांग की है। Q. शिकायत किसके पास भेजी गई है? A. यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को ईमेल के जरिए भेजी गई है। Q. जांच की मांग क्यों उठी? A. मंदिर में मिलने वाले दान और उसके उपयोग में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
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