NEWS IN SHORT
- गिरते भूजल स्तर से रायपुर के 120 बोरवेल पूरी तरह सूखे।
- शहर के 20 वार्डों में पहली बार मची पानी की किल्लत।
- टैंकरों द्वारा रोजाना लगाए जा रहे हैं रिकॉर्ड 650 फेरे।
- अमृत मिशन की नई पाइपलाइन बिछाने के बाद बढ़ी समस्या।
- पाइपलाइन इंटर-कनेक्शन से ब्राह्मणपारा वार्ड को मिली बड़ी राहत।
NEWS IN DETAIL
भीषण गर्मी के प्रकोप के साथ ही रायपुर शहर में जल संकट गहरा गया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि शहर के करीब 20 वार्डों में पहली बार पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। लगातार गिरते ग्राउंड वाटर लेवल (भूजल स्तर) के कारण नगर निगम के सभी 120 बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। पहले निगम के पास 93 बोरवेल थे, जिन्हें गर्मी से राहत के लिए बढ़ाकर 120 किया गया था, लेकिन इस बार जलस्तर इतना नीचे चला गया कि ये सभी बोरवेल अनुपयोगी साबित हो गए हैं।
पानी की इस भारी किल्लत को दूर करने के लिए ठेकेदारों के 65 टैंकरों द्वारा रोजाना रिकॉर्ड 650 फेरे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम के करीब 20 अन्य टैंकर भी दिन-रात जलापूर्ति के काम में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में समस्या जस की तस बनी हुई है और भरी दोपहरी में लोग पानी के लिए कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।
नए इलाकों में भी पहली बार पहुंचे टैंकर
बोरवेल सूखने और लो-प्रेशर की समस्या के कारण अब उन इलाकों में भी टैंकरों से सप्लाई करनी पड़ रही है, जहाँ पहले कभी इसकी नौबत नहीं आई थी। खम्हारडीह, जोरा, लाभांडी, चंगोराभाठा, गीतांजली नगर, मोवा, सड्डू और कचना जैसे पारंपरिक रूप से प्रभावित इलाकों के अलावा अब नए क्षेत्रों में भी संकट बढ़ गया है।
पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड : यहाँ अमृत मिशन के तहत नई पाइपलाइन बिछाने और उसे मेन लाइन से जोड़ने के बाद समस्या खड़ी हो गई है। वार्ड पार्षद व नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के अनुसार, पुराने कनेक्शन से गर्मी में भी दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन अब अर्जुन गली, शिवमंदिर गली, यादव पारा और धोबीपारा के 'टेल एंड' (अंतिम छोर) में पानी नहीं पहुँच रहा है, जिससे पहली बार यहाँ रोजाना 2 टैंकरों से सप्लाई करनी पड़ रही है।
भनपुरी (यतियतनलाल व बंजारी माता वार्ड) : भनपुरी इलाके में 32 लाख लीटर और 10 लाख लीटर की दो पानी टंकियां होने के बावजूद आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही है। पार्षद नंदकुमार साहू ने बताया कि टंकियाँ पूरी नहीं भर पाने के कारण लो-प्रेशर की समस्या है। विजय नगर और गोवर्धन नगर जैसे इलाकों में नलों से बमुश्किल एक-दो बाल्टी पानी ही आ रहा है। यतियतनलाल वार्ड में रोजाना 2 टैंकरों से कई फेरे लगवाकर पानी पहुँचाया जा रहा है।
इंटर कनेक्शन से मिली कुछ राहत
जल संकट के बीच राहत की एक खबर ब्राह्मणपारा से है। मार्च और अप्रैल के महीने में यहाँ पानी की भारी किल्लत थी और जोन 4 को लगातार टैंकरों के फेरे लगाने पड़ रहे थे। वार्ड पार्षद अजय साहू ने बताया कि टेल एंड में प्रेशर सुधारने के लिए यहाँ पाइपलाइन के इंटर कनेक्शन का कार्य किया गया, जिससे मई की इस भीषण गर्मी में वार्डवासियों को टैंकरों से मुक्ति मिली है। इसी तरह बंजारी माता वार्ड में भी प्रेशर सुधारने के लिए कई लाइनों को आपस में जोड़ा गया है।
अधिकारी का बयान :
"इस बार नए क्षेत्रों में भी ग्राउंड वाटर लेवल बहुत नीचे चला गया है। भनपुरी की पुरानी टंकी थाने के पास और नई टंकी गोगांव के पास है, वाटर लेवल गिरने से ही दिक्कत आ रही है। हम लगातार व्यवस्था सुधारने और पानी की सुचारू आपूर्ति के लिए काम कर रहे हैं।"— नरसिंग फरेंद्र, ईई (जल), नगर निगम
निष्कर्ष
रायपुर में गहराता जल संकट गिरते भूजल स्तर और तकनीकी खामियों का नतीजा है। पारंपरिक इलाकों के साथ नए क्षेत्रों का टैंकरों पर निर्भर होना चिंताजनक है। हालांकि, पाइपलाइनों के इंटर-कनेक्शन जैसे प्रयोगों से ब्राह्मणपारा में मिली राहत यह बताती है कि उचित तकनीकी प्रबंधन और त्वरित प्रशासनिक सुधारों से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
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