News in Short
- रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की कोर्ट ने 15 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा।
- मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 3.5 एकड़ जमीन की डील से जुड़ा है।
- ईडी ने आरोप लगाया कि 58 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन हुआ था, 43 संपत्तियां कुर्क की गईं।
- वाड्रा ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया, 2019 में उन्हें अग्रिम जमानत मिल चुकी थी।
- 15 अप्रैल को कोर्ट का फैसला वाड्रा के कानूनी भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
News in Detail
भारत के चर्चित कारोबारी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की सुनवाई शनिवार को पूरी हो गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED), हरियाणा सरकार और वाड्रा के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत में पेश कीं। इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला 15 अप्रैल तक सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी निगाहें 15 अप्रैल पर टिकी हैं, इसी दिन यह तय होगा कि आगे क्या होगा।
शिकोहपुर लैंड डील का मामला
यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में हुई एक बड़ी लैंड डील से जुड़ा है। ईडी ने आरोप लगाया है कि साल 2008 में इस डील में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था। आरोप है कि करीब 3.5 एकड़ की जमीन के सौदे में भारी हेरफेर की गई। अब कोर्ट को यह फैसला करना है कि ईडी के पेश किए गए सबूतों और चार्जशीट के आधार पर इस मामले को आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
58 करोड़ के अवैध लेन-देन का है आरोप
ईडी का दावा है कि इस पूरे लैंड डील में 58 करोड़ रुपए से ज्यादा का अवैध लेन-देन हुआ था। इसके साथ ही, आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी’ ने कई ऐसे सौदे किए जो नियमों के खिलाफ थे।
ईडी ने इस मामले में 43 संपत्तियों को भी कुर्क किया है। आरोप यह है कि इन अपराधों से प्राप्त रकम को वाड्रा के विभिन्न कंपनियों के जरिए घुमाया गया ताकि उसे वैध दिखाया जा सके।
वाड्रा का बचाव
रॉबर्ट वाड्रा ने हमेशा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। हालांकि, 2019 में वाड्रा को इस मामले में अग्रिम जमानत मिल गई थी। अब कोर्ट के फैसले का इंतजार है, जो उनके कानूनी भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
15 अप्रैल को फैसला
कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और अब 15 अप्रैल को अपना फैसला सुनाने की तारीख तय की है। इस फैसले से यह तय होगा कि रॉबर्ट वाड्रा को इस मामले में राहत मिलती है या नहीं।
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