समझें क्या है पूरा मामला
- वीडियो में ट्रेन रास्ते में रुकी दिख रही है।
- समोसे खरीदने का दावा सोशल मीडिया पर हुआ।
- स्थानीय लोगों ने ट्रेन रुकने का आरोप लगाया।
- रेलवे ने वीडियो की जांच शुरू कर दी।
- जांच के बाद कार्रवाई का फैसला होगा।
वीडियो से उठा नया विवाद
इंदौर और महू के बीच चलने वाली डेमू ट्रेन इन दिनों चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि लोको पायलट ने रास्ते में समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोक दी। इस दावे के बाद मामला रेलवे तक पहुंच गया है। रेलवे प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। अब पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। हालांकि, अभी तक रेलवे ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर जांच शुरू की गई है। इसलिए जांच पूरी होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
कहां का बताया जा रहा वीडियो
वायरल वीडियो इंदौर के राऊ क्षेत्र के रंगवासा रोड का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि डेमू ट्रेन यहां कुछ मिनटों के लिए रुकती है। आरोप है कि लोको पायलट ट्रेन से उतरकर पास की दुकान तक जाता है। वहां से वह समोसे खरीदकर वापस लौटता है। दावा यह भी किया गया कि इस दौरान ट्रेन करीब 10 मिनट तक खड़ी रहती है। इससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लोको पायलट ने खरीदे समोसेलोगों ने बनाया वीडियो
स्थानीय रहवासियों के अनुसार यह घटना नई नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने इस बार पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वहीं कई लोगों ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
समोसे हाथ में इंजन पर चढ़ारेलवे ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन सक्रिय हो गया। रेलवे ने वायरल वीडियो को संज्ञान में लिया है। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अब यह पता लगाएगा कि ट्रेन आखिर किस कारण रुकी थी। यह भी देखा जाएगा कि कहीं ट्रेन का रुकना किसी तकनीकी या परिचालन कारण से तो नहीं था।
जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। वीडियो को वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। मुकेश कुमार ने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि लोको पायलट ने बिना किसी अधिकृत कारण ट्रेन रोकी, तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। यदि परिचालन या सिग्नल संबंधी वजह रही होगी, तो उसे भी जांच में देखा जाएगा।
जांच में किन बिंदुओं पर नजर
रेलवे जांच के दौरान कई पहलुओं की पड़ताल करेगा। सबसे पहले ट्रेन की मूवमेंट का रिकॉर्ड देखा जाएगा। इसके बाद सिग्नल और कंट्रोल रूम की जानकारी की जांच होगी। लोको पायलट की ड्यूटी रिपोर्ट भी देखी जाएगी। यदि ट्रेन निर्धारित कारण से रुकी थी, तो उसका रिकॉर्ड मौजूद होगा। वहीं यदि निजी कारण सामने आते हैं, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। जांच में वीडियो की सत्यता भी परखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया।
नियम क्या कहते हैं
भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन तय नियमों के अनुसार होता है। किसी भी ट्रेन को बिना अधिकृत कारण नहीं रोका जा सकता। परिचालन, सिग्नल, सुरक्षा या तकनीकी कारण होने पर ही ट्रेन रुकती है। यदि कोई कर्मचारी निजी कारण से नियमों का उल्लंघन करता है, तो विभागीय कार्रवाई संभव होती है। लेकिन हर मामले में पहले जांच पूरी की जाती है। उसके बाद ही जिम्मेदारी तय होती है। इसी कारण रेलवे ने इस मामले में भी पहले जांच का रास्ता चुना है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में जांच जारी है। रेलवे ने अभी किसी कर्मचारी को दोषी नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए वायरल वीडियो में किए गए दावों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। यदि आरोप सही पाए गए, तो संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप गलत निकले, तो रेलवे उसी आधार पर अपना पक्ष सार्वजनिक करेगा।
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