समझें क्या है पूरा मामला
- सांदीपनि स्कूल में बसों की भारी कमी है।
- इसी के चलते स्कूल प्रबंधन ने नया नियम लागू किया है।
- एक दिन छात्र स्कूल आएंगे और अगले दिन छात्राएं आएंगी।
- स्कूल में करीब 2800 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बसें सिर्फ 16 हैं।
- नई बसें मिलने तक यही व्यवस्था चलेगी।
बसों की कमी बनी वजह
दरअसल रायसेन जिले के उदयपुरा स्थित शासकीय सांदीपनि विद्यालय में परिवहन व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। स्कूल प्रबंधन ने बसों की कमी के चलते नया नियम लागू किया है। अब एक दिन छात्र स्कूल आएंगे। दूसरे दिन छात्राएं स्कूल पहुंचेंगी।
यह नियम खासतौर पर उन बच्चों के लिए है जो स्कूल बस पर निर्भर हैं। जो बच्चे निजी साधन से आना चाहते हैं, वे रोज स्कूल आ सकते हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है।
2800 बच्चों पर सिर्फ 16 बसें
स्कूल प्राचार्य वंदना मिश्रा के अनुसार इस साल स्कूल में करीब 2800 विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ है। इनमें से 1700 विद्यार्थियों ने बस सुविधा के लिए आवेदन किया है। स्कूल के पास फिलहाल केवल 16 बसें उपलब्ध हैं।
नियमों के अनुसार एक बस में 55 से 60 विद्यार्थियों को ले जाया जा सकता है। इस हिसाब से रोज करीब 1000 विद्यार्थियों का ही परिवहन संभव हो पा रहा है। यही वजह है कि स्कूल को यह नया तरीका अपनाना पड़ा है।
स्कूल प्रबंधन ने अतिरिक्त बसों की मांग शासन से की है। प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही नई बसें उपलब्ध होंगी, सभी विद्यार्थियों को रोज स्कूल आने की सुविधा मिलेगी। तब तक यह बारी-बारी वाला नियम जारी रहेगा।
एक दिन का पाठ अगले दिन भी
वहीं स्कूल प्रबंधन का दावा है कि पढ़ाई का नुकसान नहीं होगा। एक दिन जो पाठ पढ़ाया जाएगा, वही पाठ अगले दिन दूसरे समूह को भी पढ़ाया जाएगा। इस तरह दोनों समूहों को बराबर पढ़ाई मिलने का दावा किया गया है।
हालांकि अभिभावकों और शिक्षा जानकारों में इस व्यवस्था को लेकर मिली-जुली राय हो सकती है। कई बार बारी-बारी पढ़ाई से बच्चों की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जाती है।
सरकारी स्कूलों में परिवहन की कमी कोई नई समस्या नहीं है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में बस, स्टाफ और संसाधनों की कमी लंबे समय से चर्चा में रहती है।
ऐसे मामलों में अक्सर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को तात्कालिक समाधान निकालने पड़ते हैं। उदयपुरा का यह मामला भी उसी चुनौती का एक उदाहरण है।
सांदीपनि स्कूल क्या हैं?
सांदीपनि स्कूल मध्य प्रदेश सरकार की नई शिक्षा पहल है। इन स्कूलों का नाम महर्षि सांदीपनि के आश्रम से प्रेरित है।
यहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों की भी पढ़ाई कराई जाती है। यानी पढ़ाई में स्मार्ट क्लास, डिजिटल तकनीक और विज्ञान के साथ-साथ भारतीय परंपराओं पर भी जोर दिया जाता है।
कब हुई शुरुआत?
बता दें कि मध्य प्रदेश में सांदीपनि स्कूलों की शुरुआत 1 अप्रैल 2025 से हुई थी। इसके बाद जुलाई 2025 में गुरु पूर्णिमा के दिन भोपाल के कमला नेहरू परिसर में पहले अत्याधुनिक सांदीपनि कन्या विद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया गया था।
सरकार का क्या है प्लान?
राज्य सरकार का लक्ष्य पूरे मध्य प्रदेश में करीब 9 हजार सांदीपनि स्कूल तैयार करना है। फिलहाल 369 से ज्यादा स्कूलों पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस नई शिक्षा व्यवस्था का फायदा मिल सके।

