News in short
- भोपाल में हजारों अतिथि शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन।
- 30 अप्रैल बाद सवा लाख अतिथि शिक्षक बेरोजगार होंगे।
- गुरुजी की तर्ज पर नियमितीकरण की मांग उठाई।
- भर्तियों में अतिथियों को 50% पद आरक्षित करने पर जोर।
- वार्षिक सेवा पर अनुभव के आधार पर 10 अंक देने की मांग।
News in detail
BHOPAL: सरकार पर वार्षिक अनुबंध का वादा तोड़ने का आरोप लगाकर अतिथि शिक्षकों ने भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हजारों अतिथि शिक्षक अंबेडकर पार्क में जमा हुए और सरकार से अपने वादे पूरे करने की मांग की। अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 30 अप्रैल से कार्यमुक्त करने के आदेश पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सरकार को मांगों की अनदेखी करने पर आंदोलन तेज करने की भी चेतावनी दी है।
अपने ही वादे भूल गई सरकार
अंबेडकर पार्क में प्रदेश भर से जमा हुए अतिथि शिक्षकों ने सरकार की नीतियों पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी सरकार ने अतिथि शिक्षकों से नियमितीकरण का वादा किया था। इसके लिए ईजीएस शालाओं के गुरुजियों की तरह नीति लागू करने का भी आश्वासन दिया गया था। अतिथि शिक्षकों को भर्ती में बोनस अंक और वार्षिक अनुबंध के साथ सुरक्षित भविष्य देने का भरोसा दिलाया गया था। अब सरकार अपने ही इन वादों को भूल गई है।
सिंधिया- शिवराज ने की वादाखिलाफी
अतिथि शिक्षकों ने प्रदर्शन के दौरान पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना था दोनों ही नेताओं ने चुनाव के दौरान मंचों से उनके लिए कई घोषणाएं की थीं। अब वे अतिथि शिक्षकों के भविष्य को नजरअंदाज कर रहे हैं। इस वादाखिलाफी से अतिथि शिक्षक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल से सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश भर के अतिथि इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि सरकार ने उनसे वार्षिक अनुबंध का वादा किया था। अब जिम्मेदार नेता चुप्पी साधे बैठे हैं।
सवा लाख पर बेरोजगारी का संकट
अतिथि शिक्षकों के आंदोलन में शामिल रामचंद्र नागर एवं केसी पवार ने बताया कि सरकार वार्षिक अनुबंध के अपने वादे से पीछे हट रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल से सेवा समाप्त कर दी है, यानी एक दिन बाद ही प्रदेश के सवा लाख से ज्यादा अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे। अतिथि शिक्षक विपरीत परिस्थितियों में भी स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था संभालते आ रहे हैं। सरकार और विभाग को उनकी कोई चिंता नहीं है।उन पर तरह- तरह की पाबंदियां लादी जा रही हैं।
ई-अटेंडेंस ने अटकाया मानदेय
अतिथि शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने कहा पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर किए बिना ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की गई है। इसके कारण अतिथि शिक्षकों को सितम्बर 2025 का मानदेय नहीं मिला है। प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक इसके लिए कई बार जिले से लेकर डीपीआई के अधिकारियों से बात कर चुके हैं। बार- बार अवगत कराने के बाद भी उनकी समस्या को दूर नहीं किया गया है।
अनुभव के अंक नाकाफी, पदों पर आरक्षण भी कम
अतिथि शिक्षकों ने प्रदर्शन के दौरान अपनी मांगों को उठाया। उनका कहना था सरकार ने अनुभव के आधार पर अंक देने की घोषणा की थी। हर वर्ष अध्यापन के बदले में 10 अंक दिए जाने चाहिए जबकि केवल 5 अंक ही दिए जा रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं में अतिथि शिक्षकों के लिए 25 फीसदी पद ही आरक्षित किए गए हैं। इन पदों की संख्या 50 फीसदी होनी चाहिए।
ये भी उठाई मांग
- न्यूनतम 50 कार्य दिवस पूर्ण करने पर अनुभव अंक दिया जाए।
- कर्मचारी बीमा, PF और स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा लागू किया जाए।
- 13 आकस्मिक एवं 3 ऐच्छिक अवकाश स्वीकृत किए जाएं।
- महिला शिक्षकों को 6 माह का मातृत्व अवकाश मिले
- हरियाणा में अतिथि शिक्षकों के लिए लागू नीतियां प्रदेश में भी अपनाई जाएं।
- छत्तीसगढ़ में संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण की नीति एमपी में भी लागू हो।
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