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श्रीराम मंदिर विवाद : सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कलेक्टर को देंगे हिसाब

श्रीराम मंदिर विवाद : सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कलेक्टर को देंगे हिसाब

समझें क्या है पूरा मामला

  • श्रीराम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
  • मंदिर संपत्ति और प्रबंधन पर यथास्थिति के निर्देश
  • कुरुद मंदिर मामले में SC ने दिए अहम निर्देश
  • मंदिर खातों की जानकारी कलेक्टर को देनी होगी
  • तीसरे पक्ष के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Dhamtari। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद स्थित प्रसिद्ध श्रीरामचंद्र जी मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों के कब्जे व संचालन को लेकर सभी पक्षों को वर्तमान स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि मंदिर की संपत्तियों या प्रबंधन से जुड़ा कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाए, जिससे मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो। साथ ही किसी तीसरे पक्ष के अधिकार या हित भी इस दौरान नहीं बनाए जा सकेंगे।

मंदिर प्रबंधन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मंदिर और उसकी संपत्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील के रूप में पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि जब तक मामले में अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक मंदिर की व्यवस्था और संपत्तियों को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। मंदिर से जुड़े दस्तावेजों और खातों को भी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

खातों की जानकारी कलेक्टर को देनी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि मंदिर के सभी खाते और उनसे संबंधित दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से रखे जाएं।

इसके अलावा हर तीन महीने में मंदिर के खातों और संबंधित दस्तावेजों की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर को उपलब्ध करानी होगी। कोर्ट ने यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहुंचा मामला

यह विवाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने दूसरी अपील स्वीकार करते हुए कुछ पक्षों के समर्थन में डिक्री पारित की थी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई 2024 को मामले में हस्तक्षेप करते हुए हाई कोर्ट के उस आदेश के प्रभाव पर रोक लगा दी थी। अब शीर्ष अदालत ने इसी मामले में अंतरिम व्यवस्था को और स्पष्ट किया है।

एसडीएम ने दिए थे प्रबंधन से हटने के निर्देश

मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई थी। कुरुद के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने 25 अप्रैल 2025 को संबंधित पक्षों को मंदिर प्रबंधन और संपत्तियों से जुड़े कार्यों से अलग होने का निर्देश दिया था।

एसडीएम ने निर्देश दिया था कि मंदिर से जुड़े दस्तावेज, चाबी, मूल्यवान वस्तुएं और नकदी तहसीलदार एवं नगर पंचायत कुरुद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे जाएं।

इसके बाद संबंधित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासनिक आदेश पर रोक लगाने और पहले की स्थिति बनाए रखने की मांग की थी।

तीसरे पक्ष के हित नहीं बनाए जा सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि मंदिर की संपत्ति और प्रबंधन को लेकर कोई नया अधिकार या तीसरे पक्ष का हित तैयार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि सभी पक्षों को मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ही काम करना होगा। मंदिर की संपत्ति या व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।

अंतिम फैसले तक जारी रहेगी व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर दिया गया है। मंदिर प्रबंधन और संपत्ति विवाद पर अंतिम फैसला बाद की सुनवाई में होगा।

फिलहाल कोर्ट के निर्देश के बाद मंदिर से जुड़े सभी पक्षों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। साथ ही मंदिर के रिकॉर्ड और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।


FAQ
Q. कुरुद के श्रीरामचंद्र जी मंदिर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया? A. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर और उसकी संपत्तियों के कब्जे व प्रबंधन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। Q. मंदिर के खातों को लेकर कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं? A. कोर्ट ने मंदिर के खातों और संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा हर तीन महीने में उनकी कॉपी कलेक्टर को देने के निर्देश दिए हैं। Q. क्या मंदिर संपत्ति में कोई नया बदलाव किया जा सकता है? A. नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी पक्ष ऐसा कदम नहीं उठाएगा जिससे मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो या किसी तीसरे पक्ष का हित बने।

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