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सीएम मोहन यादव को भाया जलूद सोलर प्लांट और ग्रीन बांड स्कीम, बोले- बाकी निगम भी इंदौर से सीखें

सीएम मोहन यादव को भाया जलूद सोलर प्लांट और ग्रीन बांड स्कीम, बोले- बाकी निगम भी इंदौर से सीखें

Indore. इंदौर नगर निगम के नर्मदा चतुर्थ चरण के बाद अब जलूद सोलर पावर प्लांट से सीएम डॉ. मोहन यादव काफी गदगद हैं। इसे लेकर सीएम ने अन्य सभी नगर निगम को इंदौर नगर निगम की पहल का अनुसरण करने् की सीख दी है।

साथ ही इस प्लांट और इसके लिए जिस तरह से ग्रीन बांड योजना लाकर बाजार से 244 करोड़ रुपए जमा किए गए, उसके लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव की प्रशंसा की।

सीएम ने कहा कि महापौर की संकल्पना से ही यह प्रोजेक्ट खड़ा हुआ है। महापौर भार्गव की कल्पनाशीलता के बलबूते पर स्थानीय निकाय के काम का ये उत्कृष्ट उदाहरण पूरे देश में बना है।

इस तरह से प्लांट के लिए आई राशि

जलूद सोलर प्लांट इंदौर से 70 किमी दूर खरगोन जिले में स्थित है। यहां से पंप करके पानी इंदौर तक पहुंचता है, जिसके लिए हर महीने 20 से 25 करोड़ रुपए की बिजली खर्च होती है। इस समस्या का हल निकालते हुए तय किया गया कि जलूद में सोलर प्लांट लगाया जाएगा, जिससे 60 मेगावाट बिजली बनेगी।

इससे हर साल करीब 50-60 करोड़ रुपए की बचत होगी। आर्थिक तंगी के बावजूद, केंद्र की ग्रीन बांड लाने की सलाह सबसे पहले इंदौर नगर निगम ने अपनाई। महापौर ने आर्थिक विशेषज्ञों की टीम बनाई और ग्रीन बांड की मंजूरी ली। जब इसे लॉन्च किया गया, तो बाजार से 244 करोड़ रुपए की ही जरूरत थी, लेकिन यह तीन गुना ज्यादा सब्सक्राइब हो गया और 750 करोड़ की बोली लगी।

इसमें 28 राज्यों के 18 हजार से ज्यादा निवेशक शामिल हुए। इस बांड से 244 करोड़ रुपए जुटाए गए, साथ ही कार्बन क्रेडिट से 18 करोड़ रुपए की बचत भी होगी।

30 दिन में दो अहम प्रोजेक्ट

इंदौर नगर निगम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 30 दिन में दो अहम प्रोजेक्ट किए हैं। इसके लिए सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर की फाइल तेजी से मूव कराई। नर्मदा चतुर्थ चरण के लिए 29 मार्च को लोकापर्ण हुआ और सात दिन में ही इसके लिए 1,530 करोड़ राशि के लोन लेने की फाइल को शासन ने मंजूरी दे दी।

यह प्रोजेक्ट इंदौर के भविष्य के लिए सबसे अहम है। इसके जरिए साल 2047 तक के जल की व्यवस्था होगी और इंदौर में 450 एमएलडी की जगह 900 एमएलडी जल की सप्लाय होगी। इससे भविष्य में होने वाली 65 लाख जनसंख्या के लिए अभी से तैयारी हो रही है।

इस प्रोजेक्ट को भी बड़ा किया गया

पहले अमृत टू के तहत यह प्रोजेक्ट काफी छोटा था। यह केवल 1100 करोड़ का था। इसमें 800 करोड़ केंद्र और राज्य से मिलना था। लेकिन फिर भविष्य के इंदौर का विजन रखते हुए इसे नए सिरे से तैयार किया गया और साल 2047 तक संभावित 65 लाख की आबादी के बारे में सोचा गया।

इस प्रोजेक्ट में 2600 करोड़ का खर्चा है। इसके लिए अब बाकी राशि की व्यवस्था वित्तीय संस्थाओं से लोन लेकर की जाएगी, जिसकी मंजूरी मोहन सरकार ने दे दी है।

अब नजरें हुकमचंद मिल प्रोजेक्ट पर

इंदौर नगर निगम का एक और तीसरा सबसे अहम प्रोजेक्ट हुकमचंद मिल का प्रोजेक्ट है। इंदौर निगम परिषद का जुलाई 2022 में गठन होने के बाद इसे सबसे पहले हाथ में लिया गया। इसके चलते 35 साल से हक के लिए लड़ रहे मजदूरों को उनकी राशि मिली।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इस जमीन पर प्रोजेक्ट आने से निगम को करीब 800 करोड़ की राशि मिलेगी। सीएम मोहन यादव ने इंदौर आकर यह राशि मजूदरों को वितरित की और यहां हाउसिंग बोर्ड से प्रोजेक्ट की प्लानिंग कराई। इस राशि से शासन और निगम को लाभ होगा वहीं मजदूरों को पहले ही उनके हक की राशि मल गई है।

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