समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के सतगढ़ी में इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन हुआ।
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने आज इसका शिलान्यास किया।
- पार्क डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर शुरू हुआ।
- अलग-अलग रिपोर्ट में पार्क के साइज और रोजगार के आंकड़े अलग हैं।
- कार्यक्रम में 200 से ज्यादा उद्योगपति शामिल हुए।
कोलार में बनेगा नया हब
भोपाल के सतगढ़ी इलाके में सोमवार को एक बड़ा आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां नए इंडस्ट्रियल पार्क का भूमिपूजन किया। यह कार्यक्रम कोलार क्षेत्र में हुआ। पार्क का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा गया है। मुखर्जी देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री थे। आज उनकी 125वीं जयंती भी है। इसी मौके पर सरकार ने पार्क का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के 200 से ज्यादा उद्योगपति पहुंचे। निवेशक और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यह पार्क कोलार की पहचान पूरी तरह बदल सकता है। अब तक कोलार सिर्फ रिहायशी इलाका माना जाता था। आने वाले समय में यहां निवेश और उद्योग बढ़ेंगे।
प्रदेश में इसी महीने यूसीसी लागू हो सकती है
कार्यक्रम से पहले सुबह मुख्यमंत्री लालघाटी चौराहे पहुंचे थे। वहां उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने छोटी सभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में औद्योगिकीकरण को लेकर सरकार की सोच भी बताई। इसी दौरान उन्होंने एक अहम ऐलान भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इसी महीने यूसीसी लागू हो सकती है। यूसीसी का मतलब है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC यानी Uniform Civil Code)। यह बयान इंडस्ट्रियल पार्क कार्यक्रम से अलग एक बड़ी घोषणा है।
गारमेंट और आईटी हब की योजना
बड़े आंकड़े वाली रिपोर्ट के मुताबिक पार्क में गारमेंट पार्क भी बनेगा। इसमें 250 से ज्यादा गारमेंट यूनिट लगने की योजना है। इसके अलावा यहां आईटी (IT यानी Information Technology) से जुड़ा बड़ा टावर भी बनेगा। इसमें कई आईटी कंपनियां दफ्तर खोल सकती हैं। पार्क में एआई (AI यानी Artificial Intelligence) आधारित सुविधाएं भी शामिल होंगी। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स भी यहां तैयार होंगे। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में करीब 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह प्रोजेक्ट पीपीपी (PPP यानी Public Private Partnership) मॉडल पर आधारित बताया गया है।
कन्वेंशन सेंटर होगा खास
पार्क की एक बड़ी खासियत कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर है। यह सेंटर करीब 25 एकड़ में बनेगा। इसकी क्षमता 10 हजार से ज्यादा लोगों की होगी। कुछ रिपोर्ट में इसे भारत मंडपम की तर्ज पर बताया गया है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन हो सकेंगे। निवेशकों के सम्मेलन और बड़ी औद्योगिक प्रदर्शनी भी यहां लग सकेंगी। यह सेंटर भोपाल को नई पहचान दे सकता है।
कौन से उद्योग आएंगे
पार्क में कई तरह के उद्योग लगने की योजना है। इसमें हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग शामिल है। गारमेंट, टॉयज और आईटी सेक्टर भी शामिल होंगे। लॉजिस्टिक्स और नई तकनीक वाले उद्योग भी यहां आ सकते हैं। सरकार का मकसद अलग-अलग सेक्टर को एक जगह लाना है। इससे कंपनियों को काम करना आसान होगा।
कनेक्टिविटी का फायदा
सतगढ़ी इलाका कनेक्टिविटी के लिहाज से भी अच्छा है। यह राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन भी नजदीक है। कोलार रोड और प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास भी करीब हैं। इससे निवेशकों को आना-जाना आसान होगा। कंपनियों के लिए सामान भेजना भी आसान रहेगा। यही वजह है कि सरकार इस जगह को खास मान रही है।
सरकार का क्या है लक्ष्य
राज्य सरकार भोपाल को बड़ा औद्योगिक केंद्र बनाना चाहती है। सरकार का दावा है कि इससे निवेश बढ़ेगा। नई कंपनियां प्रदेश में आ सकती हैं। इससे प्रदेश की छवि निवेश के लिए बेहतर होगी। यह परियोजना भोपाल को मध्य भारत का बड़ा औद्योगिक केंद्र बना सकती है। सरकार पहले भी प्रदेश में कई जगह भूमि-पूजन कार्यक्रम कर चुकी है।
निवेश नीति का हिस्सा
मध्यप्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से नई निवेश नीति पर काम कर रही है। सरकार चाहती है कि बड़े शहरों के आसपास औद्योगिक क्षेत्र बढ़ें। भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों पर खास ध्यान है। सतगढ़ी पार्क को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि राजधानी में उद्योग बढ़ने से प्रदेश को फायदा होगा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर
इस पार्क से रोजगार के बड़े मौके बनने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा फायदा भोपाल और आसपास के युवाओं को मिलेगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। इससे कोलार क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। जमीन की कीमतें भी आने वाले समय में बढ़ सकती हैं। स्थानीय दुकानदारों और सेवा क्षेत्र को भी फायदा होगा।
आंकड़ों में क्यों है अंतर
पार्क के आकार और रोजगार को लेकर रिपोर्ट में अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक पार्क करीब 173 एकड़ में बनेगा। इनमें बताया गया है कि इससे करीब 15 हजार रोजगार मिल सकते हैं। वहीं कुछ और रिपोर्ट में पार्क का क्षेत्रफल 172 एकड़ बताया गया है। इन रिपोर्ट में रोजगार का आंकड़ा 35 से 40 हजार तक बताया गया है। साफ है कि अलग-अलग सोर्स के आंकड़ों में थोड़ा अंतर है। हालांकि सभी रिपोर्ट मानती हैं कि यह पार्क बड़े स्तर पर रोजगार देगा। सटीक आंकड़े सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होंगे।
आगे क्या होगा
आने वाले महीनों में इस परियोजना की प्रगति पर सबकी नजर रहेगी। पार्क का निर्माण अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में बुनियादी ढांचा तैयार होगा। इसके बाद उद्योगों को जमीन आवंटित की जाएगी। सरकार का दावा है कि काम तय समय पर पूरा होगा। स्थानीय लोगों को भी इस परियोजना से काफी उम्मीदें हैं। सटीक आंकड़ों की पुष्टि के लिए सरकार की आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।
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