समझें क्या है पूरा मामला...
- एस्सेल ग्रुप के सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी पर बड़ा आरोप लगाया है।
- उन्होंने कहा अंबानी ने जी को हड़पने की कोशिश की।
- यह विवाद उनके 22,006 करोड़ रुपए के एनसीएलटी मामले से जुड़ा है।
- रिलायंस ने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताकर खारिज किया है।
- रिलायंस ने कहा उसके मीडिया ब्रांड कभी किसी पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं हुए।
मीडिया जगत में इन दिनों एक बड़ा विवाद चर्चा में है। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अंबानी ने जी नेटवर्क को हड़पने की कोशिश की थी।
यह पूरा विवाद उनके पर्सनल इनसॉल्वेंसी यानी दिवालिया मामले से जुड़ा है, जो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल एनसीएलटी (National Company Law Tribunal) में चल रहा है।
सुभाष चंद्रा का बड़ा आरोप
जी न्यूज पर जारी एक वीडियो में सुभाष चंद्रा ने खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि अंबानी का नेटवर्क उनके खिलाफ गलत खबरें फैला रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने खुद अंबानी को फोन किया था, लेकिन कोई कॉल बैक नहीं आया। इसके बाद उन्होंने अंबानी को चिट्ठी भी लिखी। चंद्रा ने कहा कि उन्हें अपनी बात जनता के सामने रखनी जरूरी लगी।
2019 की पुरानी कहानी
मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा ने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जनवरी 2019 में जी के शेयर एक ही दिन में 40 फीसदी तक टूट गए थे। उनका दावा है कि इसके पीछे कुछ शेल कंपनियों का हाथ था। उस दौर में वे मुश्किल में मुकेश अंबानी के पास पहुंचे थे। उन्होंने कर्जा चुकाने के लिए जी बेचने का प्रस्ताव भी रखा था।
सुभाष चंद्रा के मुताबिक अंबानी ने उन्हें कर्ज चुकाने से जुड़ी सलाह भी दी थी। कुछ समय बाद विदेशी निवेशक इनवेस्को के साथ मिलकर जी को हासिल करने की कोशिश हुई। यह प्रस्ताव उनके परिवार के लिए ठीक था, लेकिन छोटे शेयरधारकों के हित में नहीं था। इसलिए उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और बाद में सोनी के साथ जी का विलय करने का फैसला किया।
सुभाष चंद्रा ने यह भी बताया कि उनके समूह पर कभी 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। उन्होंने दावा किया कि इसमें से 43 हजार करोड़ रुपए संपत्ति बेचकर चुका दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वे मुश्किल हालात से भागने वाले इंसान नहीं हैं।
एनसीएलटी में क्या हुआ
अब बात करते हैं मौजूदा विवाद की जड़ की। एनसीएलटी ने हाल ही में चंद्रा के पर्सनल गारंटर मामले में एक री-पेमेंट प्लान को मंजूरी दी है। इस मामले में उनके खिलाफ कुल दावे करीब 22 हजार छह करोड़ रुपए के दर्ज हुए थे। इनमें से 21 हजार 696 करोड़ रुपए के दावे स्वीकार किए गए। जिन कर्जदाताओं ने री-पेमेंट प्लान का विरोध किया, उनके दावे तीन हजार 992 करोड़ रुपए के हैं। इसमें से 620 करोड़ रुपए पहले ही निपटाए जा चुके हैं। बाकी बचे तीन हजार 372 करोड़ रुपए का मामला अब भी है।
22,006 करोड़ का सच
इसी आंकड़े को लेकर मीडिया में बड़ा भ्रम फैला। खबरों में कहा गया कि बैंकों को 99.97 फीसदी तक का नुकसान उठाना पड़ा है। सरकारी सूत्रों ने इस व्याख्या को गलत बताया है। सूत्रों के मुताबिक 22 हजार छह करोड़ रुपए की रकम चंद्रा का खुद का कर्ज नहीं है। यह रकम उन कंपनियों के कर्ज से जुड़ी है, जिनके लिए चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी।
री-पेमेंट प्लान के तहत चंद्रा खुद अपनी संपत्ति से करीब छह करोड़ 25 लाख रुपए चुकाएंगे। इसके अलावा मूल कर्जदार कंपनियों की तरफ से करीब एक हजार 494 करोड़ रुपए का भुगतान भी होना है। साथ ही कर्जदाता उन कंपनियों की संपत्ति और सिक्योरिटी से वसूली भी जारी रख सकते हैं।
किन बैंकों ने किया विरोध
सुभाष चंद्रा के री-पेमेंट प्लान को 80.81 फीसदी कर्जदाताओं का समर्थन मिला था, लेकिन कुछ बड़े बैंकों ने इसका विरोध किया। इनमें एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं।
इन बैंकों की मुख्य चिंता चंद्रा की घटी हुई नेटवर्थ को लेकर थी। साल 2017 में उनकी नेटवर्थ 45 हजार 888 करोड़ रुपए बताई गई थी। साल 2018 में यह 40 हजार 562 करोड़ रुपए दिखाई गई। अब उनकी बताई गई नेटवर्थ सिर्फ करीब 31 करोड़ 79 लाख रुपए है। यही बड़ा अंतर बैंकों की चिंता की वजह बना।
रिलायंस का जवाब
सुभाष चंद्रा के आरोपों के बाद रिलायंस ग्रुप की तरफ से भी तुरंत जवाब आया। कंपनी ने शुक्रवार, 28 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंज को एक बयान भेजा। इसमें कहा गया कि चंद्रा की टिप्पणियां पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
रिलायंस ने साफ कहा कि उसके मीडिया ब्रांड कभी किसी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल नहीं हुए। कंपनी ने यह भी कहा कि आगे भी ऐसा कभी नहीं होगा। रिलायंस ने चंद्रा को एक बड़ा कारोबारी और उद्यमी बताते हुए सम्मान जताया। कंपनी ने उनके लिए शुभकामनाएं भी दीं।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह मामला एक खास तरह का पर्सनल गारंटर केस है। इसे आम दिवालिया मामलों जैसा नहीं माना जा सकता। जानकारों का मानना है कि यह विवाद अभी और आगे बढ़ सकता है। दोनों कारोबारी समूहों के बीच यह मामला कॉरपोरेट जगत में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।
FAQ
Q. सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी पर क्या आरोप लगाया है? A. सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया कि मुकेश अंबानी ने जी नेटवर्क को हड़पने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी कहा कि अंबानी का मीडिया नेटवर्क उनके पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले को लेकर गलत जानकारी फैला रहा है।
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