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ट्रांसफर रुकवाने AI का सहारा, बनाया प्रभारी मंत्री का फर्जी पत्र, ऐसे खुला राज

ट्रांसफर रुकवाने AI का सहारा, बनाया प्रभारी मंत्री का फर्जी पत्र, ऐसे खुला राज

द सूत्र 2 months ago

समझें क्या है पूरा मामला...

  • टीकमगढ़ में ट्रांसफर रोकने के लिए फर्जी पत्र बनाया गया था।
  • पत्र में प्रभारी मंत्री का नाम इस्तेमाल किया गया है।
  • एआई की मदद से यह पत्र तैयार किया गया था।
  • पत्र सीएमएचओ कार्यालय से अनुमोदित होकर कलेक्टर तक पहुंचा है।
  • नाम की गलती से पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया है।

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक अजीब मामला सामने आया है। यहां तबादला रोकने के लिए एआई की मदद से फर्जी पत्र तैयार किया गया। यह पत्र प्रभारी मंत्री के नाम से बनाया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पत्र सीएमएचओ कार्यालय से अनुमोदित भी हो गया है।

मामला तब खुला जब यह पत्र कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा। कलेक्टर ने पत्र को ध्यान से देखा। उन्हें लेटरहेड और मंत्री के नाम में गड़बड़ी नजर आई। इसके बाद उन्होंने पत्र की सच्चाई जांचने का फैसला किया। इसी जांच में पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया है।

तबादला और फर्जी पत्र की कहानी

स्वास्थ्य विभाग में एक मल्टी पर्पज वर्कर (एमपीडब्ल्यू) तैनात है। इस कर्मचारी का नाम केएल वंशकार बताया गया है। हाल ही में उसका तबादला उप स्वास्थ्य केंद्र गौर से दरगवां किया गया था। कर्मचारी इस तबादले से खुश नहीं था।

तबादला रुकवाने के लिए एक योजना बनाई गई। आठ जुलाई को सीएमएचओ कार्यालय में एक पत्र पेश किया गया। यह पत्र टीकमगढ़ की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के नाम से तैयार किया गया था। दावा किया गया कि यह पत्र मंत्री ने खुद भेजा है।

सूत्रों के मुताबिक यह पत्र एआई तकनीक की मदद से बनाया गया। पत्र में मंत्री का लेटरहेड और उनके हस्ताक्षर जैसी चीजें डाली गई थीं। देखने में यह पत्र असली जैसा ही लग रहा था। इसी वजह से यह सीएमएचओ कार्यालय से आसानी से पास हो गया।

सीएमएचओ कार्यालय ने पत्र को अनुमोदित कर आगे भेज दिया। पत्र तबादला रद्द करने के लिए कलेक्टर कार्यालय भेजा गया। किसी को शुरुआत में इस पर शक नहीं हुआ। पूरी प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही।

नाम की गलती से पकड़ में आया राज

कलेक्टर कार्यालय में पत्र पहुंचने पर मामला बदल गया है। कलेक्टर ने पत्र को ध्यान से पढ़ा। उन्हें पत्र में कुछ गड़बड़ी नजर आई। टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री का नाम कृष्णा गौर है।

लेकिन AI से बने पत्र में मंत्री का नाम कृण्णा गौर लिखा गया था। यह छोटी सी गलती बड़े फर्जीवाड़े का सुराग बन गई। इसके अलावा मंत्री के विभाग के नाम में भी गलती मिली। यह गलती किसी असली सरकारी पत्र में होना मुश्किल है।

नाम में गड़बड़ी देखकर कलेक्टर को शक हुआ। उन्होंने पत्र की प्रामाणिकता जांचने का आदेश दिया। जांच में साफ हो गया कि यह पत्र नकली है। पत्र मंत्री ने कभी भेजा ही नहीं था।

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई

फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सत्यापन में यह पत्र फर्जी साबित हुआ है। यह पत्र एमपीडब्ल्यू ने खुद भेजा था। तबादला रोकने के लिए फर्जी पत्र लगाना नियम के खिलाफ है।

कलेक्टर ने इसे कानूनी अपराध भी बताया। उन्होंने सीएमएचओ को एमपीडब्ल्यू को निलंबित करने का आदेश दिया। साथ ही जरूरी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। अब यह देखना होगा कि जांच में और क्या सामने आता है।

फिलहाल यह जांच की जा रही है कि पत्र किसने और कैसे तैयार किया। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सीएमएचओ कार्यालय में यह पत्र बिना जांच के कैसे पास हो गया। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। मामला अभी जांच के दायरे में है।

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