समझें क्या है पूरा मामला...
- पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
- कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों को भोपाल सेंट्रल जेल ले जाया गया।
- जेल में गिरिबाला सिंह को कैदी नंबर 71 की पहचान मिली है।
- कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने खुद अपना केस लड़ा।
- ट्विशा के वकील ने समर्थ के जज के चेंबर में छिपने पर सवाल उठाए।
कैदी नंबर 71...
ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक और बड़ा अपडेट आया है। भोपाल की एक अदालत ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मंगलवार, 02 जून को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों को भोपाल सेंट्रल जेल ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को महिला मेडिकल सेक्शन में रखा गया है। जेल के रिकॉर्ड में अब उनकी नई पहचान कैदी नंबर 71 होगी।
वहीं ट्विशा के पति समर्थ सिंह को जेल की बैरक नंबर-4 में जगह मिली है। जहां उन्हें कैदी नंबर 1782 के रूप में जाना जाएगा। जेल के नियमों के हिसाब से दोनों को थाली, कटोरी और ओढ़ने-बिछाने के लिए चादर दे दी गई है।
कोर्ट रूम में खुद की पैरवी और तीखी बहस
मंगलवार को जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो कोर्ट रूम का माहौल काफी गरमा गया। 63 साल की पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने किसी वकील की मदद लेने के बजाय अपने पक्ष की पैरवी खुद की।
सुनवाई के दौरान उनकी बहस ट्विशा शर्मा के परिवार की तरफ से केस लड़ रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव से हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
गिरिबाला सिंह ने अदालत में एक शिकायत भी की। उन्होंने कहा कि जबलपुर जिला कोर्ट परिसर में उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ कुछ लोगों ने धक्कामुक्की और हाथापाई की थी।
इस आरोप पर पलटवार करते हुए वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अगर ऐसी कोई बात हुई है, तो कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच करवा लेनी चाहिए। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
जज के चेंबर में शरण लेने पर उठे सवाल
ट्विशा के परिवार के वकील ने अदालत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समर्थ सिंह को जबलपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चेंबर के अंदर छिपने का मौका कैसे मिला?
इस सवाल का जवाब देते हुए समर्थ सिंह के वकील ने दलील दी। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक अगर किसी भी इंसान को अपनी जान या सुरक्षा का खतरा महसूस होता है, तो उसे किसी भी सुरक्षित जगह पर शरण लेने का पूरा अधिकार है।
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