समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन में तंत्र-मंत्र के नाम पर वन्यजीव अवशेष बेचे जा रहे थे।
- यह कारोबार इंस्टाग्राम के जरिए चलाया जा रहा था।
- वन विभाग ने एक महिला के अकाउंट का पता लगाया।
- महिला के बैंक खाते में करोड़ों का लेनदेन मिला है।
- मामले की आगे की जांच अब दिल्ली में होगी।
मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर वन्यजीवों के अवशेष बेचे जा रहे थे। यह सब सोशल मीडिया के जरिए हो रहा था। वन विभाग की जांच में एक महिला का इंस्टाग्राम अकाउंट सामने आया है। महिला के बैंक खाते में छह महीनों का बड़ा लेनदेन मिला है। यह रकम करीब तीन से चार करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी जांच जारी है। किसी का भी दोष अभी सिद्ध नहीं हुआ है।
वन विभाग को मिली सूचना पर कार्रवाई
जिला वन अधिकारी (District Forest Officer) अनुराग तिवारी ने इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक बड़ी सूचना मिली थी। यह सूचना वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau) भोपाल से आई थी। इसी सूचना के आधार पर वन विभाग ने जांच शुरू की। सूचना एक इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ी थी। यह अकाउंट एक महिला चला रही थी। इस अकाउंट पर वन्यजीवों के अंग बेचने की कोशिश हो रही थी। इंस्टाग्राम पोस्ट में बार-बार उज्जैन का नाम आ रहा था।
वन अधिकारी ने ग्राहक बनकर की पड़ताल
अनुराग तिवारी के मुताबिक वन विभाग की टीम ने एक तरकीब अपनाई। टीम ने ग्राहक बनकर महिला से संपर्क किया। टीम यह पता लगाना चाहती थी कि महिला का उज्जैन से कोई नाता है। पोस्ट में उज्जैन का नाम बार-बार आने से शक गहरा हुआ था। इसी वजह से टीम ने गहराई से पड़ताल शुरू की। पूछताछ के दौरान कई तकनीकी सुराग भी जुटाए गए।
उज्जैन से कोई संबंध नहीं है महिला का
जांच में सामने आया कि महिला का उज्जैन से सीधा जुड़ाव नहीं है। बैंक खातों की केवाईसी (Know Your Customer) जांच की गई। इसमें उसका पता दिल्ली का निकला। इसके बाद वन विभाग ने पूरा मामला आगे भेज दिया। यह मामला वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भोपाल को सौंपा गया। अब इसकी आगे की जांच दिल्ली में होगी। स्थानीय वन विभाग ने अपने स्तर की जांच पूरी कर ली है।
तीन से चार करोड़ का लेनदेन उजागर
अनुराग तिवारी ने बताया कि महिला के बैंक खाते की भी जांच हुई। पिछले छह महीनों का रिकॉर्ड खंगाला गया। इसमें करीब तीन से चार करोड़ रुपए का लेनदेन मिला। यह पूरी रकम छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन से जमा हुई थी। इससे शक है कि यह कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा था। छोटे लेनदेन से बड़ी रकम जुटाना संदेह पैदा करता है। जांच एजेंसियां अब हर लेनदेन की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
तंत्र-मंत्र का झांसा, तांत्रिक सिद्धियां मिलने का लालच
शुरुआती जांच में एक अहम बात सामने आई। महिला ग्राहकों को कई तरह के दावे करती थी। उसका कहना था कि वन्यजीवों के अवशेष रखने से फायदा होगा। इससे आर्थिक लाभ मिलने का दावा किया जाता था। साथ ही तांत्रिक सिद्धियां मिलने का भी भरोसा दिया जाता था। जीवन की समस्याएं दूर होने का दावा भी किया जाता था। इन्हीं भ्रामक बातों से लोगों को गुमराह किया जा रहा था। ज्यादातर खरीदार अंधविश्वास में आकर पैसे दे रहे थे।
वन्यजीव संरक्षण गंभीर मामला
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू है। इस कानून के तहत ऐसे कारोबार पर सख्त पाबंदी है। संरक्षित वन्यजीवों के अंग रखना गंभीर अपराध माना जाता है। इन्हें बेचना भी उतना ही गंभीर अपराध है। तंत्र-मंत्र के नाम पर ऐसे अवशेष बेचना समाज में अंधविश्वास फैलाता है। वन विभाग के अधिकारी लगातार लोगों को सतर्क करते रहते हैं। सोशल मीडिया के जरिए यह कारोबार तेजी से फैल रहा है। यह वन विभाग के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। पहले ऐसे कारोबार स्थानीय स्तर पर ही चलते थे। अब इंस्टाग्राम और अन्य ऐप के जरिए यह देशभर में फैल गया है। ग्राहक भी अब दूर-दराज के शहरों से जुड़ जाते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग करना भी मुश्किल हो जाता है।
देशभर में बढ़ रहे मामले
पिछले कुछ समय में ऐसे वन्यजीव तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मामलों में सोशल मीडिया की भूमिका अहम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में अंधविश्वास आज भी गहरा है। यही अंधविश्वास ऐसे गिरोहों को पनपने का मौका देता है। वन विभाग का कहना है कि जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को यह समझना जरूरी है कि ऐसे दावे पूरी तरह झूठे होते हैं।
आगे क्या होगा
वन विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है। सभी दस्तावेज और सबूत आगे भेज दिए गए हैं। यह जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को सौंपी गई है। अब दिल्ली में इस मामले की आगे कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने के बाद ही कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल महिला की औपचारिक गिरफ्तारी सामने नहीं आई है। जांच में जो तथ्य मिलेंगे, उन्हीं के आधार पर फैसला होगा। यह मामला बताता है कि सोशल मीडिया पर निगरानी जरूरी है। आम लोगों को भी ऐसे झांसों से सतर्क रहना चाहिए।
जरूरी FAQ
उज्जैन का यह वन्यजीव तस्करी मामला क्या है?
उज्जैन वन विभाग को एक इंस्टाग्राम अकाउंट की सूचना मिली थी, जहां तंत्र-मंत्र के नाम पर वन्यजीवों के अवशेष बेचे जा रहे थे। यह अकाउंट एक महिला चला रही थी। वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर जांच की। जांच में पता चला कि महिला का असली पता दिल्ली का है, उज्जैन से उसका सीधा संबंध नहीं मिला। अब यह मामला वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को सौंप दिया गया है।
इस मामले में कितने पैसों का लेनदेन सामने आया है?
वन विभाग की जांच में महिला के बैंक खाते में पिछले छह महीनों में करीब तीन से चार करोड़ रुपए का लेनदेन मिला है। यह रकम छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन के जरिए जमा हुई थी, जिससे बड़े स्तर पर कारोबार होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब इन लेनदेन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
क्या इस मामले में किसी को गिरफ्तार किया गया है?
फिलहाल इस मामले में किसी की औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग ने अपने स्तर की जांच पूरी कर पूरा मामला वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, भोपाल को भेज दिया है। अब आगे की जांच दिल्ली में होगी। जांच पूरी होने और सबूत मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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