News in Short
परियोजना 'मेक-II' श्रेणी के तहत लागू होगी, और 'आईडीडीएम' के तहत खरीदी जाएगी।
इसमें कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा।
परियोजना का अनुमानित समयसीमा 2.5 वर्ष होगी, जिसमें प्रोटोटाइप विकास और मूल्यांकन शामिल है।
यह बम उच्च विस्फोट प्रभाव और दबाव उत्पन्न कर दुश्मन ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होगा।
News in Detail
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 1000 किलोग्राम के हवाई बम के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया शुरू की है। यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में छह प्रोटोटाइप (सक्रिय और निष्क्रिय) का डिजाइन और विकास होगा। दूसरे चरण में वाणिज्यिक प्रस्ताव के लिए आरएफपी जारी किया जाएगा।
रूसी एयरक्राफ्ट में होगा फिट
इन बमों की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी क्षमता होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ये 1,000 किलो के बम रूसी और पश्चिमी मूल के लड़ाकू विमानों में फिट हो सकेंगे। यह तकनीक वायुसेना को युद्ध की स्थिति में लचीलापन प्रदान करेगी।
यह परियोजना 'मेक-II' श्रेणी के तहत कार्यान्वित होगी। इसके बाद इसे 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी के तहत खरीदा जाएगा। 'आईडीडीएम' का मतलब है स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित। परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना (Air Force ) के विमानों के साथ संगति सुनिश्चित करना है। इसमें रूसी और पश्चिमी विमानों को भी शामिल किया गया है।
स्वदेशी सामग्री का योगदान
इस परियोजना में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना की अनुमानित समयसीमा लगभग 2.5 वर्ष है। इसमें प्रोटोटाइप विकास, उपयोगकर्ता परीक्षण, मूल्यांकन, वाणिज्यिक प्रक्रियाएं और अनुबंध को अंतिम रूप देना शामिल है।
वित्तीय और तकनीकी मूल्यांकन
इस परियोजना के लिए वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद ईओआई जारी की जाएगी। इसमें निजी उद्योग और पात्र भारतीय संस्थाएं भाग ले सकती हैं। विदेशी सहयोग के लिए संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वाणिज्यिक ऑफ-द-शेल्फ व्यवस्था शर्तें निर्धारित की गई हैं। विदेशी साझेदारों को स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण आवश्यकताओं का पालन दिखाना होगा।
1000 किलोग्राम बम के लाभ
यह बम प्राकृतिक विखंडन वाला उच्च क्षमता वाला गोला-बारूद है। यह दुश्मन के ठिकानों पर उच्च विस्फोट प्रभाव और चरम दबाव (पीओपी) उत्पन्न कर सकता है। यह सिस्टम भारतीय वायुसेना की संचालन क्षमता को बेहतर बनाएगा। इससे देश की रक्षा प्रणाली मजबूत होगी।
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