समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में पंचायत निधि को लेकर सरपंचों का आक्रोश बढ़ गया है। विभिन्न जिलों के सरपंचों ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात कर विकास कार्यों के लिए राशि न मिलने की शिकायत की।
बड़ी संख्या में सरपंच भाजपा के सहयोग केंद्र पहुंचे और अपनी नाराजगी सीधे उप मुख्यमंत्री के सामने रखी। यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सियासी मुद्दा भी बनता दिख रहा है। सरपंचों का आरोप है कि लंबे समय से पंचायतों के विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत नहीं हो रही। इससे सड़क, नाली, पेयजल और सामुदायिक भवन जैसे जरूरी काम ठप पड़े हैं।
निधि के अभाव में अटके विकास कार्य
सरपंचों का कहना है कि पंचायतों द्वारा भेजे गए कई प्रस्ताव महीनों से लंबित हैं। राशि स्वीकृत न होने के कारण पहले से स्वीकृत योजनाओं पर भी काम शुरू नहीं हो पा रहा। इससे ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
उप मुख्यमंत्री के सामने रखी गई समस्याएं
सहयोग केंद्र पहुंचे सरपंचों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को बताया कि पर्याप्त बजट न मिलने से वे ग्रामीणों के बीच जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि पंचायतों के प्रस्ताव विभागीय स्तर पर अटके हुए हैं, जिससे विकास की रफ्तार थम गई है।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के एक साथ पहुंचने की चर्चा दिनभर राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में होती रही। यह भी दिखाता है कि यह मुद्दा अब सत्तारूढ़ दल के भीतर भी असर डाल रहा है।
इस मामले का सियासी पहलू
अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों का इस तरह सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताना सरकार के लिए असहज स्थिति मानी जा रही है। सरपंच ज्यादातर स्थानीय स्तर पर सत्तारूढ़ दल से जुड़े रहते हैं, ऐसे में उनकी नाराजगी संगठन के भीतर के असंतोष का संकेत भी हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम न होने का सीधा असर आने वाले पंचायत और स्थानीय चुनावों पर पड़ सकता है। सरकार के लिए यह भी चुनौती है कि वह अपने ही जनप्रतिनिधियों का भरोसा बनाए रखे।
पंचायत विभाग ने मांगी जानकारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भी सक्रिय हो गया है। विभागीय अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों के सचिवों से लंबित विकास कार्यों और प्रस्तावों की जानकारी मांगनी शुरू कर दी है।
माना जा रहा है कि पंचायतवार प्रस्तावों की समीक्षा कर लंबित मामलों के निराकरण की प्रक्रिया तेज की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि सियासी नुकसान से पहले ही स्थिति को संभाला जाए।
ग्रामीण राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पंचायतों में निधि आवंटन का मुद्दा जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति और स्थानीय प्रशासन दोनों पर पड़ सकता है। पंचायत प्रतिनिधियों की यह नाराजगी आने वाले समय में सरकार के लिए संगठनात्मक चुनौती भी बन सकती है। खासकर तब जब यह असंतोष खुलकर सार्वजनिक मंच पर सामने आया हो।
समाधान की उम्मीद
फिलहाल विभाग लंबित प्रस्तावों का ब्यौरा जुटा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि समीक्षा के बाद जरूरी स्वीकृतियां जारी की जाएंगी। वहीं सरपंचों का कहना है कि वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जल्द निधि आवंटन और प्रस्तावों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इस असंतोष को कितनी जल्दी शांत कर पाती है।
FAQ
Q. सरपंच का क्या काम होता है? A. सरपंच किसी ग्राम पंचायत का निर्वाचित मुखिया होता है। वह गांव के विकास कार्यों, बैठकों और प्रशासनिक फैसलों का नेतृत्व करता है। ग्राम पंचायत निधि के इस्तेमाल में भी सरपंच की अहम भूमिका होती है। Q. छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री कौन हैं? A. छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्रियों में से एक विजय शर्मा हैं। वे राज्य सरकार में गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी संभालते हैं। इस खबर में सरपंचों ने उन्हीं से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी। Q. ग्राम पंचायत निधि क्या होती है? A. ग्राम पंचायत निधि वह सरकारी राशि है जो गांव के विकास कार्यों जैसे सड़क, नाली और पेयजल के लिए आवंटित होती है। यह राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तर से मिल सकती है। इसी राशि के अभाव में पंचायतों के कई काम अटक जाते हैं।

