नई दिल्ली: अहमदाबाद में बजरंग दल और विश्व हिंदी परिषद द्वारा गुरुवार को एक गार्डन में आयोजित मलाला यूसुफजई, ऐनीी फ्रैंक और अन्य लेखकों की किताबों की रीडिंग के आयोजन को बाधित किया गया.
आरोप है कि दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने वहां पाठकों के साथ मार पीट भी की.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नागरिकों के एक समूह 'स्टूडेंट एंड यूथ कलेक्टिव' ने वास्ट्रापुर के एक गार्डन में इस रीडिंग का आयोजन किया था. यह आयोजन उस घटना के विरोध में था, जिसमें बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के विरोध के बाद अहमदाबाद के एक निजी स्कूल को मलाला यूसुफजई और ऐनी फ्रैंक की किताबों को अपनी अनिवार्य रीडिंग लिस्ट से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
कलेक्टिव ने एक बयान जारी कर इस समूह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की.
बयान में कहा गया कि करीब 50 लोग, जिनमें छात्र, वकील और मीडिया से जुड़े लोग शामिल थे, चुपचाप किताबें पढ़ने के लिए वहां जुटे थे. वे 'आई एम मलाला' और 'द डायरी ऑफ ऐनी फ्रैंक' की रीडिंग कर रहे थे. इन दोनों किताबों को हाल ही में अहमदाबाद के आनंद निकेतन स्कूल, शिलाजकी रीडिंग लिस्ट से हटा दिया गया था.
बयान के मुताबिक, शाम करीब 6:30 बजे खुद को बजरंग दल और विहिप से जुड़ा बताने वाले करीब 30-40 लोग वहां पहुंचे. उनके पास 'बेसबॉल बैट, लकड़ी के डंडे और लोहे की लाठियां थीं.
कलेक्टिव से जुड़े और पेशे से प्रोफेसर सावन झालरिया ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'हम गार्डन में शांतिपूर्वक किताबें पढ़ रहे थे. ये सिर्फ यूसुफजई और ऐनी फ्रैंक की किताबें नहीं थीं, बल्कि भगत सिंह, चे ग्वेरा और कई अन्य लेखकों की किताबें भी थीं. तभी करीब 30 लोग लोहे की छड़ों और डंडों के साथ वहां आए और हम पर हमला करने लगे. हममें से कम से कम छह लोग घायल हुए हैं.'
डेक्कन क्रोनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.
अख़बार के मुताबिक, वास्ट्रापुर पुलिस स्टेशन की इंस्पेक्टर जी.एम. चौधरी ने बताया कि करीब 20 लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, गार्डन में किताबों की रीडिंग के लिए जुटे थे. इसी दौरान करीब 18 से 20 लोगों के एक हथियारबंद समूह ने उनकी किताब के चुनाव को लेकर उनका विरोध किया. इस समूह के लोगों ने खुद को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा बताया.
उन्होंने कहा कि रीडिंग सेशन खत्म होने के बाद जब किताब पढ़ने वाले लोग गार्डन से बाहर निकल रहे थे, तभी करीब 18 से 20 लोग वहां पहुंचे. उन्होंने गुस्से में सवाल किया कि उन्होंने यूसुफजई की आत्मकथा 'आई एम मलाला' क्यों पढ़ी.
उन्होंने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.
अधिकारी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने और शारीरिक पीड़ा पहुंचाने से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
गुरुवार को बजरंग दल गुजरात के आधिकारिक एक्स हैंडल से किए गए एक पोस्ट में कहा गया, 'बोपल की आनंद निकेतन स्कूल में पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई की किताब बच्चों को पढ़ाए जाने का मामला सामने आया. कश्मीर मुद्दे पर भारत का विरोध करने वाली मलाला की किताब को लेकर बजरंग दल ने विरोध किया, जिसके बाद स्कूलने इसका पठन बंद कर दिया. अब इसी किताब का पठन-पाठन दोबारा करवाने के लिए कांग्रेस के कुछ नेता और कथित 'क्रोकोच जनता पार्टी' के लोग एकत्र हुए. बजरंग दल को जब इस पाकिस्तान-समर्थक मानसिकता की जानकारी मिली, तो पहले समझाया, बात नहीं मानी तो फिर बजरंगी भाषा में समझाया.'
विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 अगस्त को शुरू हुआ था. अहमदवाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, आनंद निकेतन शिलाज स्कूल में कक्षा 5 के छात्रों के लिए मलाला यूसुफजई की किताब 'आई एम मलाला' और ऐनी फ्रैंक की 'द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' उपलब्ध कराई गईं. अभिभावकों के एक वर्ग और दक्षिणपंथी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को 'आपत्तिजनक सामग्री' पढ़ाई जा रही है, और इसके विरोध में स्कूल परिसर में प्रदर्शन किया.
आरोप लगाया गया कि स्कूल द्वारा नियुक्त एक कंसल्टेंट ने सिलेबस में बदलाव कर इन किताबों को इसमें शामिल किया था. इस स्कूल को काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ( सीआईएससीई) से मान्यता प्राप्त है.
इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल को नोटिस जारी किया और उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जिला प्रशासनिक अधिकारी रोहित चौधरी की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद स्कूल ने दोनों किताबों को अनिवार्य रीडिंग लिस्ट से हटा दिया और कंसल्टेंट मुनज्जा शम्स को उनके पद से हटा दिया गया.
स्टूडेंट एंड यूथ कलेक्टिव ने आनंद निकेतन स्कूल के साथ एकजुटता जताते हुए बयान जारी किया था.
बयान में बाहरी संगठनों से स्कूल के शैक्षणिक मामलों से दूर रहने की अपील की गई थी और कहा गया था कि सार्थक शिक्षा का मतलब पाठ्यपुस्तकों के अलावा महत्वपूर्ण किताबों और अन्य संसाधनों के साथ जुड़ना भी है.
बयान में कहा गया, 'हम स्कूल, उसके कर्मचारियों और प्रबंधन के साथ अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त करते हैं.' बयान में स्कूल को अपने शैक्षणिक प्रयासों को जारी रखने के लिए जरूरी स्वायत्तता देने की मांग की.
किताबों का बचाव करते हुए बयान में कहा गया था, 'हमारा मानना है कि ये दोनों किताबें छात्रों के लिए पढ़ने और समझने के लिहाज से आज भी बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं.' बयान में कहा गया कि यूसुफजई की आत्मकथा पाकिस्तान में महिलाओं, बच्चों और लड़कियों के शिक्षा के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को दर्ज करती है. वहीं, ऐनी फ्रैंक की डायरी नाजी शासन और होलोकॉस्ट के दौरान जीवन का एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तिगत दस्तावेज है.

