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अनुच्छेद 370 हटाने के सात साल: महबूबा मुफ़्ती ने देर रात दिया धरना, पूरे जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों पर रोक

अनुच्छेद 370 हटाने के सात साल: महबूबा मुफ़्ती ने देर रात दिया धरना, पूरे जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों पर रोक

द वायर 1 week ago

ई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मंगलवार (4 अगस्त) रात जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया.

वहीं, प्रशासन ने सभी राजनीतिक दलों और संगठनों को 5 अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर में कहीं भी विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया है. साथ ही, अनुच्छेद 370 को हटाने की सातवीं बरसी से पहले सुरक्षा इंतज़ाम कड़े कर दिए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महबूबा मुफ़्ती और पार्टी के नेताओं, जिनमें विधायक वहीद पारा और आगा मुंतज़िर मेहदी शामिल थे, ने श्रीनगर स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर धरना देकर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को निरस्त किए जाने का विरोध किया.

महबूबा मुफ़्ती ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'इसकी शुरुआत 4 अगस्त की एक बहुत काली रात से हुई थी और वह काली रात अभी भी जारी है.'

वह 4 अगस्त 2019 की उस रात का जिक्र कर रही थीं, जब जम्मू-कश्मीर में कई मुख्यधारा के नेताओं और अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था.

उन्होंने कहा, 'हम नई दिल्ली को यह संदेश देना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोग शांति पसंद हैं, लेकिन उसी के साथ अनुच्छेद 370 और 35-ए उनके दिलों में आज भी जीवित हैं.'

महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान होना चाहिए, लेकिन उसमें विशेष दर्जा की बहाली भी शामिल होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'आप कश्मीर को एक खुली जेल में बदलकर यह नहीं कह सकते कि सब कुछ ठीक है.'

महबूबा मुफ़्ती ने बुधवार को 'शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों' का आह्वान किया है. पीडीपी ने अपनी उस प्रतिबद्धता को दोहरा, जिसके तहत वह 'जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति की बहाली' की मांग करती है तथा 'लोकतांत्रिक और संघीय मूल्यों के लगातार हो रहे क्षरण' का विरोध करती है.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि, मंगलवार रात का प्रदर्शन इसलिए आयोजित किया गया क्योंकि पार्टी नेताओं को आशंका थी कि बुधवार को प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे देर रात तक वहीं डटे रहने की योजना बना रहे थे.

महबूबा मुफ़्ती और पीडीपी नेताओं ने रेजीडेंसी रोड स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर धरना और मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. वहीं, पार्टी नेता और महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती ने शहर के केंद्र की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. पीडीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इल्तिजा मुफ़्ती को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल नेशनल कॉन्फ्रेंस के जम्मू प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने कहा था कि पार्टी 5 अगस्त को 'काला दिवस' के तौर पर मनाएगी. वे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा असंवैधानिक और एकतरफा तरीके से हटाए जाने का विरोध करेंगे और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल न करने के केंद्र सरकार के लगातार इनकार पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे.

एनसी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि श्रीनगर समेत पूरे जम्मू-कश्मीर में पार्टी के जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाले जाएंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक इन प्रदर्शनों में शामिल होंगे.

प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन की इजाज़त देने से इनकार

ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने सभी राजनीतिक दलों और संगठनों को 5 अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया है. साथ ही, अनुच्छेद 370 को हटाने की सातवीं बरसी से पहले सुरक्षा इंतज़ाम कड़े कर दिए गए हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कहीं भी किसी भी विरोध कार्यक्रम के लिए इजाज़त नहीं दी गई है और चेतावनी दी कि बिना इजाज़त के प्रदर्शन आयोजित करने या उनमें शामिल होने की कोशिश करने वालों के खिलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सभी ज़िला प्रशासनों और पुलिस यूनिट को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की गैर-कानूनी भीड़ जमा न हो.'

उन्होंने कहा, 'हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे ज़िम्मेदारी से काम लें, किसी भी गैर-कानूनी भीड़ में शामिल होने से बचें और शांति और सद्भाव बनाए रखने में पुलिस और सिविल प्रशासन का पूरा सहयोग करें.'

पूरे कश्मीर और जम्मू डिवीज़न के कुछ हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संवेदनशील जगहों पर पुलिस, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज़ (सीएपीएफ) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है.

सुरक्षा कर्मियों ने गाड़ियों की चेकिंग, तलाशी और इलाके में गश्त बढ़ा दी है, साथ ही अहम जगहों, सरकारी इमारतों और ज़िला मुख्यालयों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है.

पुलिस ने कहा कि सुरक्षा के आकलन के आधार पर एहतियाती कदम भी उठाए गए हैं ताकि आम लोगों की ज़िंदगी पर कोई असर न पड़े.

उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने संसद में एक प्रस्ताव लाकर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और स्वायत्तता प्रदान करने वाली अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराओं को निरस्त कर दिया था. अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर (पुनर्गठन) अधिनियम 2019 प्रभाव में आया और इसके परिणामस्वरूप जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: The Wire Hindi