नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक घटक दल ने बुधवार (29 जुलाई) को संसद में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलन को नकारात्मक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सहयोगी दल ने इसे सरकार और कानून बनाने वालों के लिए भारत की परीक्षा प्रणाली को मज़बूत करने की दिशा में एक 'चेतावनी' (वेक-अप कॉल) बताया.
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बहस के दौरान सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के सांसद इंद्र हंग सुब्बा ने प्रस्तावित कानून का समर्थन किया और कहा कि बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन अभ्यर्थियों की बढ़ती निराशा को दर्शाते हैं.
सिक्किम से दो बार सांसद रहे सुब्बा ने अपने भाषण में कहा, 'पिछले कुछ महीनों में जिस तरह हमारे युवा सड़कों पर उतरे और उन्होंने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है, उसे नकारात्मक रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. मुझे लगता है कि सिस्टम, सांसदों और सरकार, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, के लिए यह एक चेतावनी है कि हमें अपनी परीक्षा प्रणाली को और मज़बूत बनाना होगा.'
मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह संशोधन बिल, जो अब लोकसभा से पास हो चुका है, नीट-यूजी 2026 परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद लाया गया है. विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के लिए सख़्त सज़ा और सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन में ज़्यादा जवाबदेही की मांग की थी.
सांसद सुब्बा ने कहा कि परीक्षाओं में धोखाधड़ी अब इक्का-दुक्का घटनाओं से बढ़कर एक संगठित अपराध बन गई है, जिसमें पैसों का लेन-देन शामिल है.
उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे रैकेट से अमीर उम्मीदवारों को बहुत ज़्यादा फायदा होता है, जबकि आर्थिक रूप से कमज़ोर बैकग्राउंड वाले उन छात्रों को नुकसान होता है जो अपनी ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकारी परीक्षाओं पर निर्भर रहते हैं.
उन्होंने कहा, 'जब पेपर लीक होता है, तो गलत तरीकों से कोई उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन कर लेता है, जबकि एक मेहनती छात्र पीछे रह जाता है, यहां न सिर्फ़ सिस्टम फेल होता है, बल्कि बच्चे का भविष्य भी दांव पर लग जाता है.'
उन्होंने तय समय-सीमा में जांच की भी मांग की और कहा कि लंबी जांच से अक्सर न्याय मिलने में देरी होती है.
वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) सासंद हनुमान बेनीवाल ने पेपर लीक को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि बिल में और कड़े प्रावधानों की ज़रूरत है.
उन्होंने अपने भाषण के लिए सिर्फ तीन मिनट का समय दिए जाने को लेकर भी नाराज़गी ज़ाहिर की. उन्होंने कहा कि जो नेता प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ मिलकर लड़े थे, उन्हें ज़्यादा समय मिलना चाहिए था.
बेनीवाल ने कहा, 'हम जंतर-मंतर सिर्फ़ रील्स बनाने नहीं गए थे. हमने यह लड़ाई सड़कों से लेकर संसद तक लड़ी है.'
उन्होंने युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों को ही सरकार को यह कानून लाने के लिए मजबूर करने का श्रेय दिया.
परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच आत्महत्या करने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देते हुए बेनीवाल ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के समय पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने का आह्वान किया.
उन्होंने कई परीक्षाओं को प्रभावित करने वाले संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए उम्रकैद की सज़ा, अनिवार्य डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ कोर्ट की निगरानी में जांच, दोषी पाए गए लोगों को सरकारी परीक्षाओं और सरकारी नौकरी से हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने, और जांच के दौरान कोर्ट को नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट का आदेश देने की अनुमति देने वाले कानूनी प्रावधानों का प्रस्ताव रखा.
उन्होंने आगे कहा, 'मेरा मानना है कि सिर्फ़ कानून बनाना ही काफ़ी नहीं है. जब तक पेपर लीक के मास्टरमाइंड, भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वालों के ख़िलाफ़ तेज़ और सख़्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा.'
गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में बुधवार को पेपर लीक से जुड़े 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पास हो गया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ध्वनि मत के आधार पर बिल को पास कर दिया. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी.

