नई दिल्ली: ओडिशा के गंजाम ज़िले में पुलिस हिरासत में कथित तौर पर यातना दिए जाने के बाद 32 वर्षीय एक दिहाड़ी मज़दूर की मौत हो गई, जिसके बाद डीजीपी ने इस मामले में उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मृतक की पहचान सुशांत साहू के रूप में हुई है, जो कबिसूर्यनगर पुलिस थाना क्षेत्र के सुबालेया गांव का रहने वाला था. पुलिस ने उन्हें 25 मई को हिरासत में लिया था.
पुलिस ने बताया कि रविवार रात बरहामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने साहू को मृत घोषित कर दिया.
स्थानीय खबर के अनुसार, परिवार वालों ने बताया कि सुशांत, जो शारीरिक रूप से अक्षम और दिहाड़ी मज़दूर था, को पुलिस ने 25 मई को पत्थर तोड़ने (ब्लास्टिंग) से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया था. आरोप है कि उन्हें कई दिनों तक कबिसूर्य नगर पुलिस स्टेशन में रखा गया और शनिवार को गंभीर हालत में उसके परिवार को सौंप दिया गया. उसे पहले इलाके एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेरहामपुर शिफ़्ट कर दिया गया, जहां चोटों के कारण उसकी मौत हो गई.
उनकी पत्नी, मामाजिन प्रधान ने आरोप लगाया कि सुशांत को उसके काम करने की जगह पर हुई एक छोटी-सी कहासुनी के बाद उठा लिया गया था.
पीटीआई के अनुसार, उनकी पत्नी ने आरोप लगाया, 'पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा… उनके शरीर पर चोट के निशान हैं. उनके शरीर पर फफोले भी हैं क्योंकि पुलिस ने उस पर गर्म पानी डाला था.'
उन्होंने आगे बताया कि उन्हें पहले कबिसूर्यनगर अस्पताल ले जाया गया और बाद में एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ़्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया.
इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है, जो हिरासत में यातना दिए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
खबरों के अनुसार, राज्य पुलिस मुख्यालय ने एक बयान में कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुराना ने इस कथित घटना की जांच 'मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ' से कराने के आदेश दिए हैं.
पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंपे गए एक ज्ञापन में मामाजिनी ने 25 मई से 31 मई के बीच के समय की पुलिस थाने की सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है, और कथित यातना में शामिल पुलिस अधिकारी नीतीश कुमार मिश्रा और अन्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
पीटीआई से बात करते हुए दक्षिणी रेंज के आईजी नीति शेखर ने कहा, 'शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. अगर यह पाया जाता है कि हिरासत में उस व्यक्ति के साथ मारपीट की गई थी, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.'
उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में शारीरिक यातना देने का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. आईजी ने कहा, 'अगर आरोप सच साबित होते हैं, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.'
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि साहू को कथित तौर पर एक पुलिस टीम पर हमला करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. यह टीम इलाके में एक पत्थर की खदान पर छापा मारने गई थी.
एक महीने में यह ऐसी तीसरी घटना
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, पिछले एक महीने में ओडिशा पुलिस के खिलाफ यह तीसरा ऐसा आरोप है.
इस तरह की पहली घटना 25 मई को केंद्रपाड़ा जिले के तलाचुआ मरीन पुलिस थाने में सामने आई थी. वहां एक महिला ने आरोप लगाया था कि हिरासत में पुलिसकर्मियों ने उसके और उसके बेटे के साथ मारपीट की. ओडिशा पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि संबंधित इंस्पेक्टर-इन-चार्ज को निलंबित कर दिया गया है.
दूसरी कथित घटना 24 मई को कटक जिले के बारांग पुलिस थाने में हुई थी, जब पुलिस वालों ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को बुरी तरह पीटा था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है.
चांदी प्रसाद गांव वालों द्वारा चार दिनों तक चले ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन के बाद उनके पद से हटा दिया गया.
पुलिस ने बताया कि बारांग पुलिस थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज का तबादला कर दिया गया है, जबकि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है.
विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल ने एक बयान में आरोप लगाया कि इस साल 15 मार्च तक, 2025-26 के दौरान राज्य में हिरासत में कम से कम नौ लोगों की मौतें हुई हैं.

