नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (31 जुलाई) को पहली बार युवाओं के उस आंदोलन का खुलकर जिक्र किया, जिसके चलते दिल्ली में कई वर्षों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ और जनता के दबाव में उनके मंत्रिमंडल से शिक्षा मंत्री का पहला इस्तीफ़ा सामने आया.
देर रात जारी एक इंस्टाग्राम वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा अपशब्दों के इस्तेमाल पर 'हैरानी' जताई और कहा कि वह ऐसे 'गुमराह बच्चों' को माफ़ करना चाहते हैं.
हालांकि, उन्होंने 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार के नियंत्रण वाले सुरक्षाबलों द्वारा किए गए बल प्रयो, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप भी शामिल हैं, का कोई ज़िक्र नहीं किया. यह वही मुद्दा है, जिस पर संसद में दस दिनों से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है.
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज उन मामलों का भी उल्लेख नहीं किया, जिन्हें अलग-अलग पुलिस बल वापस लेने की प्रक्रिया में हैं.
20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के बाद अपना
इसके बाद प्रधानमंत्री अपनी मुख्य बात पर आए. उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर पर जो हुआ देश और दुनिया ने देखा. कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी और अपशब्दों वाली भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसे शब्द जो किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं. मुझे व्यक्तिगत रूप से अपशब्द कहे गए, और मेरी स्वर्गीय मां को भी गाली दी गई.'
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का सदमा लगा कि महिला प्रदर्शनकारियों ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया.
पीएम मोदी ने कहा, 'बचपन में गलतियां होती हैं, बचपन गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता, यही तो बचपना है. मैं समाज के अंदर मौजूद आक्रोश को भली-भांति समझ सकता हूं. यह एक कल्चरल शॉक जैसा है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं. मैं उन बच्चों को माफ़ करना चाहता हूं.'
उन्होंने आगे कहा, 'समय आ गया है कि हम इन बच्चों को अपनाएं और उन्हें सही रास्ता दिखाएं. वे रास्ता भटक गए हैं, और उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है. उन्हें सज़ा देना, अदालती कार्यवाही में उलझाना और समाज में परेशान करना, इनमें से किसी से भी स्थिति नहीं बदलेगी. मैं उन्हें माफ़ करना चाहता हूं. समाज को भी इसे स्वीकार करना चाहिए. मेरे दिल में बस एक ही भावना है.'
लगभग तीन मिनट के अपने वीडियो में प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि ऐसे युवाओं को अपनी 'गलतियों' से सीखना चाहिए.
उन्होंने कहा, 'ये बच्चे भी हमारे ही हैं. उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है. जो भटक गए हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाना मुश्किल है, लेकिन यह एक ऐसा काम है जो हमें करना ही होगा. मैं इन बच्चों से कहता हूं, आइए देश के लिए हम सब मिलकर आगे बढ़ें. आइए कुछ नया सीखें और अपनी गलतियों से भी सीखें.'
कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा अपशब्दों के इस्तेमाल पर मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब नोएडा पुलिस ने एक 25 वर्षीय महिला के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. उन पर प्रधानमंत्री के खिलाफ़ 'अपमानजनक और आपत्तिजनक' भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है.
चूंकि यह घटना दिल्ली के क्षेत्र में हुई थी, इसलिए नोएडा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद आगे की जांच के लिए मामला दिल्ली पुलिस (संसद मार्ग थाना) को ट्रांसफर कर दिया है.
आरोपी प्रदर्शनकारी महिला के खिलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो शांति भंग करने के इरादे से किए गए अपमान, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयानों और मानहानि से संबंधित हैं.
इस बीच, आरोपी लड़की ने एक नया वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी मांगी है और दावा किया है कि वह 25 नहीं, केवल 15 वर्ष की है.
कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो संदेश में लड़की ने कहा, 'मैं विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के प्रभाव में आ गई थी और मैंने प्रधानमंत्री के खिलाफ़ कई गंदी बातें कहीं. मैं पूरे देश से माफ़ी मांगती हूं. मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैं खुद को देख भी नहीं पा रही हूं. कृपया मुझे माफ़ कर दें.'
वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर इस घटना को अपनी 'पहली और आख़िरी गलती' बताया.
वहीं, यह भी खबर सामने आ रही है कि दिल्ली पुलिस ने भी प्रधानमंत्री को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्टों के संबंध में मामले दर्ज किए हैं.
उलेलखनीय है कि द हिंदू की सुरुचि कुमारी ने शुक्रवार (31 जुलाई) सुबह प्रकाशित हुई अपनी रिपोर्ट में बताया था सोशल मीडिया यूज़र्स ने जंतर-मंतर गई कुछ महिला प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक (डॉक्स) कर दी है और उन्हें बलात्कार की धमकियां दी गईं. इन धमकियों के पीछे यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने मोदी को 'गाली दी' या सेना का 'अपमान किया'.
हालांकि, पीएम मोदी के भाषण में इस घटना का कोई ज़िक्र नहीं था. उन्होंने उस पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख नहीं किया, जिसमें 20 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया था.
मालूम हो कि रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पंप-एक्शन शॉटगन से छर्रे दागे जाने की बात सामने आई है. मानवाधिकार कार्यकर्ता इस तरीके की कार्रवाई की आलोचना करते हैं, क्योंकि इसमें अंधाधुंध तरीके से छर्रे चलाए जाते हैं. इसी घटना में एक 19 वर्षीय युवक की दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई थी.
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जिनके मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फोर्स के माध्यम से) काम करती हैं, दोनों ही संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान सदन से अनुपस्थित रहे हैं, जबकि विपक्षी सांसद लगातार गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित करते रहे हैं.
भाजपा नेताओं और आईटी सेल पर कार्रवाई कब: दिपके
वहीं, शुक्रवार देर रात पीएम मोदी के वीडियो जारी होने से कुछ घंटे पहले 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रमुख
उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा, 'अगर आप गाली देने पर केस कर रहे हो तो भाजपा के आईटी सेल पर केस कब दर्ज हो रहा है, जो इतने सालों से लड़कियों को गंदी-गंदी गालियां दे रहे हैं, क्या-क्या शब्द इस्तेमाल नहीं किए लड़कियों के लिए. कहीं से भी लड़कियों के ये इज्जत नहीं कर रहे थे. ये लोग अपने बायो में गर्व से लिख रहे थे मोदी जी द्वारा फॉलो किए गए. ऐसे लोगों ने लड़कियों को गंदी-गंदी गालियां दी, तो इन सब पर केस कब होंगे.'
अभिजीत दिपके ने आगे कहा, 'बात सिर्फ भाजपा आईटी सेल तक सीमित नहीं है, इनके सांसद रहे रमेश बिधूड़ी ने अपने साथी सांसद के लिए किन शब्दों का इस्तेमाल किया था, सबको याद है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कैमरापर्सन को गालियां दी थीं. तो क्या इस देश में दो कानून चल रहे है? युवाओं के लिए अलग और भाजपा और उनके नेताओं के लिए अलग कानून है.'
अभिजीत ने आगे कहा, 'गाली देना कोई अपराध नहीं है. अगर कोई गाली दे रहा तो वह बुरा हो सकता है, वह बुरी बात हो सकती है तो उसको आप समझाएं कि गाली मत दो. लेकिन यह केस किस बात पर किया जा रहा है. अगर गाली देने पर केस दर्ज करना पड़े तो सबसे अधिक केस भाजपा आईटी सेल मेंबर पर होंगे क्योंकि औरतों को सबसे ज्यादा गंदी-गंदी गालियों उन्होंने ही दी है. और भाजपा नेताओं पर होगी, जिन्होंने सदन के अंदर भी गालियां दी हैं.'
इससे पहले एक मीडिया चैनल से बात करते हुए अभिजीत दिपके ने सरकार को चेतावनी भी दी कि सरकार को गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि एक मंत्री के इस्तीफे पर युवाओं को गुस्सा शांत हो गया है.
उन्होंने कहा, 'इस भ्रम में सरकार को नहीं रहना चाहिए. लोगों में बहुत गुस्सा है और वह गुस्सा केवल एक मंत्री के खिलाफ नहीं है बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ है. अगर ये लोग नहीं सुधरेंगे और छात्रों को परेशान 'करते रहेंगे तो हम फिर सड़कों पर उतरेंगे. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं रहेगा.
गौरतलब है कि शुक्रवार को पीएम मोदी द्वारा इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया वीडियो देर रात 11:06 बजे उनके एक्स अकाउंट पर साझा किया गया. उनके अब तक के पांच स्वयं रिकॉर्ड किए गए वीडियो में से चार देर रात ही जारी किए गए हैं.
गौरतलब है कि उनका पहला वीडियो 23 जुलाई को आया था. यह वीडियो पिछले तीन वर्षों में नीट-यूजी के दो पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग के साथ संसद मार्च के तीन दिन बाद जारी किया गया था.
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अगले ही दिन अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था. जबकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ दर्ज मामले वापस लेने और मई 2026 के पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर सहमति जताई थी, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया था.
विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा
युवाओं को माफ करने वाली पीएम की देर रात जारी वीडियो पर विपक्षी पार्टियों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं, जहां विपक्ष ने सरकार को घेरा है.
पीएम के इस वीडियो पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए एक्स पर लिखा, 'लो कर लो बात. देश इनसे माफ़ी मांगने को कह रहा है, इन्होंने देश को माफ़ कर दिया.'
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, 'मैं मोदी सर से सहमत हूं, गाली-गलौज नहीं करनी चाहिए. लेकिन ये ज्ञान प्राप्त करने में आपको बहुत समय लग गया प्रभु, आपके लोगों ने तो किसी की मां, बहन, बेटी किसी को नहीं बख़्शा सबको भद्दी-भद्दी गालियां दीं. प्रभु मुझे तो आपने अपने लोगों से लाखों गालियां दिलवाईं, ख़ूब अपमानित करवाया.'

