नई दिल्ली: तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) यूथ विंग के प्रमुख उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार (4 अगस्त) को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था. मद्रास हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत के लिए दायर एक याचिका पर दोपहर को सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि पूछताछ के बाद उदयनिधि को आज ही थाने से जमानत (स्टेशन बेल) पर रिहा किया जाए.
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि तंजावुर ले जाए जा रहे विपक्ष के नेता जांच में सहयोग करें और जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर पूछताछ के लिए उपस्थित हों.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरफ़्तारी सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के एक पदाधिकारी की शिकायत के आधार पर की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उदयनिधि ने एक दिन पहले तंजावुर में आयोजित जनसभा के दौरान महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी.
शिकायत में यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने भाषण के दौरान एक महिला की ओर इशारा करते हुए अश्लील और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणियां कीं, जिसे लेकर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है.
शिकायत के आधार पर तंजावुर ईस्ट पुलिस ने उदयनिधि के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता ( बीएनएस) की धारा 196, 192, 352, 79, 296(b), 61, 351(2), और तमिलनाडु महिलाओं के उत्पीड़न निषेध अधिनियम (टीएनपीएचडब्लू एक्ट) की धारा 4 व आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार सुबह पूर्वी तंजावुर पुलिस की एक टीम, जिसे ग्रेटर चेन्नई पुलिस का सहयोग प्राप्त था, उदयनिधि को गिरफ़्तार करने के लिए चेन्नई के नीलांगराई स्थित उनके आवास पर पहुंची. इसके बाद वहां तनावपूर्ण स्थिति बन गई. बड़ी संख्या में द्रमुक के कार्यकर्ता उनके घर के बाहर एकत्र हो गए और पुलिस के साथ तीखी बहस देखने को मिली. इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम और उदयनिधि की पत्नी कृतिका उदयनिधि भी पुलिस अधिकारियों से बहस करते हुए दिखाई दिए.
उधर, उदयनिधि की कथित टिप्पणी को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी.
भाजपा छोड़ चुके अन्नामलाई ने कहा, 'जब मैं कल वैगई नदी की सफाई कर रहा था, तो मैंने सोचा, क्या इससे भी ज़्यादा गंदगी हो सकती है? फिर मैंने उदयनिधि स्टालिन का भाषण सुना.'
तमिलनाडु भाजपा की उपाध्यक्ष खुशबू सुंदर ने कहा, 'मैंने उदयनिधि स्टालिन का भाषण सुना. यह बेहद घटिया और अपमानजनक था. इससे वही राजनीतिक सोच झलकती है, जिसे वह आगे बढ़ाना चाहते हैं. अगर ऐसी सोच रखने वाले लोग किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व करना चाहते हैं और एक दिन राज्य चलाना चाहते हैं, तो भगवान ही बचाए.'

