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आखिर कैसे हुई भगवान जगन्नाथ की सुप्रीम जीत

आखिर कैसे हुई भगवान जगन्नाथ की सुप्रीम जीत

THEATINEWS 6 years ago

कोरोना महामारी ने विश्व के समस्त क्रियाकलाप पर विराम लगा दिया है। धार्मिक आर्थिक सामाजिक आज सभी प्रकार की गतिविधियों पर मानव समाज मजबूर होकर रोक लगाने को विवश हो गया है। इसी बीच 18 जून को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ पुरी के वार्षिक उत्सव रथ यात्रा पर एक याचिका के सुनवाई के दौरान रोक लगा दिया था, जिसकी सुनवाई कल हुई।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय खंडपीठ में पुरी रथयात्रा को लेकर सुनवाई की। तीन सदस्यीय खंडपीठ में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल थे। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने सशर्त छूट देते हुए वार्षिक उत्सव रथ यात्रा को प्रारंभ करने का आदेश दिया और कहा कि यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं एवं व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान दिया जाए।

 

क्यों प्रसिद्ध है जगन्नाथ पुरी मंदिर ?

 

○कलिंग वास्तुकला में स्थापित यह मंदिर हिंदू धर्म का प्रमुख मंदिर है। इसकी स्थापना राजा अनंतवर्मन चो ड गांग देव ने कराया था। जगन्नाथ का शाब्दिक अर्थ जगत के स्वामी से है अर्थात यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। भगवान श्री कृष्ण के अलावा इस मंदिर में बलराम और सुभद्रा की मूर्ति भी स्थापित है। यह मंदिर उड़ीसा के पुरी जिले में स्थित है और हिंदू धर्म के चार धाम यात्रा में प्रमुख स्थान रखता है.

 

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आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में स्थापित किए थे मठ, जानें- कहां स्थित हैं ये चार मठ आदि गुरु शंकराचार्य को अद्वैत परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है। सनातन धर्म में मठ परंपरा को लाने का श्रेय आदि शंकराचार्य को जाता है। आदि शंकराचार्य नें चरों दिशाओं में अलग-अलग चार मठ की स्थापना की थी। ये चारों मठ आज भी चार शंकराचार्यों के नेतृत्व में सनातन परम्परा का प्रचार व प्रसार कर रहे हैं। इस मंदिर का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य से भी जुड़ा हुआ है।

 

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सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में आदि गुरु शंकराचार्य का विशेष योगदान है। चारों मठों की स्थापना ईसा पूर्व आठवीं शताब्दी में की गई थी। पूर्व दिशा में गोवर्धन, जगन्नाथपुरी (ओड़िशा), पश्चिम दिशा में शारदामठ (गुजरात), उत्तर दिशा में ज्योतिर्मठ, बद्रीधाम (उत्तराखंड) और दक्षिण दिशा में शृंगेरी मठ, रामेश्वरम (तमिलनाडु) में स्थापित हैं।

 

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