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जानिए कहां छिपा  है अरबों  के खजाने का राज जहां मौजूद है 30 टन सोना

जानिए कहां छिपा  है अरबों  के खजाने का राज जहां मौजूद है 30 टन सोना

Veer Bahadur Singh | 30-07-2020

खजाने की खबर सुनकर आपको भी आश्चर्य हो रहा होगा कि क्या यह सत्य है कोई अफवाह है. इस वक्त तस्वीरों को देखर आपके मन में कई तरह के सवाल उठ रहे होंगे. ऐसे में पूरी वीडियो देखने पर आपके सारे सवालों के जवाब  खुद बखुद मिल जाएंगे कि आखिर कहां छिपा है खजाने का राज ? 

वीडियो में देखें कहा छिपा है खजाना 

हम बात कर रहे हैं " नाजी कमांडर की डायरी " की बता दें कि  द्वितीय विश्व युद्ध (WW2) के दौरान  हिटलर की नाजी सेना ने बहुत लूटपाट मचाई थी. नाजी सेना ने बहुत सारे खजानों को लूटा था . जर्मनी की सेना की ओर से लूटे गए खजानों का पता अब एक नाजी कमांडर की डायरी से चला है. इन खजानों में करीब 30 टन यानी 30 हजार किलोग्राम सोना, महंगी पेंटिंग्स, अमूल्य कलाकृतियां आदि शामिल हैं. इस खजाने की जानकारी डायरी में लिखी गयी है. जिसमें बताया गया है कि ये खजाने 11 अलग-अलग जगहों पर रखे हुए हैं. 

आपको बता दें कि यह खजाना 75 साल पहले नाजी कमांडर हेनरिच हिमलर ने ये अलग-अलग जगहों पर छिपाया था. वहीं, अब उसकी ही डायरी से इन जगहों की जानकारी मिली है. जहां - जहां पर उसने खजानें छिपा रखे हैं. इस बारे में पोलैंड की न्यूज वेबसाइट द फर्स्ट न्यूज ने खबरें प्रकाशित की थी. इस डायरी में 11 जगह खजाने छिपे होने की बात की गयी है . इसमें से एक लोकेशन पोलैंड का रोजटोका पैलेस (Roztoka Palace) बताया जा रहा है. इस पैलेस को 16वीं सदी में बनाया गया था. इसमें एक 200 फीट गहरा कुआं है. जिसमें 30 टन यानी 30 हजार किलोग्राम सोना होने की बात कही गई है . 

बताया जाता है कि ये सोना पोलैंड के एक कस्बे ब्रेसलाउ (अब रोक्लॉ) से लाया गया था । इतने सोने की अगर आज के दौर में कीमत देखें तो ये करीब 14 लाख करोड़ के आसपास होगी । वहीं, द्वितीय विश्वयुद्ध के कई दशक बीत जाने के बाद भी इस डायरी का जिक्र नहीं किया गया. इसे सीक्रेट बनाकर रखा गया था ।  साथ ही इसे जर्मनी के क्वेडलिनबर्ग कस्बे में छिपाया गया था। इसे एक मैसोनिक लॉज के प्रबंधन को संभालकर रखने के लिए कहा गया था. जानकारी के लिए बता दें कि मैसोनिक लॉज यहां पर 1000 साल से है.

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी कमांडर हिमलर यहां आता रहता था. उसी ने  इस डायरी जो यहां छिपाया था. लेकिन 2019 में लॉज ने ये डायरी पोलिश फाउंडेशन सिलेसियान ब्रिज को  दी। सिलेसियान ब्रिज के प्रतिनिधि रोमन फर्मानिक ने पिछले साल मार्च में घोषणा की थी कि उसे अपने जर्मन पार्टनर से युद्ध की माफी के तौर पर एक डायरी मिली है। जिसमें कई खजानों का जिक्र किया गया है इसमें उस जगह का नक्शा भी है, जहां रोजटोका पैलेस में सोना छिपाया गया है । रोजटोका पैलेस लोअर सिलेसिया इलाके में है । इस इलाके में पोलैंड के सैनिकों ने जर्मनी के नाजी जवानों के होश उड़ा दिए थे । लेकिन ज्यादा देर तक रोक नहीं पाए, यहां जर्मनी की सेना ने काफी लूटपाट मचाई थी।

जर्मनी की नाजी सेना ने पुरानी कलाकृतियां, ज्वेलरी, सोना-जवाहरात आदि को लोअर सिलेसिया की गुफाओं, कुओं और सुरंगों में छिपाया था । इसके अलावा किलों और महलों में खजानें को  छिपा दिया  था। जर्मनी की सेना ने यहूदियों, संग्रहालयों और निजी कलेक्टर्स से करीब 50 लाख यूरोपियन आर्टवर्क लूटे थे। अब ये अलग-अलग जगहों पर समय-समय पर मिलते रहते हैं। वहीं, आज भी पोलिश यहूदियों के 63 हजार आर्टवर्क लापता हैं।

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