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ट्रेन से दिल्ली से द्वारका कैसे पहुंचें? द्वारकाधीश मंदिर यात्रा की पूरी जानकारी

ट्रेन से दिल्ली से द्वारका कैसे पहुंचें? द्वारकाधीश मंदिर यात्रा की पूरी जानकारी

Travel Junoon 1 month ago

Delhi to Dwarkadhish Temple by Train: द्वारकाधीश मंदिर, जिसे 'जगत मंदिर' भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और यह गोमती नदी के तट पर स्थित है.

दिल्ली से द्वारका की दूरी ट्रेन के माध्यम से लगभग 1425 कि.मी. है, जिसे पूरा करने में लगभग 21 से 22 घंटे का समय लगता है. दोस्तों आज के आर्टिकल में हम आपको बताएंगे दिल्ली से द्वारकाधीश ट्रेन के माध्यम से कैसे पहुंचे.

प्रमुख ट्रेनें

दिल्ली से द्वारकाधीश जाने के लिए कई ट्रेन ऑप्शन उपलब्ध हैं.

उत्तरांचल एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 19566): यह दिल्ली से द्वारका रेलवे स्टेशन तक जाने वाली एकमात्र सीधी ट्रेन है.

समय: यह नई दिल्ली से दोपहर 1:25 बजे, सराय रोहिला से 1:46 बजे और दिल्ली कैंट से 2:05 बजे चलती है.

पहुंचने का समय: अगले दिन दोपहर 12:21 बजे द्वारका पहुंचती है.

दिन: यह केवल रविवार को चलती है.

.टिकट और किराया

विभिन्न श्रेणियों के लिए अनुमानित किराया (उत्तरांचल एक्सप्रेस के अनुसार) इस प्रकार है.

स्लीपर: ₹575

थर्ड इकोनॉमी/AC: ₹1445 - ₹1545

सेकंड AC: ₹2235

जनरल: लगभग ₹280

जामनगर से मंदिर की दूरी लगभग 135 कि.मी. और पोरबंदर से लगभग 125 कि.मी. है.

इन दोनों स्टेशनों से मंदिर तक पहुँचने के लिए स्थानीय परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं.

Table of Contents

यदि सीधी ट्रेन उपलब्ध न हो, तो आप जामनगर (मंदिर से 135 कि.मी.) या पोरबंदर (मंदिर से 125 कि.मी.) के लिए ट्रेन ले सकते हैं, यहां से टैक्सी या लोकल बस द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है. श्री माता वैष्णो देवी कटरा जामनगर एक्सप्रेस (12478): यह रविवार को नई दिल्ली से रात 9:40 बजे चलती है और अगले दिन शाम 6:45 बजे जामनगर पहुंचती है.

पोरबंदर एक्सप्रेस (19270): यह सोमवार और मंगलवार को पुरानी दिल्ली (दोपहर 1:05), सराय रोहिला (1:21) और दिल्ली कैंट (1:40) से चलती है. यह जामनगर और पोरबंदर दोनों स्टेशनों पर रुकती है.दिल्ली पोरबंदर एक्सप्रेस (20938): यह सोमवार और बृहस्पतिवार को सराय रोहिला (सुबह 8:10), दिल्ली कैंट (8:27) और पालम (8:35) से चलती है. यह अगले दिन सुबह 5:35 बजे जामनगर और 8:25 बजे पोरबंदर पहुंचती है.

इतिहास और मान्यता: यह मंदिर लगभग 2200 से 2500 साल पुराना माना जाता है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़पोते ब्रजनाभ ने करवाया था. यह चारधाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

प्रवेश द्वार: मंदिर के दो द्वार हैं: उत्तर की ओर मोक्ष द्वार और दक्षिण की ओर स्वर्ग द्वार

स्वर्ग द्वार के बाहर 56 सीढ़ियां हैं जो गोमती नदी तक जाती हैं

दर्शन का समय: मंदिर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है.

परंपराएं: यहां चावल दान करने की परंपरा है और मंदिर के शिखर पर दिन में पांच बार ध्वजा फहराई जाती है.

द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है.

यह मंदिर गुजरात के द्वारका में गोमती नदी के तट पर स्थित है और इसे भगवान कृष्ण की राजधानी माना जाता है.

मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 2200 से 2500 साल पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़पोते ब्रजनाभ ने करवाया था.

यह मंदिर हिंदुओं की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (रामेश्वरम, बद्रीनाथ, द्वारकाधीश और जगन्नाथ पुरी) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है

प्रवेश द्वार: मंदिर में दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं. उत्तर की ओर वाले द्वार को मोक्ष द्वार और दक्षिण की ओर वाले द्वार को स्वर्ग द्वार कहा जाता है.

स्वर्ग द्वार के बाहर 56 सीढ़ियां हैं जो गोमती नदी की ओर ले जाती हैं.

दर्शन का समय: मंदिर भक्तों के लिए सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम को 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है.

परंपराएं: यहां चावल दान करने की विशेष परंपरा है, जिससे गरीबी मिटने की मान्यता है.

साथ ही, यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां दिन में पांच बार ध्वजा फहराई जाती है.

द्वारकाधीश मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 6:30 से 8:00 बजे या शाम 5:00 से 7:00 बजे माना जाता है। इस समय भीड़ अपेक्षाकृत कम रहती है और दर्शन आराम से हो जाते हैं। कई स्रोतों के अनुसार मंदिर में सामान्य दर्शन का समय लगभग सुबह 6:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और फिर शाम 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक रहता है।

अगर आप आरती देखना चाहते हैं, तो आम तौर पर मंगला आरती सुबह 6:30 बजे, श्रृंगार आरती करीब 10:30 बजे, संध्या आरती करीब 7:30 बजे, और शयन आरती करीब 8:30 बजे बताई जाती है।

मौसम के हिसाब से अक्टूबर से मार्च के बीच जाना सबसे आरामदायक रहता है, क्योंकि गर्मी कम होती है। गर्मियों में दोपहर के समय जाने से बचना बेहतर है। गुजरात पर्यटन के अनुसार आसपास के आकर्षण और मंदिर क्षेत्र में दिन के समय आवाजाही आसान रहती है

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