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कांग्रेस की अंतर्कलह फिर आई सामने, निकाय चुनाव को लेकर पायलट और गहलोत हुए आमने-सामने

राजस्थान में एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी की अंतर्कलह खुलकर सामने आ गयी है. हालात ये है कि अब कांग्रेस पार्टी के राजस्थान के अध्यक्ष और पीसीसी चीफ और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के विरोध में ही कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता गहलोत गुट माने जाने वाले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि एक दो लोगों के विरोध करने से क्या होता है?

मुख्ययमंत्री अशोक गहलोत अपने निर्णय से पलटे

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2010 में कांग्रेस सरकार के दौरान निकाय चुनाव के मेयर का चुनाव डायरेक्ट पद्ति से करवाया था. लेकिन इस बार सत्ता में आते ही अपने निर्णय से वह पलट गए. गहलोत अपने खास यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के जरिए एक नया फरमान ले आए हैं. उन्होंने अपने पूर्व के फैसले को पलटते हुए घोषणा की है कि निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष रुप से होंगे. उसके बाद महज एक हफ्ते के भीतर गहलोत ब्रिगेड के खासमखास यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने जयपुर ,कोटा, जोधपुर मे दो नगर निगम दो मेयर का निर्णय ले लिया.

गहलोत और पायलट आमने-सामने

जहां इस निर्णय के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा ये निर्णय स्वागत योग्य है, तो वहीं दूसरी ओर अब सचिन पायलट ने इस निर्णय को व्यवाहारिक नहीं बताया है. पायलट ने कहा कि हाइब्रिड मेयर सभापति चुनने की केबिनेट में चर्चा नहीं हुुई है. हमने पहले से अध्यक्ष चुनने की बात कही थी. लेकिन उसको बाद में बदल दिया गया. वहां तक में ठीक लेकिन हाइब्रिड नाम दिया जा रहा है. मैं समझता हूं कि यह निर्णय सहीं नहीं है. मैं तो महारष्ट्र चुनाव में था हमें तो जानकारी मिली जो पार्षद चुनाव नहीं लड़ा वो भी मेयर बन सकता है. वो गलत निर्णय है.

पायलट यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि इस निर्णय की कोई चर्चा हमारी कैबिनेट में नहीं हुई है. मंत्री महोदय नगरपालिका एक्ट के तहत निर्णय लेना चाहते हैं तो वो गलत हैं. राजनीतिक दृष्टिकोण से सहीं नहीं हैं. मुझे नहीं लगता है हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में ऐसा होता है. इस निर्णय में बदलाव जरूरी है. इस निर्णय से लोकतंत्र कमजोर होगा.

राजस्थान के राज्यपाल भी बोले गहलोत-पायलट विवाद पर

राजस्थान के नवनियुक्त राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचिन पायलट विवाद पर कहा कि ये उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है. लेकिन अगर लोकहित में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य नेताओं से बात करनी होगी तो कंरूगा.

क्यों लिया गया ऐसा निर्णय

सूत्रों की माने तो राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कांग्रेस पार्टी की अंदर की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि अगर प्रत्यक्ष रूप से चुनाव होता है तो हाल ही मोदी सरकार द्वारा आर्टिकल 370 का प्रभाव रहेगा. साथ ही अब फिर से जयपुर सहित 3 नगरनिगम दो मेयर के नाम पर 6 माह तक चुनाव नहीं होने का फैसले को लोग राममंदिर जन्मभूमि भूमि विवाद से जोड़कर देख रहे है.

सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी को लगता है अगर राममंदिर जन्मभूमि जमीन का फैसला दीपावली के आस-पास आता है तो सभी निकायों में कांग्रेस पार्टी की करारी हार होगी. वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जरूर बार-बार निर्णय बदलकर इसको मास्टर स्ट्रोक मान रहे हों लेकिन सचिन पायलट के बयान ने मुख्यमंत्री की मुश्किलें बड़ा दी हैं.

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