Wednesday, 08 Jul, 4.04 am TV9 भारतवर्ष

कंट्री न्यूज
पीएम मोदी को फिर मिला शरद पवार का साथ, लद्दाख दौरे पर NCP नेता ने किया समर्थन

पूर्वी लद्दाख के जिन इलाकों पर भारत और चीन के बीच मतभेद चल रहा था, वहां से दोनों देशों के सेना को पीछे हटाने के एक दिन बाद ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि यह डिप्लोमेटिक चैनल के जरिए संभव है कि चीन अपनी सेना को पीछे बुला रहा है और ये अच्छा भी है.

पवार ने सरकार द्वारा चीन के साथ बॉर्डर मसले को सुलझाने के लिए किए गए प्रयासो को समर्थन दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लद्दाख जाने के कदम की भी सराहना की. पवार ने कहा कि देश के नेतृत्व को सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसे कदम उठाते रहना चाहिए. NCP नेता ने कहा कि ये फायदेमंद है कि सीमा से जुड़े मसले डिप्लोमेटिक चैनल के जरिए सुलझाए जाएं और भारत चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाले.

नेहरू और चव्हाण भी गए थे सीमा क्षेत्र में

पवार ने कहा, 1962 में जब हम युद्ध हार गए थे तब जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री यशवंतराव चव्हाण भी सीमा क्षेत्र में गए थे. उन्होंने आगे कहा, 'चव्हाण साहब वहां गए और उन्होंने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया और ठीक ऐसा ही मौजूदा प्रधानमंत्री ने इसबार किया. जब कभी भी ऐसी स्थिति आती है तब देश के नेतृत्व को ऐसे कदम उठाने चाहिए, ताकि सैनिकों का मनोबल बढ़ाया जा सके.'

एक तरफ जहां पवार सरकार के कदम का समर्थन कर रहे हैं, वहीं उनके सहयोगी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पूर्वी लद्दाख में चीन के कदमों को लेकर सरकार पर हमलावर हैं. हालांकि पवार पहले ही इस मामले पर अपनी स्थिति साफ कर चुके हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और इसी के साथ उन्होंने कहा था कि 1962 में जब चीन ने 45,000 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र को हड़प लिया था उसे भी भूला नहीं जा सकता है.

उन्होंने पुणें में मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच समझौते हैं और हाल ही में हुई मुठभेड़ के दौरान भी किसी पक्ष की ओर से गोलीबारी नहीं की गई. उन्होंने सर्वदलीय बैठक का भी जिक्र करते हुए कहा, ' प्रधानमंत्री के साथ सर्वदलीय बैठक के दौरान भी मैंने वर्तमान मुद्दे को लेकर कहा था कि इसे राजनयिक बातचीत के जरिए सुलझाए जाने की आवश्यकता है और हमें चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना चाहिए.'

जब पवार रक्षा मंत्री थे, तब हुआ था चीन से समझौता

पवार ने कहा कि जब मामले को बिना हथियारों के इस्तेमाल के डिप्लोमेटिक चैनल के जरिए सुलझाया जा सकता है और हम चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना सकते हैं तो ये फायदेमंद है. अब दिख रहा है कि डिप्लोमेटिक बातचीत के बाद वो अपने सैनिकों को हटा रहा है तो ये अच्छा ही है. पवार ने बताया कि जब वह 1993 में रक्षा मंत्री थे तब वह चीन गए थे और एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके बाद दोनों पक्षों के सैनिक पीछे हटे थे.

उन्होंने बताया कि तब यह तय हुआ कि अगर कभी किसी मुद्दे पर दोनों देशों की राय अलग-अलग हो तब भी कोई हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा. पीएम मोदी के लद्दाख दौरे से संबंधित सवाल पर पवार ने कहा कि चीन ने 1962 में भारत को हराया था, लेकिन तब भी तत्कालीन प्रधानमंत्री वहां सैनिकों का मनोबल बढ़ाने गए थे.

Dailyhunt
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Dailyhunt. Publisher: TV9 Bharatvarsh
Top