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'देख सपाई, बिटिया घबराई', UP विधानसभा के विशेष सत्र से पहले CM योगी का तंज

'देख सपाई, बिटिया घबराई', UP विधानसभा के विशेष सत्र से पहले CM योगी का तंज

TV9 UP 1 week ago

त्तर प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आज गुरुवार यानी 30 अप्रैल को बुलाया गया. इस विशेष सत्र का मुख्य फोकस महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के मुद्दे पर होगा. बीजेपी पूरी कोशिश करेगी कि कांग्रेस और सपा को महिला आरक्षण के मुद्दे पर घेरा जाए.

यही वजह लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से संबंधित संशोधन विधेयक के पारित न होने और विपक्ष के रवैये के खिलाफ योगी सरकार निंदा प्रस्ताव लाने जा रही है.

सीएम योगी ने सपा-कांग्रेस पर बोला हमला

विधानसभा का विशेष सत्र शुरू होने से पहले सीएम योगी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने सपा और कांग्रेस को महिला विरोधी पार्टी करार दिया है. सीएम योगी ने कहा कि ‘ हमें यह देखकर आश्चर्य होता है कि ये लोग गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं. समाजवादी पार्टी जन्मजात महिला विरोधी है. इनके फितरत में नारी का अपमान है. जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी तब उनके समय महिलाओं के खिलाफ बर्बर घटनाएं सबके सामने जगजाहिर हैं.

सीएम योगी ने कहा कि ‘समाजवादी पार्टी जब सत्ता में थी तो लोग कहने लगे थे कि ‘देख सपाई,बिटिया घबराई’. इनके पास अपनी महिला विरोधी छवि से छुटकारा पाने का अवसर था. लेकिन इन्होंने उसे भी जाने दिया. कांग्रेस, सपा और इंडी गंठबंधन ने कोशिश की कि किसी भी स्थिति में यह अधिनियम लागू ना होने पाए. इन्होंने वे सारे प्रयास किए जिससे देश में अव्यवस्था हो. इसी को लेकर हम इन पार्टियों के रवैये के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला रहे हैं.

सुरेश खन्ना पेश करेंगे यह निंदा प्रस्ताव

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना विधानसभा में यह निंदा प्रस्ताव पेश करेंगे. प्रस्ताव के बाद विभिन्न दलों के नेताओं और विधायकों द्वारा विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है. इस दौान महिला सुरक्षा, महिलाओं के अधिकार, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है. विधानमंडल के दोनों सदनों- विधानसभा और विधान परिषद- में गरमागरमी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा, सदन के पटल पर 6 अध्यादेश भी रखे जाएंगे.

विपक्षी सदस्य माफी मांगे, निंदा प्रस्ताव में भागीदार बनें

सीएम योगी ने सपा और कांग्रेस के सदस्यों से कहा कि अगर इनमें नैतिक साहस है तो चर्चा में भाग लें और स्पष्ट बताएं कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया? इस विरोध के पीछे उनकी मंशा क्या थी? मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनके नेताओं ने गलत किया है तो इनका दायित्व है कि वे माफी मांगें या निंदा प्रस्ताव को पारित करवाकर महिला-विरोधी आचरण की निंदा में भागीदार बनें. उन नेताओं की जरूर निंदा की जानी चाहिए, जिन्होंने आधी आबादी को राजनीतिक सशक्तीकरण और आरक्षण के लाभ से वंचित रखा.

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