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पाकिस्तानी गैंगस्टर से लिंक के शक में ATS और STF ने 2 युवकों को किया था अरेस्ट, परिवार बोला- हमारे बच्चे निर्दोष

पाकिस्तानी गैंगस्टर से लिंक के शक में ATS और STF ने 2 युवकों को किया था अरेस्ट, परिवार बोला- हमारे बच्चे निर्दोष

TV9 UP 1 week ago

श्चिमी उत्तर प्रदेश में यूपी एटीएस और एसटीएफ की कार्रवाई के बाद सहारनपुर के सरसावा इलाके के धिक्काकला के दो परिवारों की बकरीद की खुशियां मातम में बदल गईं. शाहरुख और महकाब नाम के दो युवकों पर पाकिस्तान से जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तारी होने के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

हालांकि, दोनों युवकों के परिवारों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निर्दोष बताया है.

परिवार का कहना-बच्चे मजदूरी कर घर चलाते हैं

परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों का किसी भी आतंकी, देश विरोधी या पाकिस्तानी नेटवर्क से कोई लेना-देना नहीं है. गांव वालों के अनुसार दोनों युवक बेहद साधारण परिवारों से आते हैं और मजदूरी कर अपने घर का खर्च चलाते थे. परिजनों के मुताबिक कुछ दिन पहले एटीएस दोनों युवकों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी. कई घंटों तक पूछताछ करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था.

दोनों युवकों को लेकर लखनऊ गई ATS और STF

परिवारों को लगा था कि मामला खत्म हो गया, लेकिन बुधवार को एटीएस और एसटीएफ फिर पहुंची और दोनों युवकों को दोबारा हिरासत में लेकर अपने साथ लखनऊ ले गई. महकाब और शाहरुख के साथ साथ ATS और STF ने मुजफ्फरनगर के युवक गगनदीप और उत्तराखंड के युवक मुशर्रफ को भी हिरासत में लिया और लखनऊ ले गई. इस कार्रवाई के बाद आरोपी युवकों के गांव में बकरीद का माहौल पूरी तरह बदल गया. परिजनों का कहना है कि घरों में त्योहार जैसा माहौल नहीं रहा और कई लोगों ने ठीक से नमाज तक नहीं पढ़ी.

महकाब लुधियाना में वेल्डिंग का करता था काम

महकाब के पिता हसरत ने बताया कि उनका बेटा करीब तीन महीने से पंजाब के लुधियाना में वेल्डिंग का काम कर रहा था. महकाब आठवीं पास है और लगभग 15 हजार रुपये महीने कमाता था. वह तीन भाइयों में तीसरे नंबर का बेटा है. हसरत ने कहा कि उनका बेटा मेहनत मजदूरी करके परिवार की मदद करता था और कुछ समय पहले ही गांव आया था. परिवार के मुताबिक महकाब के पास गांव में लगभग 10 बीघा जमीन है और परिवार खेती-बाड़ी से भी जुड़ा हुआ है.

शाहरुख देहरादून में टाइल-पत्थर करता था काम

हसरत ने भावुक होकर कहा कि ‘पहले पूछताछ के बाद छोड़ दिया था, फिर अचानक दोबारा पकड़ लिया गया. आज बकरीद पर हमारे घर में नमाज तक नहीं पढ़ी गई. सरकार जो चाहे कर ले, लेकिन हमारा लड़का ऐसा नहीं था. वह तो मोबाइल भी ठीक से चलाना नहीं जानता." वहीं शाहरुख के पिता इकराम ने भी बेटे को निर्दोष बताया. उन्होंने कहा कि शाहरुख सिर्फ पांचवीं तक पढ़ा हुआ है और करीब डेढ़ महीने पहले ही देहरादून में टाइल-पत्थर लगाने का काम करने गया था.

इकराम ने कहा कि "हमें नहीं पता कि वह किसके संपर्क में आया. अगर उसे किसी तरह की फंडिंग मिलती या गलत काम से पैसा आता, तो हमारी आर्थिक हालत ठीक होती. पाकिस्तान से हमारा क्या लेना-देना? पाकिस्तान हमें क्या खाने को दे रहा है." उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कई मामलों में एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोग बाद में निर्दोष पाए गए हैं.

एटीएस और एसटीएफ को पाक गैंगेस्टर से कनेक्शन की जानकारी मिली थी

एटीएस और एसटीएफ को जानकारी मिली थी कुछ युवक सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क के संपर्क में आए थे. जांच एजेंसियां कथित तौर पर ऑनलाइन चैट, सोशल मीडिया कनेक्शन, विदेशी नंबरों से संपर्क और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं.

बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे डिजिटल इनपुट मिले थे जिनके आधार पर युवकों से पूछताछ की गई और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया. परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों को सोशल मीडिया की ज्यादा जानकारी तक नहीं थी और वे मजदूरी कर परिवार चलाने वाले सामान्य युवक हैं. ऐसे में पाकिस्तान कनेक्शन और गैंगस्टर नेटवर्क जैसे आरोपों को लेकर गांव के लोग भी हैरानी जता रहे हैं.

लगातार सामने आ रहा शहजाद भट्टी का नाम

शहजाद भट्टी का नाम पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और पाकिस्तान आधारित गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों में सामने आता रहा है. जांच एजेंसियां कई मामलों में उसके कथित ऑनलाइन नेटवर्क और युवाओं से संपर्कों की पड़ताल कर चुकी हैं. माना जाता है कि सोशल मीडिया के जरिए कुछ युवाओं को प्रभावित करने और संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया जाता था.

ग्रामीणों ने कहा- दोनों कभी किसी विवाद में शामिल नहीं रहें

ग्रामीणों के मुताबिक महकाब (22) और शाहरुख (20) दोनों ही बेहद साधारण और मिलनसार स्वभाव के थे. गांव में सभी लोगों से घुलमिलकर रहना उनकी पहचान थी. लोगों का कहना है कि दोनों कभी किसी विवाद में शामिल नहीं रहे हैं. गांव वालों के अनुसार महकाब अक्सर काम से लौटने के बाद लोगों के साथ बैठता था और हंसमुख स्वभाव के कारण सभी में लोकप्रिय था. वहीं शाहरुख भी मेहनत मजदूरी कर परिवार की मदद करता था.

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