मुख्य बिन्दु
- अफ़ग़ानिस्तान में 1.4 करोड़ लोग गम्भीर भूख संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन केवल हर नौ में से एक व्यक्ति को WFP से खाद्य सहायता मिल पा रही है.
- 12 प्रान्तों में बाल कुपोषण रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं.
- धन की कमी के कारण WFP को देश भर में जीवनरक्षक पोषण कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ी है.
- गहराते मानवीय संकट को रोकने के लिए, सर्दियों से पहले एजेंसी को 50 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है.
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने मंगलवार को एक नई चेतावनी में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अब हर तीन में से एक व्यक्ति गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहा है, लेकिन गहराते संकट से निपटने के लिए एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.
देश के 12 प्रान्तों में बाल कुपोषण संकटपूर्ण स्तर पर पहुँच गया है. यह अब तक दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है.
WFP के अनुसार, हिंसक टकराव, व्यापक बेरोज़गारी, बढ़ती खाद्य क़ीमतें, मानवीय सहायता धनराशि की कमी और आपूर्ति मार्गों में व्यवधान से संकट लगातार गहरा रहा है.
जबरन वापसी से बढ़ा दबाव
सितम्बर 2023 से अब तक मुख्य रूप से पाकिस्तान और ईरान से लगभग 60 लाख अफ़ग़ानों की वापसी ने देश की पहले से कमज़ोर अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया है.
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अफ़ग़ानिस्तान में WFP के देश निदेशक जॉन ऐलिफ़ ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 60 लाख अफ़ग़ानों को पड़ोसी देशों से जबरन वापस भेजा गया है.
काबुल से जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि लौटने वाले लोगों के लिए "पर्याप्त रोज़गार उपलब्ध ही नहीं हैं."
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ हिंसक टकराव और मध्य पूर्व संकट के कारण व्यापार व आपूर्ति बाधित हुई है. इससे प्रमुख खाद्य पदार्थों की क़ीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं और ग़रीब परिवारों के लिए भोजन ख़रीदना मुश्किल हो गया है.
सहायता राशि में भारी कटौती के कारण WFP अफ़ग़ानिस्तान में गम्भीर भूख का सामना कर रहे 1.4 करोड़ लोगों में से केवल हर नौ में से एक व्यक्ति को भोजन उपलब्ध करा पाया है. धन की कमी गहराने के साथ ही जीवनरक्षक पोषण कार्यक्रमों में भी कटौती की जा रही है, जबकि सहायता की ज़रूरतें अपने चरम पर हैं.
सबसे अधिक जोखिम में छोटे बच्चे
अफ़ग़ानिस्तान के एक-तिहाई प्रान्तों में बच्चों में क्षय या अत्यधिक दुबलेपन (wasting) यानि कुपोषण का सबसे घातक रूप - अत्यन्त गम्भीर स्तर पर पहुँच गया है.
जॉन ऐलिफ़ ने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य केन्द्रों में लाए जा रहे कुपोषित बच्चों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. सबसे गम्भीर मामलों में 80 प्रतिशत बच्चे दो वर्ष से कम उम्र के हैं. ग़ैर-सरकारी संगठनों के अनुसार, बहुत से बच्चों को इतनी देर से उपचार के लिए लाया जाता है कि उनकी जान बचाना सम्भव नहीं रह जाता.
उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता धनराशि में कमी के कारण गम्भीर कुपोषण से पीड़ित लाखों बच्चों को उस समय बिना मदद लौटाया जा रहा है, जब उनका जीवन ख़तरे में है. इससे ऐसी मौतें हो रही हैं, जिनकी पूरी तरह रोकथाम सम्भव है.
हाल ही में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के कंधार प्रान्त में WFP कर्मचारियों ने तीन बच्चों की माँ फ़रीदा से मुलाक़ात की. उनकी स्थिति देश के अनेक ग़रीब परिवारों की कठिनाइयों को दर्शाती है.
फ़रीदा के बुज़ुर्ग पति सड़क पर सामान बेचकर प्रतिदिन एक डॉलर से भी कम कमाते हैं. इतनी कम आय में परिवार पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएँ और अन्य बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाता.
माँ की मुश्किलें
फ़रीदा के दो बच्चे ख़ून की कमी से पीड़ित हैं. उनका छह वर्षीय बेटा गम्भीर कुपोषण के कारण इतना कमज़ोर है कि कई महीनों से स्कूल नहीं जा सका है.
अफ़ग़ानिस्तान में WFP के देश निदेशक जॉन ऐलिफ़ ने बताया, "जब हम फ़रीदा से बात कर रहे थे, उनका बच्चा भूख से रोने लगा. उन्होंने थैले से बच्चे की बोतल निकाली, लेकिन उसमें दूध के बजाय केवल पतली चाय थी. परिवार के पास दूध ख़रीदने तक के लिए धन नहीं था."
फ़रीदा ने बताया कि उन्हें अक्सर अपने बच्चों से कहना पड़ता है कि घर में खाने के लिए कुछ नहीं है. परिवार केवल चाय और रोटी के सहारे गुज़ारा कर रहा है. उन्होंने कहा कि WFP समर्थित क्लीनिक से मिलने वाली खाद्य सहायता के बिना उनके बच्चों का जीवित रहना मुश्किल होगा.
जॉन ऐलिफ़ ने कहा कि धन की कमी के कारण WFP इस वर्ष गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हर सात महिलाओं और बच्चों में से केवल एक को सहायता दे पा रहा है. बाक़ी छह को बिना किसी मदद के लौटाना पड़ रहा है.
© UNICEFअफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक वर्षीय बच्ची स्वास्थ्य क्लीनिक में अनुवर्ती पोषण जाँच के लिए पहुँची है.WFP, UNICEF के साथ मिलकर देश भर के क्लीनिकों में पाँच वर्ष से कम उम्र के कुपोषित बच्चों और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं का उपचार करता है.
मगर मानवीय सहायता धनराशि में भारी कटौती के कारण एजेंसी अब सबसे अधिक ज़रूरतमन्द लोगों में से भी केवल कुछ को खाद्य सहायता दे पा रही है. कुपोषण और बच्चों के अवरुद्ध विकास को रोकने के लिए विशेष पौष्टिक आहार का वितरण मई 2025 में पूरी तरह बन्द कर दिया गया था.
WFP ने चेतावनी दी है कि अफ़ग़ानिस्तान का पोषण संकट बेक़ाबू होता जा रहा है. वर्ष 2026 में आपातकालीन खाद्य सहायता और पोषण कार्यक्रमों के लिए लगभग 90 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है.
जॉन ऐलिफ़ ने कहा कि धन की कमी के कारण वर्ष के पहले छह महीनों में ज़रूरतें पूरी नहीं की जा सकीं. उन्होंने बताया कि सर्दियों से पहले के अगले छह महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस दौरान भूख का संकट और गहरा जाता है. गम्भीर खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए WFP को अब भी 50 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है.
© UNHCR/Andrew McConnellलश्कर गाह शहर के पास, हेलमन्द के बोलान क्षेत्र में बच्चे अपने परिवार के क्षतिग्रस्त घर में शरण लिए हुए हैं.ग़रीबी और भूख से बेहाल
अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) की प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और बाढ़ व कुपोषण से प्रभावित लोगों से बात की.
उन्होंने कहा, "लोग ग़रीबी, भूख, जलवायु आपदाओं, बढ़ते क़र्ज़ और परिवार की ज़रूरतें पूरी करने के रोज़ाना संघर्ष से थक चुके हैं."
तालेबान के सत्ता में आने के बाद 20 वर्षों का हिंसक टकराव समाप्त हो गया, लेकिन अनुमान है कि 37 लाख बच्चे और 12 लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएँ कुपोषण से प्रभावित होंगी.
वर्ष 2026 में अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता के लिए आवश्यक धनराशि का अब तक केवल 26 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ है. ओल्गा चेरेव्को ने कहा कि दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल मानवीय सहायता काफ़ी नहीं होगी.
मानवतावादी सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि गहराती भूख पलायन, कट्टरपंथ और अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती है, जिसका असर अफ़ग़ानिस्तान की सीमाओं से परे भी पड़ सकता है.

