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लेबनान: 11 लाख लोग विस्थापन को मजबूर, बच्चे और महिलाएँ अधिक प्रभावित

लेबनान: 11 लाख लोग विस्थापन को मजबूर, बच्चे और महिलाएँ अधिक प्रभावित

28 फ़रवरी को इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई बमबारी शुरू किए जाने और उसके बाद ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों से शुरू हुआ यह युद्ध, अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है.

इस टकराव की चपेट में खाड़ी क्षेत्र में स्थित देश भी आए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रवक्ता बाबर बलोच ने मंगलवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि 2 मार्च को इसराइल और लेबनान में सक्रिय हिज़बुल्लाह के बीच युद्ध फिर भड़कने के बाद से, 10 लाख से अधिक लोग देश के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं.

लेबनान के दक्षिणी हिस्से और इसराइल के उत्तरी हिस्से के बीच स्थित सीमा रेखा - 'ब्लू लाइन' की निगरानी कर रहे यूएन अन्तरिम बल (UNIFIL) ने बताया है कि दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी का सिलसिला जारी है और वहाँ सैन्य मौजूदगी में भी वृद्धि देखी जा रही है.

यूएन मानवीय संगठनों ने मंगलवार को चेतावनी दी कि आश्रय स्थलों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है, और मानसिक स्वास्थ्य की ज़रूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं.

इसके अलावा, अनेक लोग औपचारिक आश्रय केन्द्रों के बाहर रह रहे हैं, जहाँ उन्हें बुनियादी सेवाओं तक सीमित पहुँच ही मिल पा रही है.

© UNHCR

लेबनान की राजधानी बेरूत के एक रिहायशी इलाक़े में हवाई हमले की वजह से भारी क्षति हुई है और मलबे से धुँआ उठ रहा है.

लाखों लोग पलायन को विवश

UNHCR के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती हिंसा के बीच 2 से 27 मार्च के बीच, 2 लाख से अधिक लोगों ने लेबनान से सीरिया की ओर पलायन किया.

इनमें से अधिकांश यानि क़रीब 1.8 लाख सीरियाई नागरिक हैं, जिनमें वे शरणार्थी भी शामिल हैं जो वर्षों बाद लेबनान से अपने देश लौट रहे हैं. साथ ही, इनमें वे लोग भी हैं जिन्होंने पहले ही लौटने की योजना बनाई थी.

इनके अलावा, 28 हज़ार से अधिक लेबनानी नागरिकों ने भी सीमा पार की है, जिनमें अनेक लोग भारी बमबारी से बचने के लिए भागे हैं. लेबनान की कुल आबादी लगभग 58 लाख है.

स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित

यूएन के स्वास्थ्य क्षेत्र के साझीदारों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से अब तक लेबनान में, स्वास्थ्य सेवाओं पर 92 हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई है और 137 स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए हैं.

इन घटनाओं के कारण, प्रभावित लोगों की इलाज तक पहुँच गम्भीर रूप से प्रभावित हो रही है, जबकि उपचार के लिए आने वाले लोगों में भय का माहौल बढ़ता जा रहा है.

वहीं, अस्पताल लगातार भारी दबाव में हैं, जहाँ बड़ी संख्या में आघात मामलों के कारण आपात, आपात चिकित्सा सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं.

अस्पतालों को भीड़भाड़ और सीमित क्षमता के कारण, अपनी सेवाएँ बढ़ानी पड़ रही हैं या मरीज़ों को अन्य जगहों पर भेजना पड़ रहा है. इनमें विशेषकर नवजात देखभाल भी शामिल है.

© WFP/Marco Frattini

बिगड़ता मानसिक स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने से, लेबनान में मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं.

प्रभावित समुदायों में बढ़ते आघात, भय और अनिश्चितता के बीच हज़ारों लोग मानसिक स्वास्थ्य सहायता की मांग कर रहे हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और उसके साझीदार, आघात देखभाल के साथ-साथ, मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सेवाएँ भी उपलब्ध करा रहे हैं.

साथ ही, आवश्यक दवाएँ और चिकित्सा आपूर्ति पहुँचाकर शारीरिक और मानसिक प्रभावों से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं.

WHO के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमायर ने कहा कि विस्थापन के कारण संक्रामक बीमारियों का ख़तरा बढ़ रहा है, जिनमें ख़सरा, हेपेटाइटिस-ए और गम्भीर दस्त सम्बन्धी रोग शामिल हैं.

© UNHCR

बच्चे और महिलाएँ अधिक प्रभावित

प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमायर ने बताया कि क़रीब 1 लाख 40 हज़ार लोग 674 सामूहिक आश्रय स्थलों में रह रहे हैं, जिससे सेवाओं पर "गम्भीर दबाव" पड़ रहा है, विशेषकर बेरूत और माउंट लेबनान क्षेत्रों में.

WHO के अनुसार, आश्रय स्थलों में रह रहे विस्थापितों में 53 प्रतिशत महिलाएँ और लड़कियाँ हैं.

वहीं, कुल विस्थापित आबादी में लगभग एक-तिहाई संख्या बच्चों की है, जो असमान रूप से अधिक प्रभावित हो रहे हैं.

प्रवक्ता लिंडमायर ने बताया कि 6 अप्रैल तक देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 1,461 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 129 बच्चे हैं, जबकि 4,400 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने कहा, "केवल एक सप्ताह में मौतों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है."

WHO महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सभी पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करने और स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्यकर्मियों तथा मरीज़ों की सक्रिय रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.

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