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मध्य पूर्व संकट से 'वैश्विक ऊर्जा' की कमज़ोरी उजागर, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़त का आग्रह

मध्य पूर्व संकट से 'वैश्विक ऊर्जा' की कमज़ोरी उजागर, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़त का आग्रह

ग़ौरतलब है कि फ़ारस की खाड़ी में होर्मुज़ जलडमरूमध्य(Strait of Hormuz), से दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुज़रता है. यह संकरा समुद्री मार्ग, ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल के हमलों से भड़के युद्ध के कारण नौपरिवहन (Shipping) के लिए बहुत हद तक बन्द हो गया है.

आपूर्ति में इस व्यवधान के परिणामस्वरूप जीवाश्म ईंधन तक देशों की पहुँच कम हो गई है, जिसकी आवश्यकता दुनिया भर के देशों को बिजली उत्पादन के लिए होती है. इसके कारण क़ीमतें बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक बाज़ारों में घबराहट पैदा हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बन्द होने से उत्पन्न हुई बाधा, एक मौलिक मुद्दे को रेखांकित करती है, वो ये कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आपूर्ति के बारे में बात नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अस्थिर होती दुनिया में, सहनशीलता यानि लचीले और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को खोजने का मुद्दा है.

© World Bank

यह मुद्दा क्यों अहम है

जीवाश्म ईंधन के उपयोग पर चिन्ता, आमतौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी रही है, लेकिन अब ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा अधिक केन्द्र में आ गया है. वर्ष 2026 के आरम्भ में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया था कि "युद्ध के इस युग में... जीवाश्म ईंधन प्रयोग करने की हमारी लत, जलवायु और वैश्विक सुरक्षा, दोनों को अस्थिर कर रही है."

युद्ध का प्रभाव

मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से यह स्पष्ट हो गया है कि:

  • तेल और गैस की अहम आपूर्ति, उन क्षेत्रों में केन्द्रित है जो युद्ध के प्रति संवेदनशील हैं.
  • सैन्य तनाव बढ़ने से परिवहन मार्ग बाधित हो सकते हैं.
  • क़ीमतों में अस्थिरता तेज़ी से अर्थव्यवस्थाओं में फैल जाती है.

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जीवाश्म ईंधन से दूरी ज़रूरी

ऐसे हालात में जबकि दुनिया भर के देश, नागरिकों की दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने और आर्थिक विकास के लिए जीवाश्म ईंधन के प्रयोग पर भरोसा जारी रखे हुए हैं, यह स्पष्ट हो गया है कि वे आपूर्ति में अचानक व्यवधानों के प्रति पहले से कहीं अधिक संवेदनशील हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने आगाह किया है कि विकास बजट "ईंधन बिलों में ख़र्च हो रहा है, जो भू-राजनैतिक उथल-पुथल की दया पर निर्भर है."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा: "हमें जीवाश्म ईंधन से दूर जाने के बदलाव को वर्जित (taboo) मानना बन्द करना होगा."

© UNDP Georgia

स्वच्छ ऊर्जा का वादा

जीवाश्म ईंधन की कमी से होने वाले संकट और अराजकता से बचने का एक समाधान सौर, पवन और जल शक्ति जैसे नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़त है.

ये एक मौलिक रूप से भिन्न बिजली प्रावधान मॉडल मुहैया कराते हैं, जो अधिक सुलभ और सम्भावित रूप से सस्ता है.

जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने ज़ोर दिया है, "नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सम्प्रभुता का सबसे स्पष्ट और सस्ता मार्ग है."

ऊर्जा परिवर्तन जारी है

जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़त का बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है:

  • केनया: भू-तापीय (geothermal) शक्ति में वैश्विक नेता बन गया है.
  • चिले: दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ारों में से एक है, जिसने कोयले से दूरी बनाकर सौर और पवन ऊर्जा को अपनाया है.
  • भारत: भारत ने भी सौर और पवन बुनियादी ढाँचे के विस्तार पर ध्यान केन्द्रित किया है, हालाँकि यह अब भी तेल और गैस के लिए काफ़ी हद तक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भर है.

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आम लोगों की शक्ति

ऊर्जा सुरक्षा न केवल एक भू-राजनैतिक मुद्दा है, बल्कि यह बेहद व्यक्तिगत भी है, जो परिवारों को बढ़े हुए बिजली बिलों और जीवन यापन की लागत के रूप में प्रभावित करता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अधिकांश मामलों में नवीकरणीय ऊर्जा कोयले, तेल या गैस की तुलना में सस्ती है, और इसलिए यह घरों के लिए बिजली की लागत को सीधे तौर पर कम कर सकती है.

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