यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बुधवार को न्यूयॉर्क में नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि ग़ाज़ा पट्टी में हमले अब भी जारी हैं, जिनसे रिहायशी इलाक़े भी प्रभावित हैं और बुनियादी सेवाओं में व्यवधान आया है.
हाल ही में, ग़ाज़ा सिटी में एक जल कुएँ के पास, एक ग़ैर-सरकारी संगठन के लिए काम कर रहे कुछ कर्मचारी ऐसे ही एक हवाई हमले की चपेट में आ गए. इनमें एक कर्मचारी की मौत हो गई है जबकि चार अन्य घायल बताए गए हैं.
इस घटना में कुएँ को भारी नुक़सान पहुँचा है और वहाँ मरम्मत कार्य को फ़िलहाल स्थगित कर दिया गया है. इससे पहले, अल मंसूरा में एक अन्य जल केन्द्र पर गतिविधियों को रोका गया था, जहाँ यूनीसेफ़ के साथ एक अनुबन्ध के तहत काम कर रहे दो ट्रक डाइवर मारे गए थे.
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद, जल उत्पादन में कमी न आने देने के लिए कोशिश जारी हैं. स्वच्छ जल के स्रोतों की तलाश की जा रही है और ट्रक के ज़रिए पानी वितरित किया जा रहा है. हालांकि, उनका कहना है कि जल के लिए लोगों की आवश्यकताएँ अभी पूरी नहीं हो पा रही हैं. ग़ाज़ा में 60 प्रतिशत परिवारों की दैनिक कार्यों में उपयोग में लाए जाने वाले स्वच्छ जल तक पहुँच नहीं है.
फ़िलहाल, जल वितरण के लिए जिस व्यवस्था पर निर्भरता है, वह ख़र्चीली है और टिकाऊ नहीं है. इसमें ईंधन के अधिक इस्तेमाल, जनरेटर, तेल, मरम्मत के लिए पुर्ज़ों, ट्रक, पाइपलाइन के नैटवर्क की आवश्यकता है, जोकि फ़िलहाल पर्याप्त स्तर पर नहीं है.
स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में इस सामग्री समेत अन्य वस्तुएँ पहुँचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और यदि ये ज़रूरतें पूरी नहीं हुई, तो जल उत्पादन व अन्य सेवाओं के ढहने का जोखिम है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत आम नागरिकों और बुनियादी प्रतिष्ठानों की रक्षा की जानी होगी, और इनमें वे व्यवस्था भी हैं, जिन पर आम लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए निर्भर हैं.
इस बीच, ग़ाज़ा पट्टी में सभी सैक्टर में मानवीय सहायता अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है. मानवीय सहायता एजेंसियों ने मंगलवार को केरेम शलोम सीमा चौकी से भोजन, दवा, स्वच्छता सामग्री को एकत्र किया था.
इसके अलावा, 24 मरीज़ों और उनके तिमारदारों को चिकित्सा कारणों से बाहर जाने की अनुमति दी गई और ग़ाज़ा लौटने वाले 50 लोगों को संरक्षण व अन्य सेवाएँ मुहैया कराई गईं.
योरोप: वैश्विक औसत की तुलना में, तापमान वृद्धि की दोगुनी गति
© WHOयोरोपीय क्षेत्र में तापमान, वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है.योरोप में तापमान में हो रही तेज़ बढ़ोत्तरी की वजह से बर्फ़ और जमे हुए पानी की चादर का आकार सिकुड़ता जा रहा है. वहीं, ऊँचा तापमान, सूखा, ताप लहरें और महासागर का रिकॉर्ड तापमान, आर्कटिक से भूमध्यसागर तक के क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के एक नए अध्ययन में बताया गया है कि दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तरह योरोप में भी इस बदलाव के प्रभाव महसूस किए जा रहे हैं. भूमि व समुद्र में ताप लहरें चल रही हैं, वनों में भयावह आग लगने की घटनाएँ हो रही हैं, और जैवविविधता को हानि पहुँच रही है.
कॉपेरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के साथ मिलकर तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, योरोप में, वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी गति से तापमान में वृद्धि हो रही है.
WMO के अनुसार, योरोप के कम से कम 95 प्रतिशत हिस्से में, वर्ष 2025 के दौरान औसत से अधिक वार्षिक तापमान दर्ज किए गए.
इसके अलावा, स्कैंडिनेविया क्षेत्र में तीन सप्ताह तक रिकॉर्ड ताप लहरों का सामना किया गया, जहाँ आर्कटिक सर्किल में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया. योरोप के लिए समुद्री सतह के वार्षिक तापमान ने भी रिकॉर्ड बनाया, और 86 प्रतिशत क्षेत्र में तेज़ समुद्री ताप लहरों का अनुभव किया गया.
वनों में आग लगने की घटनाओं से 10 लाख हैक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जल गया, जोकि अब तक रिकॉर्ड पर सबसे अधिक इलाक़ा है. वहीं, नदियों में जल प्रवाह को 11 महीने के लिए औसत से कम आंका गया.

