यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की 'World Health Statistics 2026' नामक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरी आई है, और लाखों-करोड़ों लोगों तक रोकथाम उपायों, उपचार सेवाओं व अति-आवश्यक सेवाओं का लाभ पहुँचा है.
मगर, स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं और नई समस्याएँ भी उभर रही हैं, जिनकी वजह से दुनिया, स्वास्थ्य सम्बन्धी टिकाऊ विकास लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करने से अभी दूर है.
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बीते एक दशक में निम्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है:
- 2010 से 2024 के दौरान नए एचआईवी संक्रमणों में 40 फ़ीसदी की गिरावट आई है
- तम्बाकू का इस्तेमाल और ऐल्कॉहॉल का सेवन, 2010 के स्तर की तुलना में घटा है
- उपेक्षित उष्कटिबन्धीय बीमारियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता वाले लोगों की संख्या में, 2010 से 2024 के दौरान 36 प्रतिशत की कमी आई है
- 2015 से 2024 के दौरान, 96 करोड़ लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुँच हुई है, 1.2 अरब के पास साफ़-सफ़ाई और 1.6 अरब के पास बुनियादी स्वच्छता सेवाएँ हैं
- 1.4 अरब लोगों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन समाधान भी उपलब्ध हैं.
WHO के अफ़्रीकी क्षेत्र में, एचआईवी (-70%) व टीबी (-28%) संक्रमण मामलों में गिरावट की रफ़्तार वैश्विक स्तर से कहीं अधिक तेज़ी से हुई है. वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र मलेरिया के मामलों में कमी लाने के लिए निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर है.
मगर, चुनौतियाँ बरक़रार हैं. उदाहरणस्वरूप, 2015 के बाद से अब तक, मलेरिया के मामलों में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
स्वास्थ्य को कमज़ोर करने वाले ऐसे जोखिम, जिनकी रोकथाम सम्भव है, प्रगति को प्रभावित कर रहे हैं. रक्त की कमी (ऐनीमिया) से प्रजनन आयु की लगभग 30 प्रतिशत महिलाएँ प्रभावित हैं और बीते एक दशक में कोई बेहतरी नहीं हुई है. 5 वर्ष से कम आयु में अधिक वज़न वाले बच्चों की संख्या, वर्ष 2024 में 5.5 प्रतिशत तक पहुँच गई.
महिलाओं के विरुद्ध हिंसा भी व्यापक स्तर पर है और विश्व भर में, हर 4 में से 1 महिला, अंतरंग साथी द्वारा हिंसा से प्रभावित हैं.
यूएन स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि यह डेटा, प्रगति और मौजूदा असमानताओं को रेखांकित करता है, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और उन इलाक़ों के निवासियों की स्थिति को जहाँ स्वस्थ जीवन के लिए बुनियादी सेवाएँ कम ही पहुँच पाती हैं.
प्रगति पर दबाव
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने की दिशा में प्रगति सुस्त हुई है. विश्व की 25 प्रतिशत आबादी, स्वास्थ्य ख़र्चों की वजह से वित्तीय कठिनाइयों की शिकार हुई. 2022 में 1.6 अरब लोग इस वजह से निर्धनता के गर्त में धकेल दिए गए.
बचपन में टीकाकरण की कवरेज भी अभी लक्ष्य से नीचे है और प्रतिरक्षण की कमी, बीमारियों के प्रकोप की वजह बनती है. वैश्विक स्तर पर मातृत्व मृत्यु दर में, वर्ष 2000 से अब तक 40 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन यह अब भी, 2030 के लक्ष्य की तुलना में तीन गुना अधिक है.
5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु मामले 51 फ़ीसदी तक घटे हैं, लेकिन अनेक देश अब भी लक्ष्य हासिल करने से दूर हैं. ग़ैर-संचारी रोगों के कारण होने वाली असामयिक मौतों में कमी लाने में प्रगति हुई है, लेकिन 2015 के बाद से उसकी गति धीमी हो रही है.
वायु प्रदूषण की वजह से, विश्व भर में 2021 में 66 लाख मौतें होने का अनुमान है, जबकि जल, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता की कमी से 2019 में 14 लाख मौतें हुईं.
रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने 2020 से 2023 के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों की निर्बलताओं को उजागर किया, जब 2.21 करोड़ अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं.
कोविड-19 के कारण आधिकारिक मृतक आँकड़े का यह तीन गुना से भी अधिक है, जोकि वैश्विक महामारी के व्यापक असर, जीवन प्रत्याशा के मोर्चे पर हुई प्रगति को पहुँची ठेस को व्यक्त करता है. कुछ साल बीतने के बावजूद, स्थिति अभी असमान है और पूरी तरह उबरना सम्भव नहीं हो पाया है.
बेहतर डेटा जुटाने पर बल
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने सचेत किया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में उपयुक्त डेटा की अक्सर कमी है, जिससे प्रगति का पूर्ण आकलन कर पाना सम्भव नहीं है.
2025 तक, केवल 18 प्रतिशत देश ही मृत्यु सम्बन्धी डेटा को एक वर्ष के भीतर, WHO को मुहैया करा रहे थे. क़रीब एक-तिहाई देशों ने कभी भी, मृत्यु के कारणों से सम्बन्धित डेटा की जानकारी नहीं दी है.
केवल 33 प्रतिशत देशों में ही उच्च-गुणवत्ता वाले मृत्यु सम्बन्धी डेटा के लिए WHO मानकों का पालन किया जाता है, जबकि 50 फ़ीसदी के पास या तो डेटा कम है या उसकी गुणवत्ता ख़राब है.
इसके मद्देनज़र, महानिदेशक घेबरेयेसस ने मज़बूत, अधिक समतापूर्ण स्वास्थ्य प्रणालियों में निवेश की आवश्यकता पर बल दिया है. साथ ही, ध्यान दिलाया है कि लक्षित कार्रवाई को पूरा करने के लिए डेटा की सुदृढ़ व्यवस्था की जानी होगी और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी भी ज़रूरी है.
स्वास्थ्य डेटा की बेहतर उपलब्धता होने से, 2030 तक स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे.

